कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता हैं। इस दिन नरक से मुक्ति पाने के लिए प्रात:काल तेल लगाकर अपामार्ग अर्थात खिचड़ी के पौधे मिश्रित जल से स्नान करना चाहिये। इस दिन शाम को यमराज के लिए चौराहे पर दीपदान करना चाहिये।

इसे रूप चतुर्दशी को कहा जाता है।  पुराणों के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान श्रीकृष्ण नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी।

दीपावली को एक दिन का पर्व कहना न्योचित नहीं होगा। इस पर्व का जो महत्व और महात्मय है उस दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण पर्व व हिन्दुओं का त्यौहार है। यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्यौहार है जैसे मंत्री समुदाय के बीच राजा। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली फिर दीपावली और गोधन पूजा, भाईदूज

पूजन विधि :

इस दिन प्रात: उठकर आटा, तेल, हल्दी से उबटन करें फिर स्नान करें। एक थाली में एक चौमुखा दीपक और छोटे दीपक रखकर उनमें तेल बत्ती डालकर जला लें। फिर रोली, बीर, गुलाल, पुष्प आदि से पूजा करें। पूजन के पश्चात् सब दीपकों को घर में विभिन्न स्थानों रखें, उसे पूजा के स्थान पर परिंडे (जल रखने का स्थान ) पर, तुलसी जी के पौधे के नीचे आदि शेष को घर के पास स्थित देवालयों में पीपल के वृक्ष के नीचे व यमराज के लिये तेल का दीपक जलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके चौराहे पर दीपदान करना चाहिये।