गजेन्द्र वरद पेरुमाल मंदिर तंजावुर ज़िले में पापनाशम के पास बसे गाँव कपिस्थलम में स्थित है, जो कावेरी और कोल्लिडम नदियों के बीच है। दिव्य प्रबंधम में इस स्थान को तिरुक्कवित्तलम कहा गया है। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है और प्रसिद्ध गजेन्द्र मोक्ष की कथा से जुड़ा है। यहाँ भगवान विष्णु गजेन्द्र वरद के रूप में और देवी लक्ष्मी रमामणिवल्ली थायार के रूप में पूजी जाती हैं।
गजेन्द्र मोक्ष की कथा
स्थल पुराण के अनुसार राजा इन्द्रद्युम्न ने एक ऋषि का अपमान किया और शाप से हाथी गजेन्द्र बने – पर ऋषि ने उन्हें विष्णु-भक्त बने रहने का वरदान भी दिया। उधर गन्धर्व हूहू भी शाप से मगरमच्छ बन गया था। जब गजेन्द्र सरोवर में उतरे तो मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। संघर्ष से थककर गजेन्द्र ने “आदिमूलम” कहकर भगवान को पुकारा। भगवान ने सुदर्शन चक्र भेजकर गजेन्द्र की रक्षा की और दोनों अपने मूल रूप में लौट आए। इसी से भगवान यहाँ गजेन्द्र वरद – “गजेन्द्र को वर देने वाले” – कहलाए।
मान्यता है कि हनुमान ने भी यहाँ भगवान की उपासना की थी; “कपि” (वानर) से ही इस स्थान का नाम कपिस्थलम पड़ा।
मंदिर और विग्रह
द्रविड़ शैली के इस मंदिर में पाँच तल का राजगोपुरम है। गर्भगृह में भगवान भुजंग शयन मुद्रा में विराजते हैं और विमान को गगनाकृति विमानम कहा जाता है। गर्भगृह के दाहिनी ओर रमामणिवल्ली थायार की अलग सन्निधि है। पहले प्राकार में योग नरसिंह, सुदर्शन, गरुड़ और आऴ्वारों की सन्निधियाँ हैं। परिसर के भीतर गजेन्द्र पुष्करिणी और कपिल तीर्थ नाम के दो सरोवर हैं। यह मंदिर पंच कण्णन क्षेत्रों में भी गिना जाता है, जहाँ कृष्ण की विशेष महिमा है।
आऴ्वार और दिव्य प्रबंधम
नालायिर दिव्य प्रबंधम में तिरुमऴिसै आऴ्वार ने इस दिव्य देशम की स्तुति की है। मंदिर मध्यकालीन चोल काल का माना जाता है, जिसमें बाद में विजयनगर और मदुरै नायकों ने योगदान दिया।
प्रमुख उत्सव
- गजेन्द्र मोक्ष लीला (आडि, जुलाई-अगस्त): मंदिर का सबसे प्रमुख उत्सव।
- रथोत्सव (वैकासि, मई-जून): विशाखम नक्षत्र पर।
- ब्रह्मोत्सव और वैकुंठ एकादशी।
आसपास के दर्शन
कपिस्थलम से कुंभकोणम के दिव्य देशम – सारंगपाणि, पुल्लभूतंगुडि, आदनूर और ओप्पिलियप्पन – पास ही हैं। तंजावुर की ओर तिरुक्कूडलूर और तिरुक्कण्डियूर भी इसी यात्रा में जोड़े जा सकते हैं।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 7:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: लगभग 4:30 से रात 8:00 बजे तक
मुख्य आकर्षण
- गजेन्द्र वरद पेरुमाल – भुजंग शयन मुद्रा में भगवान।
- रमामणिवल्ली थायार की अलग सन्निधि।
- गजेन्द्र पुष्करिणी और कपिल तीर्थ – परिसर के भीतर दो सरोवर।
- योग नरसिंह, सुदर्शन, गरुड़ और आऴ्वारों की सन्निधियाँ।
- पंच कण्णन क्षेत्र – कृष्ण-भक्ति के पाँच विशेष मंदिरों में से एक।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: पापनाशम से लगभग 3 किमी; कुंभकोणम और तंजावुर से सड़क मार्ग से बसें और टैक्सी।
- रेल मार्ग: पापनाशम रेलवे स्टेशन सबसे पास; कुंभकोणम और तंजावुर बड़े स्टेशन हैं।
- हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 85 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कपिस्थलम मंदिर की कथा क्या है?
इस स्थान का नाम कपिस्थलम क्यों है?
किस आऴ्वार ने कपिस्थलम की स्तुति की?
गजेन्द्र मोक्ष उत्सव कब होता है?
पंच कण्णन क्षेत्र क्या हैं?
गजेन्द्र वरद पेरुमाल मंदिर, कपिस्थलम (तिरुक्कवित्तलम) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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कांचीपुरम, तमिलनाडु श्री आदि वराह पेरुमाळ सन्निधि (तिरुक्कळ्वनूर), कांचीपुरम भगवान श्री आदि वराह पेरुमाळ, देवी अंजिलैवल्ली नाच्चियार
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मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री गोपालकृष्ण पेरुमाल मंदिर, तिरुक्कावळम्पाडि (तिरुनांगूर) भगवान गोपालकृष्ण (रुक्मिणी और सत्यभामा सहित), देवी सेंकमल नाच्चियार
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मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री नाण्मदिय पेरुमाल मंदिर, तलैच्चंगाडु (तिरुतलैच्चंग नाण्मदियम) भगवान श्री नाण्मदिय पेरुमाल (चन्द्रशापहर पेरुमाल), देवी तलैच्चंग नाच्चियार
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कुंभकोणम, तमिलनाडु श्री सारनाथन पेरुमाल मंदिर, तिरुच्चेरै भगवान श्री सारनाथ पेरुमाल, देवी सारनायकी थायार
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कांचीपुरम, तमिलनाडु श्री वैकुण्ठ पेरुमाळ मंदिर (तिरु परमेश्वर विण्णगरम), कांचीपुरम भगवान श्री वैकुण्ठनाथ (परमपदनाथ), देवी वैकुण्ठवल्ली थायार
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कन्याकुमारी, तमिलनाडु आदिकेशव पेरुमाळ मंदिर, तिरुवट्टार भगवान आदिकेशव पेरुमाळ (शयन मुद्रा), देवी मरगतवल्ली थायार