नवम्बर 2026 पंचांग
जयपुर, राजस्थान · कार्तिक – मार्गशीर्ष मास · Hindu Panchang November 2026
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शु. पूर्णिमा 20:23
कृत्तिका
कार्तिक पूर्णिमा / देव दिवाली गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) पूर्णिमा व्रत☀ 06:53–17:33 · ☾ 17:06
नवम्बर 2026 – दिन-प्रतिदिन पंचांग नवम्बर 2026 के व्रत और त्योहार
- रवि 1
कृष्ण पक्ष सप्तमी 14:52 तक
पुष्य · ☀ 06:36–17:44 · ☾ 23:45
- मंगल 3
कृष्ण पक्ष नवमी 11:55 तक
मघा · ☀ 06:37–17:42 · ☾ 00:49
- बुध 4
कृष्ण पक्ष दशमी 11:03 तक
पूर्वा फाल्गुनी · ☀ 06:38–17:42 · ☾ 01:50
- शुक्र 6
कृष्ण पक्ष द्वादशी 10:31 तक
हस्त · ☀ 06:39–17:40 · ☾ 03:46
गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) धनतेरस प्रदोष व्रत
- रवि 8
कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 11:28 तक
स्वाति · ☀ 06:41–17:39 · ☾ 05:40
- सोम 9
कृष्ण पक्ष अमावस्या 12:32 तक
स्वाति · ☀ 06:41–17:39 · ☾ 06:37
अमावस्या सोमवती अमावस्या
- गुरु 12
शुक्ल पक्ष तृतीया 18:09 तक
ज्येष्ठा · ☀ 06:44–17:37 · ☾ 09:26
- शुक्र 13
शुक्ल पक्ष चतुर्थी 20:42 तक
मूल · ☀ 06:44–17:37 · ☾ 10:17
विनायक चतुर्थी
- शनि 14
शुक्ल पक्ष पंचमी 23:24 तक
पूर्वाषाढ़ा · ☀ 06:45–17:36 · ☾ 11:02
- सोम 16
शुक्ल पक्ष सप्तमी 04:19 तक
श्रवण · ☀ 06:47–17:35 · ☾ 12:19
वृश्चिक संक्रांति
- मंगल 17
शुक्ल पक्ष अष्टमी 06:05 तक
धनिष्ठा · ☀ 06:47–17:35 · ☾ 12:52
मासिक दुर्गाष्टमी
- बुध 18
शुक्ल पक्ष नवमी 07:06 तक
शतभिषा · ☀ 06:48–17:35 · ☾ 13:23
- गुरु 19
शुक्ल पक्ष नवमी 07:06 तक
पूर्वा भाद्रपदा · ☀ 06:49–17:34 · ☾ 13:53
- सोम 23
शुक्ल पक्ष चतुर्दशी 23:43 तक
भरणी · ☀ 06:52–17:33 · ☾ 16:16
- मंगल 24
शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 20:23 तक
कृत्तिका · ☀ 06:53–17:33 · ☾ 17:06
कार्तिक पूर्णिमा / देव दिवाली गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) पूर्णिमा व्रत
- बुध 25
कृष्ण पक्ष प्रतिपदा 16:51 तक
रोहिणी · ☀ 06:53–17:33 · ☾ 18:06
- गुरु 26
कृष्ण पक्ष द्वितीया 13:15 तक
मृगशिरा · ☀ 06:54–17:33 · ☾ 19:12
- शनि 28
कृष्ण पक्ष पंचमी 03:57 तक
पुनर्वसु · ☀ 06:56–17:33 · ☾ 21:34
- रवि 29
कृष्ण पक्ष षष्ठी 01:47 तक
पुष्य · ☀ 06:56–17:33 · ☾ 22:41
- सोम 30
कृष्ण पक्ष सप्तमी 00:12 तक
आश्लेषा · ☀ 06:57–17:33 · ☾ 23:44
हिंदी पंचांग 2026 – मासिक हिंदू कैलेंडर और व्रत-त्योहार
हिंदी पंचांग 2026 के माध्यम से जानें पूरे महीने की तिथियां, वार, नक्षत्र, योग, करण और महत्वपूर्ण धार्मिक पर्वों की जानकारी। BhaktiRas के मासिक हिंदू पंचांग कैलेंडर में आप किसी भी महीने की तारीख चुनकर उस दिन का पंचांग, धार्मिक महत्व और व्रत-त्योहारों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
हिंदू पंचांग भारतीय कालगणना की पारंपरिक पद्धति है, जिसका उपयोग व्रत, त्योहार, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों की तिथियां जानने के लिए किया जाता है। यहां आपको मासिक कैलेंडर के साथ एकादशी, प्रदोष व्रत, पूर्णिमा, अमावस्या, संकष्टी चतुर्थी और अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों की जानकारी मिलती है।
मासिक पंचांग कैलेंडर में क्या-क्या जानकारी मिलती है?
