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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

भद्रकाली मंदिर (जनस्थान शक्तिपीठ), नासिक

Bhadrakali Temple (Janasthan Shaktipeeth), Nashik

नासिक, महाराष्ट्र माँ भद्रकाली; शक्तिपीठ – भ्रामरी, भैरव विकृताक्ष निःशुल्क प्रवेश

भद्रकाली मंदिर महाराष्ट्र के नासिक नगर के पुराने भाग में स्थित माँ भद्रकाली का प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे जनस्थान शक्तिपीठ से जोड़ा जाता है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार जनस्थान में सती की ठोड़ी गिरी थी। यहाँ की शक्ति भ्रामरी और भैरव विकृताक्ष हैं। रामायण में वर्णित जनस्थान को आज का नासिक क्षेत्र माना जाता है – वही भूमि जहाँ पंचवटी में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण ने वनवास का समय बिताया था।

बिना शिखर का मंदिर

नासिक का भद्रकाली मंदिर अपने स्वरूप के कारण अनोखा है – यह एक पारंपरिक वाड़ा (हवेली) शैली की इमारत में है, इसलिए इसमें ऊँचा शिखर या गुंबद नहीं है। वर्तमान मंदिर 18वीं शताब्दी के मराठा काल का माना जाता है। गर्भगृह में माँ भद्रकाली के साथ नवदुर्गा की प्रतिमाओं की पूजा होती है। पुराने नासिक की गलियों के बीच बसा यह मंदिर स्थानीय लोगों की ग्रामदेवी के रूप में भी पूजित है।

जनस्थान और रामायण

रामायण के अनुसार जनस्थान दंडकारण्य का वह भाग था जहाँ खर-दूषण जैसे राक्षसों का शासन था। यहीं पंचवटी में श्रीराम ने कुटिया बनाई, यहीं लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी – जिससे नगर का नाम “नासिक” पड़ा माना जाता है – और यहीं से रावण ने सीता का हरण किया। गोदावरी तट पर बसा नासिक आज कुंभ मेले के चार स्थानों में से एक है।

सप्तश्रृंगी की मान्यता

जनस्थान शक्तिपीठ के स्थान को लेकर एक मत नासिक के भद्रकाली मंदिर को मानता है, जबकि कुछ परंपराएँ नासिक से लगभग 60 किमी दूर वणी की सप्तश्रृंगी देवी को भी शक्तिपीठ मानती हैं। महाराष्ट्र में सप्तश्रृंगी को साढ़े तीन शक्तिपीठों में “आधा पीठ” कहा जाता है। नासिक आने वाले श्रद्धालु प्रायः दोनों देवियों के दर्शन करते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • शारदीय नवरात्रि: सबसे बड़ा उत्सव – विशेष श्रृंगार, गोंधल और भारी भीड़।
  • चैत्र नवरात्रि में भी विशेष पूजा।
  • सिंहस्थ कुंभ (नासिक) के समय लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 12:30 बजे और शाम 4:00 से रात 9:00 बजे तक
  • आरती: सुबह और संध्या

नवरात्रि में मंदिर देर रात तक खुला रहता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ भद्रकाली और नवदुर्गा की प्रतिमाएँ।
  • बिना शिखर का अनोखा मंदिर।
  • पंचवटी – कालाराम मंदिर, सीता गुफा, रामकुंड।
  • त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (लगभग 30 किमी)।
  • सप्तश्रृंगी देवी, वणी (लगभग 60 किमी)।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: नासिक रोड रेलवे स्टेशन (लगभग 9 किमी) – मुंबई, पुणे, दिल्ली से ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: मुंबई से लगभग 170 किमी, पुणे से लगभग 210 किमी; शहर में ऑटो और बस।
  • हवाई मार्ग: नासिक (ओझर) हवाई अड्डा (लगभग 25 किमी) या मुंबई (लगभग 170 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जनस्थान शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
तंत्र चूड़ामणि के अनुसार जनस्थान में सती की ठोड़ी गिरी थी। यहाँ की शक्ति भ्रामरी और भैरव विकृताक्ष हैं।
जनस्थान कहाँ है?
रामायण में वर्णित जनस्थान को आज का नासिक क्षेत्र माना जाता है, जहाँ पंचवटी में श्रीराम ने वनवास का समय बिताया था। नासिक के भद्रकाली मंदिर को इस शक्तिपीठ से जोड़ा जाता है।
नासिक के भद्रकाली मंदिर में शिखर क्यों नहीं है?
भद्रकाली मंदिर एक पारंपरिक वाड़ा (हवेली) शैली की इमारत में है, इसलिए इसमें अन्य मंदिरों की तरह ऊँचा शिखर या गुंबद नहीं है।
क्या सप्तश्रृंगी देवी भी शक्तिपीठ है?
कुछ परंपराएँ वणी की सप्तश्रृंगी देवी को भी शक्तिपीठ मानती हैं। नासिक आने वाले श्रद्धालु भद्रकाली और सप्तश्रृंगी दोनों के दर्शन करते हैं।
नासिक रोड स्टेशन से भद्रकाली मंदिर कितनी दूर है?
नासिक रोड रेलवे स्टेशन से भद्रकाली मंदिर लगभग 9 किमी दूर पुराने नासिक में है। ऑटो या टैक्सी से लगभग 25 मिनट लगते हैं।

भद्रकाली मंदिर (जनस्थान शक्तिपीठ), नासिक इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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