मंदिर के बारे में

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश में शिप्रा नदी के किनारे उज्जैन नगर बसा हुआ है। जिसको इंद्रपुरी-अमरावती या अवंतिका भी कहते है। यही शिवाजी भगवान का महाकालेश्वर मंदिर है। महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। उज्जैन की मान्यता किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है। यहां पर स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पूरे विश्व में एक मात्र ऎसा ज्योतिर्लिंग है. जो दक्षिण मुखी है । अर्थात इस ज्योतिर्लिंग का मुख दक्षिण दिशा कि ओर है । यह ज्योतिर्लिंग तांत्रिक कार्यो के लिए विशेष रुप से जाना जाता है । अनेको साधक अपनी तांत्रिक साधनाओं को पूर्ण करने लिए यहाँ आते रहते है। यहाँ भगवान शिव को महाकाल के रूप में पूजा जाता है।

महाकालेश्वर मंदिर की धार्मिक महत्ता

पौराणिक मान्यता रही है कि इस स्थान पर धर्मात्मा ब्राह्मण निवास करता था। उस समय एक दैत्य ने यहाँ सभी लोगो को कष्ट पहुंचाना शुरू कर दिया और सभी लोग इस दैत्य के कृत्य से भयभीत हो गयी तथा सभी लोग उस ब्राह्मण की शरण में गयी उसके बाद उस ब्राह्मण ने पूजा पाठ किया एव कठिन तपस्या की तब भगवान शिव ने उनकी मुराद पूरी करते हुए वह महाकाल के रूप में दर्शन दिए एव सभी दैत्यों का सर्वनाश किया, उसके बाद भक्तो द्वारा विनती करने पर महाकाल ने उसी स्थान पर एक ज्योतिर्लिंग में स्थान ग्रहण किया एव नगर की सुरक्षा की।

महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास

उज्जैन का यह विश्वप्रसिद मंदिर महाकाल की नगरी के रूप में जाना जाता है , इसका इतिहास कई सदियों पुराना रहा है।
महाकालेश्वर के इतिहास के बारे में बात करें तो बता दें कि सन 1107 से लेकर 1728 तक उज्जैन में यवनों का शासन रहा था। इस शासन काल में लगभग हिंदुओं की प्राचीन परम्पराएं लगभग नष्ट हो गई थी। इसके बाद मराठो ने 1690 में मालवा क्षेत्र में हमला कर दिया था। फिर 29 नवंबर 1728 में मराठा शासकों ने मालवा में अपना शासन कर लिया था। इसके बाद उज्जैन की खोया हुआ गौरव और चमक फिर से वापस आई इसके बाद यह साल 1731 से 1728 के बाद यह मालवा मालवा की राजधानी बनी रही। मराठो के अधिपत्य के समय यहां पर 2 बड़ी घटनाए हुई। पहली घटना यह थी कि पहले यहां पर स्थित महाकालेश्वर मंदिर का फिर से निर्माण किया गया और ज्योतिर्लिंग की ख़ोई हुई प्रतिष्ठा वापस मिली। इसके अलावा यहाँ सिंहस्थ पर्व स्नान की स्थापना की गई जो बेहद खास उपलब्धि थी। आगे चलकर इस मंदिर का विस्तार राजा भोज द्वारा किया गया।

महाकालेश्वर मंदिर की वास्तुकला

महाकालेश्वर मंदिर मराठा, भूमिज और चालुक्य शैलियों की वास्तुकला का एक सुंदर और कलात्मक मेल है। यह पवित्र मंदिर एक झील के पास स्थित है जो विशाल दीवारों से घिरे हुए विशाल आंगन में स्थित है।
बता दें कि इस मंदिर में पांच मंजिले हैं, जिनमें से एक जमीन के अंदर स्थित है। यहां पर महाकालेश्वर की विशाल मूर्ति गर्भगृह (जमीन के अंदर) में स्थित है और यह दक्षिणा-मूर्ति है, जिसका मतलब होता है दक्षिण दिशा की ओर मुंह वाली मूर्ति। यह खास बाते सिर्फ महाकालेश्वर मंदिर में पाई जाती है।

महाकालेश्वर के इस सुंदर मंदिर के मध्य और ऊपर के हिस्सों में ओंकारेश्वर और नागचंद्रेश्वर के लिंग स्थापित हैं। लेकिन आप नागचंद्रेश्वर की मूर्ति दर्शन सिर्फ नाग पंचमी के अवसर पर ही कर सकते हैं क्योंकि केवल इसके इस खास मौके पर ही इसे आम जनता के दर्शन के लिए खोला जाता है। इस मंदिर के परिसर में एक बड़ा कुंड भी है जिसको कोटि तीर्थ के रूप में जाना-जाता है। इस बड़े कुंड के बाहर एक विशाल बरामदा है, जिसमें गर्भगृह को जाने वाले मार्ग का प्रवेश द्वार है। इस जगह गणेश, कार्तिकेय और पार्वती के छोटे आकार के चित्र भी देखने को मिलते हैं। यहां पर गर्भगृह की छत को ढंकने वाली गूढ़ चांदी इस तीर्थ जगह की भव्यता को और भी ज्यादा बढ़ाती है। मंदिर में बरामदे के उत्तरी भाग में एक कक्ष है जिसमे भगवान श्री राम और देवी अवंतिका के चित्रों की पूजा की जाती है।