BhaktiRas के हिंदी पंचांग कैलेंडर में महीने के प्रत्येक दिन की महत्वपूर्ण जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होती है।
• मासिक हिंदू कैलेंडर: पूरे महीने की तारीख और वार एक साथ देखें।
• तिथि और पक्ष: प्रत्येक दिन की हिंदू तिथि, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की जानकारी प्राप्त करें।
• नक्षत्र: दैनिक नक्षत्र और उसके परिवर्तन का समय जानें।
• योग और करण: पंचांग के इन दोनों महत्वपूर्ण अंगों की जानकारी देखें।
• व्रत और त्योहार: महीने में आने वाले धार्मिक पर्वों, व्रतों और उत्सवों की तारीख देखें।
• आज का पंचांग: वर्तमान दिन की तिथि, वार और अन्य पंचांग विवरण जानें।
• शुभ और अशुभ समय: राहुकाल, यमगण्ड, गुलिक काल और शुभ मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें।
हिंदू पंचांग 2026 के अनुसार व्रत और त्योहार
हिंदू पंचांग के अनुसार पूरे वर्ष अनेक धार्मिक व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इनकी तिथियां चंद्र मास, पक्ष और पंचांग की गणना के आधार पर निर्धारित होती हैं।
प्रमुख धार्मिक अवसरों में एकादशी, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, संकष्टी चतुर्थी, पूर्णिमा, अमावस्या, नवरात्रि, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और दीपावली शामिल हैं।
मासिक पंचांग कैलेंडर में इन अवसरों की तारीख देखकर आप अपनी पूजा, व्रत और धार्मिक आयोजनों की तैयारी कर सकते हैं। आगामी व्रत और त्योहारों की जानकारी के लिए महीने के अनुसार पंचांग देखें।
हिंदू पंचांग के पांच अंग कौन-कौन से हैं?
हिंदू पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना है। इन्हें पंचांग के पांच प्रमुख तत्व कहा जाता है।
1. तिथि: सूर्य और चंद्रमा की आपसी कोणीय दूरी के आधार पर तिथि निर्धारित होती है।
2. वार: सप्ताह के सात दिनों को वार कहा जाता है। इनमें रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार शामिल हैं।
3. नक्षत्र: चंद्रमा की निरयन स्थिति के आधार पर नक्षत्र निर्धारित होता है। वैदिक ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्र माने गए हैं।
4. योग: सूर्य और चंद्रमा की निरयन देशांतर स्थितियों के योग से पंचांग का योग निर्धारित होता है। कुल 27 योग होते हैं।
5. करण: एक तिथि का आधा भाग करण कहलाता है। पंचांग की गणना में करण का भी महत्वपूर्ण स्थान है।
इन पांच अंगों की सहायता से दैनिक और मासिक पंचांग की जानकारी प्राप्त होती है।
शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष क्या हैं?
