राधा जी की आरती
राधा चालीसा
राधा जी के भजन
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वृन्दावन में उड़े रे गुलाल कह दो राधा रानी से vrindavan me ude re gulal keh do radha rani se कृष्ण जी
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राधा नाम जपा कर बन्दे radha naam japa kar bande कृष्ण जी ▶ वीडियो
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सुनले श्री राधे रानी sunle shree radhe rani कृष्ण जी ▶ वीडियो
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होली खेलन राधे रानी आजा ब्रज की गलियन में holi khelan radhe rani aaja braj ki galiyan me ▶ वीडियो
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होली में हुड़दंग मचावे holi me huddang machave कृष्ण जी ▶ वीडियो
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तेरी दीवानी राधा रानी teri diwani radha rani कृष्ण जी ▶ वीडियो
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राधा रानी को मिलने ने श्याम तरसे radha rani ko milne ne shyam tarse कृष्ण जी ▶ वीडियो
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राधा रानी के मंदिर में radha rani ke mandir me
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नाम मेरी राधा रानी का जिस जिस ने गाया है Nam Meri Radha Ranii Ka Jis Jis Ne Gaya Hai
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लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में है Ladli Adbhut Nazara Tere Barsaane Me Hai
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सुन राधिका दुलारी..हमें श्याम ना मिला Sun Radhika Dulari..Hamen Shyam Naa Mila
राधा जी के व्रत और त्योहार
राधा जी के प्रसिद्ध मंदिर
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जयपुर, राजस्थान
श्री गोविंद देव जी मंदिर
श्री राधा कृष्णा
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जयपुर, राजस्थान
मंदिर श्री बृज निधि जी
श्री कृष्ण एवं राधा
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पंचकूला, हरियाणा चंडी मंदिर, पंचकूला माँ चंडी (साथ में राधा-कृष्ण, हनुमान, शिव और श्रीराम)
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दक्षिण-पूर्व दिल्ली, दिल्ली इस्कॉन मंदिर (श्री श्री राधा पार्थसारथी), दिल्ली श्री श्री राधा पार्थसारथी (राधा-कृष्ण)
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दक्षिण-पूर्व दिल्ली, दिल्ली चित्तरंजन पार्क काली मंदिर, दिल्ली माँ काली (साथ में भगवान शिव और राधा-कृष्ण)
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Junagadh, गुजरात श्री राधा दामोदर मंदिर, जूनागढ़ श्री दामोदर जी (चतुर्भुज श्रीकृष्ण) और राधा रानी; बलराम-रेवती
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पूर्वी दिल्ली, दिल्ली स्वामीनारायण अक्षरधाम, दिल्ली भगवान स्वामीनारायण; साथ में सीता-राम, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती और लक्ष्मी-नारायण
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Ahmedabad, गुजरात श्री स्वामिनारायण मंदिर (कालूपुर), अहमदाबाद श्री नरनारायण देव, राधाकृष्ण (साथ में धर्मदेव, भक्तिमाता और हरिकृष्ण)
देवी राधा – परिचय
राधा अथवा राधिका हिन्दू धर्म की प्रमुख देवी हैं।[ वह कृष्ण की प्रेमिका और संगिनी के रूप में चित्रित की जाती हैं। इस प्रकार उन्हें राधा कृष्ण के रूप में पूजा जाता हैं। पद्म पुराण के अनुसार, वह बरसाना के प्रतिष्ठित यादव राजा वृषभानु गोप की पुत्री थी एवं लक्ष्मी अवतार थीं।
भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा अष्टमी अर्थात राधा रानी के प्रकट होने के दिन के रूप में मनाया जाता है। द्वापर युग में इसी पावन तिथि पर देवी राधा का जन्म हुआ था।
राधा अष्टमी व्रत का महत्व
एक बार श्री कृष्ण भक्ति के अवतार देवर्षि नारद ने भगवान सदाशिव के चरणों में प्रणाम करके पूछा कि श्री राधा देवी लक्ष्मी, देवपत्नी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अन्तर्ज्ञान विद्या, वैष्णवी प्रकृति, वेदकन्या, मुनिकन्या आदि कौन हैं?
इस प्रश्न के उत्तर में भगवान ने कहा कि एक तो क्या, करोड़ों महालक्ष्मियां भी उनके चरण कमलों की सुन्दरता के सामने नहीं टिक सकतीं, इसीलिए तीनों लोकों में कोई भी श्री राधाजी के रूप, गुण और सुन्दरता का एक मुख से वर्णन करने की क्षमता नहीं रखता। उनकी सुन्दरता जगत को मोहित करने वाले श्री कृष्ण को भी मोहित करने के लिए पर्याप्त है, इसीलिए मैं अनंत मुखों से भी उनका वर्णन नहीं कर सकता।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री राधाजी के चरणों के दर्शन होते हैं। उनके चरणों की शोभा का वर्णन करना किसी के लिए भी संभव नहीं है।
जिनके इष्टदेव श्री राधा-कृष्ण हैं, उन्हें राधाष्टमी व्रत अवश्य करना चाहिए क्योंकि यह व्रत सर्वश्रेष्ठ है। श्री राधाजी अत्यंत पवित्र और ऐश्वर्यशाली हैं। लक्ष्मीजी अपने भक्तों के घर में सदैव निवास करती हैं। इस व्रत को करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मनुष्य को सभी सुख प्राप्त होते हैं। इस दिन राधाजी से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है।