महाकालेश्वर मंदिर के कुछ रोचक तथ्य

  • भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है.
  • ज्योतिर्लिंग का मुख दक्षिण की तरफ होने पर इसे दक्षिणामूर्ति मंदिर भी कहा जाता है.
  • महाकालेश्वर मंदिर 5 तलों में बना हुआ है जिसमें से एक तल मंदिर के नीचे भी है.
  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के तल के ऊपर ओंकारेश्वर और उसके ऊपर नागचंद्रेश्वर मंदिर है.
  • हर साल महाशिवरात्रि के दिन यहां बहुत बड़ा मेला लगता है जिसकी रौनक पूरी रात बनी रहती है,
  • उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को मुगल शासक इल्तुतमिश ने अपने आक्रमण के दौरान लूटपाट करने के उद्देश्य से नष्ट कर दिया था.
  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का वर्तमान प्रांगण साल 1736 के आसपास रानौजी सिन्धिया ने बनवाया था. साल 1886 में जयाजीराव(jayajirao) सिन्धिया ने इस मंदिर प्रांगण में बहुत सारे सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाए थे.
  • स्वतंत्रता के पश्चात इस ज्योतिर्लिंग की देखभाल की जिम्मेदारी देव स्थान ट्रस्ट से उज्जैन की नगर निगम संस्था के पास चली गई.
  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के तीसरे तल में स्थित नाग चंद्रेश्वर मंदिर साल में सिर्फ नाग पंचमी के दिन ही खुलता है.
  • लोक-कहानियों के अनुसार नागपंचमी के दिन यहां स्वयं नागराज तक्षक मौजूद रहते हैं.
  • नागपंचमी के दिन महकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में एक दिन में ही लगभग 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालु मौजूद रहते हैं.
  • मान्यताओं के अनुसार महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन मात्र से ही हर रोग से मुक्ति मिल जाती है.
  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के शिवलिंग का आकार अन्य सभी ज्योतिर्लिंगों के आकार से बड़ा है.
  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से लगा एक छोटा सा जलस्रोत है जिसे तीर्थकोट कहा जाता है.
  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के 118 शिखरों के ऊपर हाल में ही 16 किलो स्वर्ण की परत चढ़ाई गई है.

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर के अलावा आसपास पर्यटन स्थल

  • गडकालिका मंदिर
  • हरसिद्धि मंदिर
  • मंगलनाथ मंदिर
  • श्री राम जानकी मंदिर
  • काल भैरव मंदिर
  • राम घाट
  • सांदीपनि आश्रम

कैसे पहुचें

वायु मार्ग के द्धारा:
अगर आप महाकालेश्वर उज्जैन हवाई जाहज की सहायता से जाना चाहते हैं तो बता दें कि इंदौर में महारानी अहिल्या बाई होल्कर एअरपोर्ट उज्जैन का सबसे निकटतम हवाई अड्डा है। इंदौर के लिए आपको देश के सभी बड़े शहर मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, भोपाल और अहमदाबाद से फ्लाइट मिल जाएगी। यहां पहुंचने के बाद आपको उज्जैन तक जाने के लिए कोई भी टैक्सी, बस या कैब मिल जाएगी। महारानी अहिल्या बाई होल्कर से महाकालेश्वर की दूरी 56 किलोमटर है, जिसमे आपको 1 घंटा 20 मिनट का समय लगेगा।

रेल मार्ग के द्धारा:
अगर आप महाकालेश्वर उज्जैन के लिए रेल से यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं तो बता दे कि उज्जैन शहर में उज्जैन सिटी जंक्शन, विक्रम नगर और चिंतामन (मीटर गेज) मुख्य रूप से तीन प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं। यहां कई ट्रेन नियमित आती हैं जो भारत के महत्वपूर्ण शहरों से उज्जैन को जोड़ती हैं।

सड़क मार्ग के द्धारा:
अगर आप उज्जैन बस या सड़क मार्ग से आना चाहते हैं तो जान लें कि उज्जैन में प्रमुख बस स्टेशन देवास गेट और नानाखेड़ा हैं।अगर आप अपने निजी वाहन से यात्रा करना चाहते हैं तो बता दें कि उज्जैन से भारत को मुख्य शहरों से जोड़ने वाली सड़कें आगर रोड, इंदौर रोड, देवास रोड, मक्सी रोड और बड़नगर रोड हैं। इन सड़कों में कई निजी बस चलती हैं। आप अपने वाहन से भी इन्ही सड़कों की सहायता से उज्जैन आ सकते हैं।

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