हिंदू चंद्र कैलेंडर में प्रत्येक चंद्र मास दो पक्षों में विभाजित होता है। इन्हें शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष कहा जाता है।
शुक्ल पक्ष: अमावस्या के बाद शुरू होने वाली चंद्रमा की बढ़ती कला की अवधि को शुक्ल पक्ष कहते हैं। इसका समापन पूर्णिमा तिथि पर होता है।
कृष्ण पक्ष: पूर्णिमा के बाद शुरू होने वाली चंद्रमा की घटती कला की अवधि को कृष्ण पक्ष कहते हैं। इसका समापन अमावस्या तिथि पर होता है।
दोनों पक्षों में 15-15 तिथियां होती हैं। एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और अन्य धार्मिक व्रतों की तिथियां इन्हीं पक्षों के आधार पर निर्धारित होती हैं।
आज का पंचांग और दैनिक धार्मिक जानकारी
मासिक हिंदी पंचांग के साथ आज का पंचांग देखना भी उपयोगी होता है। दैनिक पंचांग में वर्तमान तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होती हैं।
पंचांग के माध्यम से आप किसी विशेष दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। BhaktiRas पर उपलब्ध दैनिक पंचांग में महीने की तारीख के अनुसार संबंधित दिन का विवरण देखें।
राहुकाल, यमगण्ड और शुभ मुहूर्त का महत्व
दैनिक पंचांग में राहुकाल, यमगण्ड, गुलिक काल और शुभ मुहूर्त की जानकारी भी दी जाती है।
राहुकाल: पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल को नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
यमगण्ड: यह दिन का एक विशेष समय खंड है, जिसे पारंपरिक मुहूर्त गणना में देखा जाता है।
गुलिक काल: वार और स्थानीय सूर्योदय के आधार पर इसकी गणना की जाती है।
शुभ मुहूर्त: विवाह, गृह प्रवेश, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए पंचांग के आधार पर अनुकूल समय का चयन किया जाता है।
इन समयों की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर होती है। इसलिए अलग-अलग शहरों में इनके समय में अंतर हो सकता है।
हिंदू कैलेंडर और पंचांग का महत्व
हिंदू कैलेंडर भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से पूरे वर्ष के महीनों, पक्षों, तिथियों, व्रतों और त्योहारों की जानकारी प्राप्त की जाती है।
एकादशी, प्रदोष व्रत, पूर्णिमा, अमावस्या, महाशिवरात्रि, नवरात्रि, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और दीपावली जैसे प्रमुख धार्मिक अवसरों की तिथियां जानने के लिए हिंदू पंचांग का उपयोग किया जाता है।
मासिक पंचांग देखने से आप आगामी धार्मिक पर्वों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अपनी पूजा-पाठ तथा त्योहारों की तैयारी पहले से कर सकते हैं।
BhaktiRas पर हिंदी पंचांग 2026 देखें
BhaktiRas का उद्देश्य हिंदू पंचांग, धार्मिक व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराओं से जुड़ी उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में उपलब्ध कराना है।
यहां मासिक हिंदी पंचांग कैलेंडर के माध्यम से पूरे महीने की तिथियां, वार, नक्षत्र और महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों की जानकारी एक ही स्थान पर प्राप्त करें।
आज का पंचांग देखने, आगामी व्रत-त्योहारों की तारीख जानने और पूरे महीने का हिंदू कैलेंडर देखने के लिए BhaktiRas के पंचांग पेज पर आते रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. हिंदी पंचांग क्या है?
हिंदी पंचांग हिंदू कालगणना की एक पारंपरिक पद्धति है। इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर दिन, महीने और धार्मिक अवसरों की जानकारी दी जाती है।
2. मासिक पंचांग कैलेंडर में क्या जानकारी मिलती है?
मासिक पंचांग कैलेंडर में महीने की सभी तारीखें, वार, तिथियां, नक्षत्र, व्रत, त्योहार और महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों की जानकारी मिलती है।
3. हिंदू पंचांग में एकादशी और पूर्णिमा की तिथि कैसे देखें?
मासिक कैलेंडर में संबंधित तारीख चुनकर एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और अन्य धार्मिक व्रतों की जानकारी देख सकते हैं।
4. क्या पंचांग हर महीने बदलता है?
हां। प्रत्येक महीने की तिथियां, नक्षत्र, योग और धार्मिक पर्वों की स्थिति बदलती रहती है। इसलिए हर महीने का पंचांग अलग होता है।
5. शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में क्या अंतर है?
शुक्ल पक्ष अमावस्या से पूर्णिमा तक और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तक की अवधि होती है।
6. क्या सभी शहरों का पंचांग एक जैसा होता है?
नहीं। सूर्योदय, सूर्यास्त और स्थानीय भौगोलिक स्थिति के कारण पंचांग के समय अलग-अलग शहरों में बदल सकते हैं। इसलिए सटीक समय के लिए शहर का चयन महत्वपूर्ण है।
7. पंचांग में राहुकाल क्या होता है?
राहुकाल दिन का एक विशेष समय खंड है, जिसे पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है।