श्री वीरराघव स्वामी मंदिर चेन्नई से लगभग 45 किमी पश्चिम में स्थित तिरुवल्लूर नगर का प्रसिद्ध विष्णु मंदिर है। दिव्य प्रबंधम में इस स्थान को तिरु एव्वुळ कहा गया है और यह 108 दिव्य देशमों में से एक है। यहाँ भगवान वीरराघव शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजते हैं और देवी लक्ष्मी कनकवल्ली थायार (वसुमति) के नाम से पूजी जाती हैं। रोग निवारक माने जाने के कारण भक्त भगवान को प्रेम से वैद्य वीरराघव कहते हैं।
सालिहोत्र ऋषि की कथा
स्थल पुराण के अनुसार सालिहोत्र ऋषि चावल पीसकर उसका आटा आने वाले अतिथियों में बाँटते थे। उनकी भक्ति की परीक्षा लेने भगवान विष्णु एक अतिथि बनकर आए और और भोजन माँगा; ऋषि ने अपना भाग भी उन्हें दे दिया। भोजन के बाद अतिथि ने ऋषि की कुटिया में विश्राम किया और फिर अपना वास्तविक रूप प्रकट किया। इसीलिए गर्भगृह में भगवान का दायाँ हाथ सालिहोत्र ऋषि को आशीर्वाद देता हुआ और बायाँ हाथ ज्ञान मुद्रा में ब्रह्मा को उपदेश देता हुआ दिखाया गया है। एक अन्य कथा राजा दिलीप की पुत्री के रूप में जन्मी लक्ष्मी (वसुमति) से भगवान के विवाह की है।
वैद्य वीरराघव और हृत्तापनाशिनी
भक्तों की गहरी आस्था है कि यहाँ के भगवान रोगों से मुक्ति देते हैं। मनौती के रूप में भक्त शरीर के अंगों की आकृति वाली छोटी धातु की पट्टियाँ चढ़ाते हैं। मंदिर के पश्चिम में विशाल हृत्तापनाशिनी सरोवर है – “हृदय के ताप का नाश करने वाला” – जिसे दिव्य देशमों के सबसे बड़े मंदिर सरोवरों में गिना जाता है। अमावस्या के दिन यहाँ भारी भीड़ होती है और भक्त सरोवर में गुड़ अर्पित करते हैं।
आलवार और इतिहास
तिरु एव्वुळ की स्तुति तिरुमंगै आऴ्वार और तिरुमऴिसै आऴ्वार ने अपने पाशुरमों में की है। माना जाता है कि मंदिर का आरंभ पल्लव काल में हुआ; यहाँ चोल राजा कुलोत्तुंग प्रथम के समय के शिलालेख हैं, और अधिकांश विद्वान प्रमुख संरचनाओं को विजयनगर काल का मानते हैं। आज मंदिर का प्रबंधन अहोबिल मठ करता है, जिसके जीयर वंशानुगत न्यासी हैं।
प्रमुख उत्सव और यात्रा सुझाव
- चित्तिरै रथ और तेप्पोत्सव – मंदिर का सबसे प्रमुख उत्सव।
- वैकुंठ एकादशी और हर अमावस्या पर विशेष दर्शन।
- चेन्नई सेंट्रल से चेन्नई–अरक्कोणम मार्ग की लोकल ट्रेन से तिरुवल्लूर पहुँचना सबसे आसान है; अमावस्या पर जल्दी पहुँचें।
- लगभग 15 किमी दूर तिरुनिन्रवूर का भक्तवत्सल पेरुमाळ मंदिर भी एक दिव्य देशम है।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 6:30 से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: लगभग 4:00 से रात 8:30 बजे तक
- अमावस्या: इस दिन भारी भीड़ रहती है और समय बढ़ सकता है।
मुख्य आकर्षण
- वीरराघव पेरुमाळ – भुजंग शयन मुद्रा में पूर्वमुखी; दायाँ हाथ सालिहोत्र ऋषि को आशीर्वाद देता, बायाँ ज्ञान मुद्रा में।
- वैद्य वीरराघव – रोग निवारक भगवान के रूप में प्रसिद्ध।
- हृत्तापनाशिनी सरोवर – मंदिर के पश्चिम में विशाल सरोवर।
- कनकवल्ली थायार – अलग सन्निधि।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: तिरुवल्लूर रेलवे स्टेशन – चेन्नई–अरक्कोणम उपनगरीय मार्ग पर, चेन्नई सेंट्रल से लोकल ट्रेनें।
- सड़क मार्ग: चेन्नई से लगभग 45 किमी; स्टेशन और बस अड्डे से मंदिर पास है।
- हवाई मार्ग: चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 50 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वीरराघव स्वामी को वैद्य वीरराघव क्यों कहते हैं?
सालिहोत्र ऋषि की कथा क्या है?
अमावस्या पर यहाँ भीड़ क्यों होती है?
किन आलवारों ने इस मंदिर की स्तुति की?
चेन्नई से तिरुवल्लूर कैसे पहुँचें?
श्री वीरराघव स्वामी मंदिर (तिरु एव्वुळ), तिरुवल्लूर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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