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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

नारतियांग दुर्गा मंदिर, पश्चिम जयंतिया हिल्स (मेघालय)

Nartiang Durga Temple, West Jaintia Hills

पश्चिम जयंतिया हिल्स, मेघालय माँ दुर्गा (जयंतेश्वरी / जयंती); भैरव क्रमदीश्वर (मान्यता अनुसार) निःशुल्क प्रवेश

नारतियांग दुर्गा मंदिर मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले के नारतियांग गाँव में स्थित माँ दुर्गा का प्राचीन स्थान है। इसे लगभग 600 वर्ष पुराना माना जाता है और यह जयंतिया राजवंश से जुड़ा है। यहाँ देवी को जयंतेश्वरी कहा जाता है। स्थानीय हिंदू इसे देवी का स्थायी निवास मानते हैं। यहाँ की पूजा-पद्धति में हिंदू और प्राचीन खासी-पनार परंपराओं का अनोखा मेल दिखता है।

जयंतिया राजाओं का मंदिर

राजा धन माणिक (1596–1612) ने नारतियांग को जयंतिया राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया। उनके बाद राजा जसो माणिक ने कोच राजा नरनारायण की पुत्री लक्ष्मीनारायणी से विवाह किया; माना जाता है कि उनके प्रभाव से राजपरिवार में शाक्त उपासना बढ़ी। परंपरा के अनुसार देवी ने जसो माणिक को स्वप्न में दर्शन देकर यहाँ मंदिर बनाने को कहा। मंदिर की ऊँची और सुरक्षित स्थिति तथा यहाँ मिली पुरानी तोपों से लगता है कि यह कभी जयंतिया किले का हिस्सा था।

अनोखी दुर्गा पूजा

खासी परंपरा के अनुसार यहाँ देवी की कोई मूर्ति नहीं है। दुर्गा पूजा में केले के पौधे को गेंदे के फूलों से सजाकर देवी के रूप में पूजा जाता है। चार दिन के उत्सव के बाद तोपों की सलामी के साथ इसे मिंतदू नदी में विसर्जित किया जाता है। स्थानीय सियेम (परंपरागत प्रमुख) मंदिर के मुख्य संरक्षक हैं और पूजा में बकरे की बलि की परंपरा आज भी है। कहा जाता है कि यहाँ के पुजारी उन मूल पुजारियों के वंशज हैं जो जैंतियापुर से आए थे। आज मंदिर की देखरेख मेघालय की सेंट्रल पूजा कमेटी करती है।

स्थान को लेकर मत

स्थानीय मान्यता नारतियांग को 51 शक्तिपीठों में से जयंती शक्तिपीठ मानती है, जहाँ सती की बाईं जंघा गिरी थी – शक्ति जयंती और भैरव क्रमदीश्वर। दूसरी ओर, एक प्रचलित परंपरा जयंती शक्तिपीठ को बांग्लादेश के सिलहट जिले में जैंतियापुर के मंदिर से जोड़ती है, जो जयंतिया राजाओं की मुख्य राजधानी थी। दोनों स्थान ऐतिहासिक जयंतिया राज्य के भीतर रहे हैं, और इस प्रश्न पर विद्वानों में एकमत नहीं है।

आसपास के दर्शन

मंदिर से पैदल दूरी पर एक शिव मंदिर है, जहाँ पुरानी तोपें रखी हैं। लगभग 3 किमी दूर नारतियांग मोनोलिथ हैं – जयंतिया राजाओं के समय खड़े किए गए विशाल शिलास्तंभों का समूह। जिला मुख्यालय जोवाई लगभग 24 किमी दूर है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 7:00 से शाम 5:00 बजे तक
  • पूजा: प्रातः और संध्या

दुर्गा पूजा के चार दिनों में विशेष आयोजन होते हैं।

मुख्य आकर्षण

  • माँ दुर्गा (जयंतेश्वरी) का प्राचीन स्थान।
  • दुर्गा पूजा में केले के पौधे के रूप में देवी की पूजा।
  • मंदिर के पास शिव मंदिर और पुरानी तोपें।
  • नारतियांग मोनोलिथ – जयंतिया राजाओं के विशाल शिलास्तंभ (लगभग 3 किमी)।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: शिलांग से लगभग 65 किमी और जोवाई से लगभग 24 किमी; टैक्सी से जाना सुविधाजनक है।
  • हवाई मार्ग: शिलांग (उमरोई) हवाई अड्डा या गुवाहाटी हवाई अड्डा।
  • रेल मार्ग: निकटतम बड़ा रेलवे स्टेशन गुवाहाटी (असम)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नारतियांग दुर्गा मंदिर कहाँ है?
यह मंदिर मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले के नारतियांग गाँव में है, जो शिलांग से लगभग 65 किमी और जोवाई से लगभग 24 किमी दूर है।
क्या नारतियांग जयंती शक्तिपीठ है?
स्थानीय मान्यता नारतियांग को जयंती शक्तिपीठ मानती है, जहाँ सती की बाईं जंघा गिरी थी। दूसरी परंपरा जयंती शक्तिपीठ को बांग्लादेश के सिलहट जिले के जैंतियापुर से जोड़ती है। दोनों स्थान ऐतिहासिक जयंतिया राज्य के भीतर रहे हैं।
नारतियांग में दुर्गा पूजा कैसे होती है?
यहाँ देवी की कोई मूर्ति नहीं होती। दुर्गा पूजा में केले के पौधे को गेंदे के फूलों से सजाकर देवी के रूप में पूजा जाता है और चार दिन बाद तोपों की सलामी के साथ मिंतदू नदी में विसर्जित किया जाता है।
नारतियांग मंदिर का जयंतिया राजाओं से क्या संबंध है?
नारतियांग जयंतिया राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहा। परंपरा के अनुसार देवी ने राजा जसो माणिक को स्वप्न में मंदिर बनाने का आदेश दिया था। आज भी स्थानीय सियेम (प्रमुख) मंदिर के मुख्य संरक्षक हैं।
नारतियांग मंदिर के पास और क्या देखें?
मंदिर से पैदल दूरी पर एक शिव मंदिर है, जहाँ पुरानी तोपें रखी हैं। लगभग 3 किमी दूर नारतियांग मोनोलिथ हैं – जयंतिया राजाओं के समय के विशाल शिलास्तंभों का समूह।

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