हिंदू धर्म में दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस दिन गेहूँ, चावल जैसे अनाज, बेसन से बनी कढ़ी और पत्ते वाली सब्जियों से बने भोजन को पकाया जाता है और भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है।

पुरानी मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान कृष्ण ने देव राज इंद्र के घमंड को चूर-चूर कर दिया था. कहानी के अनुसार जब कृष्ण ने गांववालों से देव राज इंद्र की पूजा करने से मना कर दिया था तब देव राज इंद्र को गुस्सा आ गया और उन्होंने खूब बारिश की जिसकी वजह से पूरा गोकुल तबाह हो गया तब भगवान कृष्ण ऊंगली पर गोवर्द्धन पर्वत उठाकर लोगों को पहाड़ के नीचे सुरक्षित किया. जिसके बाद देव राज इंद्र का अहंकार टूट गया.

विधि-
इस दिन प्रात:कल उठकर शरीर पर तेल की मालिश करके नहाएं। फिर घर के द्वार पर गोबर से प्रतीकात्मक गोवर्धन पर्वत बनाकर उसे जल, मौली, रोली, चावल, फूल दही तथा तेल का दीपक जलाकर उसकी पूजा करते हैं। इसके बाद गोबर से बने इस पर्वत की परिक्रम लगाई जाती है। इसके बाद ब्रज के देवता कहे जाने वाले गिरिराज भगवान को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। इस के बाद कथा सुने, प्रसाद के रूप मे सही व चीनी का मिश्रण सबमे बांट दें।