श्री अमृतघटेश्वरर-अभिरामी मंदिर तमिलनाडु के मयिलाडुतुरै जिले के गाँव तिरुक्कडैयूर में स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ शिव अमृतघटेश्वरर के रूप में और देवी पार्वती अभिरामी के रूप में पूजी जाती हैं। यह वही स्थान माना जाता है जहाँ शिव ने अपने बाल भक्त मार्कंडेय को यमराज से बचाया था। दीर्घायु की कामना से दंपति यहाँ षष्टिपूर्ति (60वाँ वर्ष) और शताभिषेक (80वाँ वर्ष) की पूजा करवाने आते हैं।
मार्कंडेय और कालसंहारमूर्ति
पौराणिक कथा के अनुसार ऋषि मृकंडु के पुत्र मार्कंडेय की आयु केवल सोलह वर्ष निश्चित थी। निर्धारित दिन यमराज उनके प्राण लेने आए, तो मार्कंडेय शिवलिंग से लिपट गए। यम का पाश शिवलिंग पर भी पड़ा, तब भगवान शिव प्रकट हुए और यम को परास्त किया। इसी कारण शिव यहाँ कालसंहारमूर्ति (काल का संहार करने वाले) कहलाते हैं। यह मंदिर शिव के आठ वीर कार्यों से जुड़े अष्ट वीरट्टानम मंदिरों में से एक है। “अमृतघटेश्वरर” नाम के बारे में मान्यता है कि यहाँ अमृत का घट (कलश) शिवलिंग रूप में प्रतिष्ठित हुआ।
देवी अभिरामी और अभिरामी पट्टर
देवी अभिरामी की सन्निधि शाक्त भक्तों के लिए विशेष है। शाक्त संत अभिरामी पट्टर देवी के परम भक्त थे और माना जाता है कि उन्होंने यहीं प्रसिद्ध तमिल स्तोत्र “अभिरामी अंतादि” की रचना की। लोककथा है कि अमावस्या के दिन देवी ने अपने कर्णफूल की ज्योति से आकाश में पूर्णिमा का चंद्रमा प्रकट कर अपने भक्त की बात सत्य की। परिसर में भगवान विष्णु अमृतनारायण और लक्ष्मी अमृतवल्ली के रूप में भी विराजते हैं।
इतिहास
7वीं शताब्दी के तेवारम में अप्पर, संबंदर और सुंदरर ने यहाँ के भगवान की स्तुति की है, इसलिए यह पाडल पेट्र स्थलम है। वर्तमान पत्थर का मंदिर 9वीं शताब्दी में चोलों के समय बना और बाद में तंजावुर के नायकों ने इसका विस्तार किया। चोल शिलालेखों में मंदिर को भूमि, अन्न और उत्सवों के लिए दिए गए दानों का उल्लेख है। मंदिर का प्रबंधन धर्मपुरम आधीनम करता है।
यात्रा क्रम
तिरुक्कडैयूर मयिलाडुतुरै से लगभग 21 किमी दूर है। यात्री इसके साथ मयिलाडुतुरै का मयूरनाथस्वामी मंदिर और पास का समुद्र तटीय नगर तरंगमबाड़ी भी देख सकते हैं।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे तक
- शाम: लगभग 4:00 से रात 9:00 बजे तक
मुख्य आकर्षण
- अमृतघटेश्वरर – शिवलिंग रूप में भगवान शिव।
- कालसंहारमूर्ति – यम का संहार करते शिव का उत्सव विग्रह।
- अभिरामी अम्मन सन्निधि – अभिरामी पट्टर की आराध्या देवी।
- अमृतनारायण और अमृतवल्ली – विष्णु और लक्ष्मी की सन्निधि।
- षष्टिपूर्ति और शताभिषेक – 60वें और 80वें वर्ष की पूजा।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: मयिलाडुतुरै से लगभग 21 किमी, तरंगमबाड़ी (ट्रांकेबार) मार्ग पर।
- रेल मार्ग: मयिलाडुतुरै जंक्शन (लगभग 21 किमी)।
- हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 160 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तिरुक्कडैयूर मंदिर किस कथा से जुड़ा है?
लोग 60वाँ और 80वाँ जन्मदिन यहाँ क्यों मनाते हैं?
अभिरामी पट्टर कौन थे?
अष्ट वीरट्टानम क्या हैं?
मयिलाडुतुरै से तिरुक्कडैयूर कितनी दूर है?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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कांचीपुरम, तमिलनाडु श्री आदि वराह पेरुमाळ सन्निधि (तिरुक्कळ्वनूर), कांचीपुरम भगवान श्री आदि वराह पेरुमाळ, देवी अंजिलैवल्ली नाच्चियार
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तंजावुर, तमिलनाडु गजेन्द्र वरद पेरुमाल मंदिर, कपिस्थलम (तिरुक्कवित्तलम) भगवान गजेन्द्र वरद पेरुमाल, देवी रमामणिवल्ली थायार
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तूतुकुड़ी, तमिलनाडु श्री मायक्कूत्तर (श्रीनिवास) पेरुमाळ मंदिर, तिरुक्कुळन्दै (पेरुंगुलम) भगवान श्रीनिवास (मायक्कूत्तर); देवी अलर्मेलमंगै, कुळन्दैवल्ली
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मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री पुरुषोत्तम पेरुमाल मंदिर, तिरुवण्पुरुषोत्तमम (तिरुनांगूर) भगवान पुरुषोत्तम पेरुमाल, देवी पुरुषोत्तम नायकी थायार
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कल्लकुरिच्चि, तमिलनाडु उलगळन्द पेरुमाळ (त्रिविक्रम) मंदिर, तिरुक्कोयिलूर भगवान त्रिविक्रम (उलगळन्द पेरुमाळ), देवी पूंगोवल नाच्चियार (पुष्पवल्ली)
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कुंभकोणम, तमिलनाडु श्री ऐरावतेश्वर मंदिर, दारासुरम भगवान शिव (ऐरावतेश्वर), देवी पेरिय नायकी