vishnu-ji

भगवान विष्णु

बारे में

अस्त्र
शंख (पाञ्चजन्य), चक्र (सुदर्शन), गदा (कौमोदकी) और पद्म, धनुष (शार्ङ्ग), तलवार नंदक और फरसा परशु

प्रतीक
शालिग्राम और आँवले का पेड़

त्यौहार
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सवारी
गरुड़

जीवनसाथी
महालक्ष्मी देवी , भूदेवी और तुलसी

भगवान विष्णु हिन्दू धर्म के अनुसार परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु को विश्व का पालनहार कहा गया है। त्रिमूर्ति के अन्य दो भगवान शिव और ब्रह्मा को माना गया है। जहाँ ब्रह्मा को विश्व का सृजन करने वाला माना गया है, वहीं शिव को संहारक माना गया है।

भगवान विष्णु को नारायण और हरि के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों के अनुसार नारायण की पत्नी लक्ष्मी हैं। उनका निवास क्षीर सागर हैं। उनका शयन शेषनाग के ऊपर हैं। उनकी नाभि से कमल उत्पन्न होता है जिसमें ब्रह्मा जी स्थित हैं। वे अपने नीचे वाले बायें हाथ में पद्म धारण करते हैं। नीचे वाले दाहिने हाथ में कौमोदकी नाम की गदा धारण करते हैं। ऊपर वाले बायें हाथ में पांचजन्य शंख धारण करते हैं। ऊपर वाले दाहिने हाथ में सुदर्शन चक्र धारण करते हैं।

हिन्दू धर्म ग्रन्थों के अनुसार कहते हैं की जब भी पृथ्वी पर कोई संकट आता है तो भगवान अवतार लेकर उस संकट को दूर करते हैं. भगवान शिव और भगवान विष्णु ने कई बार पृथ्वी पर अवतार लिया. अब तक भगवान विष्णु पृथ्वी पर 23 बार अवतार ले चुके हैं. और 24वें अवतार को लेकर मान्यता है कि कल्कि अवतार के रूप में भगवान विष्णु का अवतरित होना सुनिश्चित है. भगवान विष्णु के 24 अवतारों में भगवान के 10 प्रमुख अवतार है

मत्स्य अवतार, कूर्म अवतार, वराह अवतार, नृसिंह अवतार, वामन अवतार, परशुराम अवतार, राम अवतार. कृष्ण अवतार, बुद्ध अवतार, कल्कि अवतार। आइए जानें विस्तार से

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