अंबाजी मंदिर गुजरात के बनासकांठा ज़िले में राजस्थान सीमा के पास अरासुर पर्वत पर स्थित माँ अंबा का प्रसिद्ध मंदिर है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है – तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ सती का हृदय गिरा था। गुजरात और राजस्थान के करोड़ों भक्तों की कुलदेवी माँ अंबा का यह धाम भारत के सबसे ज़्यादा दर्शन किए जाने वाले मंदिरों में गिना जाता है। माउंट आबू यहाँ से लगभग 45 किमी दूर है।
मूर्ति नहीं, श्री वीसा यंत्र की पूजा
अंबाजी मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहाँ देवी की कोई मूर्ति नहीं है। गर्भगृह में सोने का श्री वीसा यंत्र स्थापित है, जिसकी पूजा होती है। पुजारी यंत्र को वस्त्र और आभूषणों से इस तरह सजाते हैं कि दूर से वह देवी की मूर्ति जैसा दिखाई देता है – सुबह, दोपहर और शाम को देवी अलग-अलग वाहनों (बाघ, हाथी आदि) पर सवार रूप में श्रृंगारित होती हैं। परंपरा है कि यंत्र को खुली आँखों से देखना या उसकी तस्वीर लेना वर्जित है; पुजारी भी आँखों पर पट्टी बाँधकर उसकी पूजा करते हैं।
गब्बर पर्वत – अंबाजी का मूल स्थान
मंदिर से लगभग 4 किमी दूर गब्बर पर्वत को माँ अंबा का मूल स्थान माना जाता है। मान्यता है कि सती के हृदय का अंश इसी पर्वत पर गिरा था। पर्वत की चोटी पर एक दीप लगातार जलता रहता है, जो नीचे मुख्य मंदिर से भी दिखाई देता है। चोटी तक लगभग 999 सीढ़ियाँ हैं; बुज़ुर्ग श्रद्धालुओं के लिए रोपवे की सुविधा भी है। पर्वत पर 51 शक्तिपीठों की प्रतिकृतियों वाला परिक्रमा पथ भी बनाया गया है, जहाँ एक साथ सभी शक्तिपीठों के दर्शन का अनुभव मिलता है।
कथाएँ और इतिहास
लोक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन संस्कार गब्बर पर्वत पर हुआ था, और वनवास के समय भगवान राम ने भी यहाँ माँ अंबा की पूजा की थी। मंदिर का वर्तमान भव्य स्वरूप सफ़ेद संगमरमर से बना है और इसके शिखर पर सोने से मढ़े कलश हैं। मंदिर का प्रबंधन श्री आरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट करता है।
भाद्रवी पूनम मेला
भाद्रपद पूर्णिमा पर लगने वाला भाद्रवी पूनम मेला अंबाजी का सबसे बड़ा उत्सव है। इसमें लाखों श्रद्धालु गुजरात और राजस्थान के कोने-कोने से पैदल यात्रा करके आते हैं और देवी को ध्वजा चढ़ाते हैं। नवरात्रि में यहाँ गरबा और भवाई का भव्य आयोजन होता है। दीपावली पर माँ का विशेष श्रृंगार किया जाता है।
दर्शन का समय
- मंगला आरती: सुबह लगभग 7:30–8:00 बजे
- सुबह के दर्शन: 8:00 से 11:30 बजे तक
- राजभोग आरती: दोपहर लगभग 12:00 बजे; दर्शन 12:30 से 4:30 बजे तक
- संध्या आरती: शाम लगभग 6:30–7:00 बजे; दर्शन रात 9:00 बजे तक
भाद्रवी पूनम, नवरात्रि और दीपावली पर समय बदलता है – ट्रस्ट की घोषणा देखें।
मुख्य आकर्षण
- श्री वीसा यंत्र का श्रृंगार – सुबह, दोपहर, शाम अलग वाहन पर।
- गब्बर पर्वत – मूल स्थान, अखंड दीप, रोपवे।
- 51 शक्तिपीठ परिक्रमा – गब्बर पर्वत पर प्रतिकृतियाँ।
- कोटेश्वर महादेव और कुंभारिया जैन मंदिर – पास में।
- माउंट आबू – लगभग 45 किमी।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: आबू रोड रेलवे स्टेशन (लगभग 20 किमी) – सबसे निकट और सुविधाजनक।
- सड़क मार्ग: अहमदाबाद से लगभग 180 किमी, पालनपुर से लगभग 65 किमी – गुजरात परिवहन की नियमित बसें।
- हवाई मार्ग: उदयपुर (लगभग 170 किमी) और अहमदाबाद (लगभग 180 किमी) हवाई अड्डे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अंबाजी मंदिर में मूर्ति क्यों नहीं है?
अंबाजी शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
गब्बर पर्वत कितनी दूर है?
भाद्रवी पूनम मेला कब लगता है?
अंबाजी का निकटतम रेलवे स्टेशन कौन सा है?
अंबाजी मंदिर, बनासकांठा इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
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