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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री विजयासन पेरुमाळ मंदिर, तिरुवरगुणमंगै (नत्तम)

Sri Vijayasana Perumal Temple, Thiruvaragunamangai (Natham)

तूतुकुड़ी, तमिलनाडु भगवान विजयासन पेरुमाळ (बैठी मुद्रा); देवी वरगुणवल्ली निःशुल्क प्रवेश

श्री विजयासन पेरुमाळ मंदिर तमिलनाडु के तूत्तुकुडि ज़िले में, श्रीवैकुण्ठम के पास नत्तम गाँव में स्थित है, जिसे वरगुणमंगै भी कहते हैं। दिव्य देशम के रूप में यह तिरुवरगुणमंगै कहलाता है और 108 दिव्य देशमों में से एक है। यह नव तिरुपति – तामिरभरणी नदी के किनारे, तिरुनेलवेली–तिरुच्चेन्दूर मार्ग पर बसे भगवान विष्णु के नौ मंदिरों का समूह, जिनमें से हर एक को नवग्रहों में से किसी एक ग्रह से जोड़ा जाता है – में से एक है और इसे चंद्र स्थल माना जाता है। यहाँ भगवान विष्णु विजयासन पेरुमाळ और देवी लक्ष्मी वरगुणवल्ली के रूप में पूजी जाती हैं। इसकी स्तुति नम्माऴ्वार ने की है।

स्थल पुराण

एक कथा के अनुसार वेदवित् नाम का एक विद्वान ब्राह्मण माता-पिता के देहांत के बाद तपस्या का स्थान खोज रहा था। भगवान ने स्वयं ब्राह्मण का वेश धरकर उसे यहाँ तप करने की सलाह दी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान प्रकट हुए, और वेदवित् की प्रार्थना पर यहीं विजयासन रूप में विराजमान हो गए। एक अन्य परंपरा रोमश ऋषि की लंबी तपस्या से इस स्थान को जोड़ती है।

मंदिर और विग्रह

द्रविड़ शैली का यह छोटा मंदिर ग्रेनाइट की चारदीवारी से घिरा है। गर्भगृह में भगवान आसन (बैठी) मुद्रा में विराजते हैं और उनके दोनों ओर देवियाँ हैं। थायार वरगुणवल्ली कहलाती हैं। “वरगुणमंगै” नाम को सामान्यतः पांड्य राजा वरगुण से जोड़ा जाता है, यद्यपि यह निश्चित नहीं है।

आऴ्वार और नव तिरुपति

नम्माऴ्वार ने तिरुवाय्मोऴि में तिरुवरगुणमंगै का उल्लेख किया है। नव तिरुपति के सभी मंदिरों की तरह यह भी नम्माऴ्वार से गहराई से जुड़ा है, और वैकासि मास की गरुड़ सेवै में यहाँ के पेरुमाळ भी आऴ्वार्तिरुनगरी जाते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • वैकुण्ठ एकादशी (मार्गऴि, दिसंबर-जनवरी): दस दिनों का उत्सव।
  • नव तिरुपति गरुड़ सेवै (वैकासि, मई-जून)।

यात्रा सुझाव

तिरुवरगुणमंगै श्रीवैकुण्ठम के बिल्कुल पास है, इसलिए नव तिरुपति यात्रा में श्रीवैकुण्ठम के बाद यहाँ और फिर नदी पार तिरुप्पुळिंगुडि के दर्शन सुविधाजनक रहते हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 7:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 5:00 से रात 8:00 बजे तक

गाँव का छोटा मंदिर होने के कारण समय बदल सकता है; नव तिरुपति यात्रा सुबह जल्दी शुरू करना बेहतर है।

मुख्य आकर्षण

  • विजयासन पेरुमाळ – आसन (बैठी) मुद्रा में विष्णु।
  • वरगुणवल्ली थायार।
  • नव तिरुपति का चंद्र स्थल।
  • शांत ग्रामीण परिवेश, तामिरभरणी के किनारे।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: श्रीवैकुण्ठम से लगभग 2 किमी पूर्व; तिरुनेलवेली से लगभग 30 किमी।
  • रेल मार्ग: श्रीवैकुण्ठम रेलवे स्टेशन (तिरुनेलवेली–तिरुच्चेन्दूर लाइन)।
  • हवाई मार्ग: तूत्तुकुडि हवाई अड्डा सबसे निकट है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तिरुवरगुणमंगै मंदिर कहाँ है?
यह मंदिर तूत्तुकुडि ज़िले में श्रीवैकुण्ठम से लगभग 2 किमी दूर नत्तम गाँव में है, जिसे वरगुणमंगै भी कहते हैं।
यह किस ग्रह से जुड़ा है?
नव तिरुपति की नवग्रह परंपरा में तिरुवरगुणमंगै को चंद्र स्थल माना जाता है।
भगवान को विजयासन क्यों कहते हैं?
यहाँ भगवान आसन (बैठी) मुद्रा में विराजते हैं। कथा के अनुसार वेदवित् नामक ब्राह्मण की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उसकी प्रार्थना पर इसी रूप में दर्शन दिए और यहीं विजयासन के रूप में रह गए।
किन आऴ्वार ने यहाँ पाशुरम गाए?
नम्माऴ्वार ने तिरुवाय्मोऴि में इस दिव्य देशम का उल्लेख किया है।
वरगुणमंगै नाम कैसे पड़ा?
सामान्य मान्यता है कि यह नाम पांड्य राजा वरगुण से जुड़ा है, हालाँकि यह निश्चित नहीं है।

श्री विजयासन पेरुमाळ मंदिर, तिरुवरगुणमंगै (नत्तम) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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