मंदिर के बारे में

जयपुर में स्थित गोविंद देवजी मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। 18 वीं शताब्दी में यह मंदिर जयपुर से वृंदावन से लाया गया था तब से यह जयपुर के शाही परिवारों द्वारा भी पूजा जाता है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति उनके पोते, बज्रानभ द्वारा स्थापित की गयी थी। गोविंद देव जी देवता, और कोई नही श्री कृष्ण ही है।

इतिहास

इस मंदिर के पीछे का इतिहास यह है कि भगवान गोविंद देव जी की मूर्ति महाराजा सवाई जय सिंह ने वृंदावन से लाकर अपने सूर्य महल में स्थापित की थी। माना जाता है कि राजा ने , अपने सपने से प्रेरित होकर, जिसमें भगवान कृष्ण ने मूर्ति को मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा नष्ट होने से बचाने के लिए उन्हें अपने महल में मूर्ति को स्थापित करने के लिए कहा था, इसे बाद महाराजा सवाई जय सिंह ने अपने लिए एक चंद्र महल भी बनवाया।

मंदिर की वास्तुकला

मंदिर सादे रूप में पर सुंदर ढंग से बना हुआ है जहाँ एक खुला मंडप है जो छोटे खम्बों से घीरा हुआ है। जन्माष्टमी के त्यौहार पर, देश भर में हजारों भक्त इस मंदिर में आते है और मंदिर प्रबंधन द्वारा कई अलग – अलग धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मंदिर की छत को सोने से सजाया गया है मंदिर का उपयुक्त स्थान महाराजा को अपने चन्द्र महल से सीधा नज़र आता है। मंदिर में गोविंदजी और राधा जी की सोने के गहनो से सजी काले रंग की मूर्ति है।

आरती समय

  • मंगला आरती प्रातःकाल : 4 : 30 प्रातः से 5 : 45 प्रातः
  • धुप आरती प्रातःकाल : 8 : 15 संध्या से 9 : 30 संध्या
  • श्रृंगार आरती प्रातःकाल : 10 : 15 प्रातः से 11 : 00 प्रातः
  • राज भोग आरती प्रातःकाल : 11 : 45 दोपहर से 12 : 15 दोपहर
  • ग्वाल आरती प्रातःकाल : 5 : 30 संध्या से 6 : 00 संध्या
  • संध्याकाल : 6 : 30 संध्या से 7 : 45 संध्या
  • श्यान आरती रात्रि : 8 : 15 रात्रि से 9 : 15 रात्रि
  • जलेबी चौक, बड़ी चौपड़, जयपुर, राजस्थान - ३०२००२
  • 0141-2619413
  • govind.mandir@gmail.com