मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री वैकुण्ठ पेरुमाळ मंदिर (तिरु परमेश्वर विण्णगरम), कांचीपुरम

Sri Vaikunta Perumal Temple (Thiru Parameswara Vinnagaram), Kanchipuram

कांचीपुरम, तमिलनाडु भगवान श्री वैकुण्ठनाथ (परमपदनाथ), देवी वैकुण्ठवल्ली थायार निःशुल्क प्रवेश

श्री वैकुण्ठ पेरुमाळ मंदिर कांचीपुरम का एक अत्यंत प्राचीन विष्णु मंदिर है, जिसे दिव्य प्रबंधम में तिरु परमेश्वर विण्णगरम कहा गया है। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है। यहाँ भगवान वैकुण्ठनाथ (परमपदनाथ) और देवी वैकुण्ठवल्ली थायार की पूजा होती है। 8वीं शताब्दी में पल्लव राजा नंदिवर्मन द्वितीय (पल्लवमल्ल) द्वारा बनवाया गया यह मंदिर पल्लव स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है और आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक है।

तीन तल का गर्भगृह

इस मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता इसका तीन तल वाला गर्भगृह है। नीचे के तल पर भगवान बैठी मुद्रा में, पहले तल पर शयन मुद्रा में और दूसरे तल पर खड़ी मुद्रा में विराजते हैं। पहला तल सामान्यतः केवल एकादशी के दिनों में भक्तों के लिए खुलता है, जबकि सबसे ऊपरी तल बंद रहता है। एक ही विमान में भगवान के तीनों रूप होना इसे दुर्लभ बनाता है।

पत्थर में लिखा पल्लव इतिहास

गर्भगृह के चारों ओर के प्रांगण की दीवारों पर पल्लव राजवंश का इतिहास शिल्प पैनलों में उकेरा गया है – ब्रह्मा से वंश की दिव्य उत्पत्ति, क्रमशः राजाओं के राज्याभिषेक, और युद्धों के दृश्य, जिनमें चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय से हुए युद्ध भी हैं। इन पैनलों में नंदिवर्मन पल्लवमल्ल के सिंहासन तक पहुँचने की घटनाएँ भी दिखाई गई हैं। इतिहासकार इन्हें पल्लव काल के अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत मानते हैं। मंदिर के निर्माण काल पर विद्वानों में थोड़ा मतभेद है, पर अधिकांश इसे 8वीं शताब्दी का मानते हैं।

आलवार और दिव्य प्रबंधम

तिरुमंगै आऴ्वार ने तिरु परमेश्वर विण्णगरम पर दस पाशुरम रचे हैं, जो नालायिर दिव्य प्रबंधम में संकलित हैं। तमिल में विण्णगरम का अर्थ है विष्णु का नगर या धाम।

प्रमुख उत्सव और यात्रा सुझाव

  • वैकासि ब्रह्मोत्सव (मई-जून)।
  • वैकुंठ एकादशी (दिसंबर-जनवरी) – इस दिन विशेष भीड़ रहती है।
  • शिल्प पैनल देखने के लिए दिन के उजाले में जाएँ और प्रांगण की परिक्रमा के लिए समय रखें।
  • पल्लव स्थापत्य में रुचि हो तो पास का कैलासनाथर मंदिर भी अवश्य देखें।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 7:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से शाम 7:30 बजे तक

मुख्य आकर्षण

  • तीन तल का गर्भगृह – नीचे बैठे, बीच में लेटे और ऊपर खड़े भगवान।
  • पल्लव इतिहास के शिल्प पैनल – प्रांगण की दीवारों पर राजवंश, राज्याभिषेक और युद्धों के दृश्य।
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित प्राचीन स्मारक।
  • पास ही कैलासनाथर मंदिर – पल्लव स्थापत्य का एक और रत्न।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: कांचीपुरम रेलवे स्टेशन – चेन्नई (चेंगलपट्टू/अरक्कोणम मार्ग) से ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: चेन्नई से लगभग 75 किमी; कांचीपुरम बस अड्डे से ऑटो द्वारा कुछ मिनट।
  • हवाई मार्ग: चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 60–65 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वैकुण्ठ पेरुमाळ मंदिर किसने बनवाया?
यह मंदिर 8वीं शताब्दी में पल्लव राजा नंदिवर्मन द्वितीय (पल्लवमल्ल) ने बनवाया था। दिव्य प्रबंधम में इसे तिरु परमेश्वर विण्णगरम कहा गया है।
इस मंदिर के गर्भगृह की क्या विशेषता है?
गर्भगृह तीन तलों में है – नीचे भगवान बैठी मुद्रा में, पहले तल पर लेटी मुद्रा में और दूसरे तल पर खड़ी मुद्रा में हैं। पहला तल सामान्यतः केवल एकादशी के दिनों में खुलता है और सबसे ऊपरी तल भक्तों के लिए बंद रहता है।
किस आलवार ने इस मंदिर की स्तुति की?
तिरुमंगै आऴ्वार ने तिरु परमेश्वर विण्णगरम पर दस पाशुरम रचे हैं, जो नालायिर दिव्य प्रबंधम में संकलित हैं।
मंदिर की दीवारों पर क्या उकेरा गया है?
प्रांगण की दीवारों पर पल्लव राजवंश के इतिहास के शिल्प हैं – ब्रह्मा से वंश की उत्पत्ति, राजाओं के राज्याभिषेक और युद्धों के दृश्य, जिनमें चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय से युद्ध भी शामिल है।
यहाँ के प्रमुख उत्सव कौन-से हैं?
वैकासि (मई-जून) का ब्रह्मोत्सव और मार्गऴि (दिसंबर-जनवरी) की वैकुंठ एकादशी यहाँ के प्रमुख उत्सव हैं।

श्री वैकुण्ठ पेरुमाळ मंदिर (तिरु परमेश्वर विण्णगरम), कांचीपुरम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook