मणिबंध शक्तिपीठ, जिसे मणिवेदिका शक्तिपीठ भी कहते हैं, राजस्थान के पवित्र तीर्थ पुष्कर के पास गायत्री पहाड़ी पर स्थित माँ गायत्री का मंदिर माना जाता है। तंत्र चूड़ामणि के अनुसार यहाँ सती की दोनों कलाइयाँ (मणिबंध) गिरी थीं। यहाँ की शक्ति गायत्री और भैरव सर्वानंद हैं। पुष्कर को “तीर्थगुरु” कहा जाता है – मान्यता है कि अन्य सभी तीर्थों की यात्रा पुष्कर सरोवर में स्नान के बिना अधूरी रहती है।
ब्रह्मा जी का यज्ञ और गायत्री
पद्म पुराण से जुड़ी कथा के अनुसार सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी ने पुष्कर में एक महान यज्ञ किया। यज्ञ में पत्नी का साथ होना आवश्यक था, पर देवी सावित्री को आने में देर हो गई। शुभ मुहूर्त निकलता देख ब्रह्मा जी ने गायत्री को साथ बैठाकर यज्ञ पूरा किया। इससे रुष्ट होकर सावित्री रत्नागिरि पहाड़ी पर चली गईं। इसीलिए पुष्कर में दो पहाड़ियों पर दो देवियों के मंदिर हैं – एक ओर सावित्री माता और दूसरी ओर गायत्री माता। गायत्री पहाड़ी पर ही मणिबंध शक्तिपीठ की मान्यता है।
मंदिर और चढ़ाई
गायत्री मंदिर तक पहुँचने के लिए पहाड़ी पर सीढ़ियों से चढ़ाई करनी होती है, जिसमें सामान्य गति से लगभग 30–45 मिनट लगते हैं। ऊपर से पुष्कर सरोवर, नगर और अरावली की पहाड़ियों का सुंदर दृश्य दिखता है – सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यह दृश्य विशेष रूप से मनमोहक होता है। गर्मी के दिनों में दोपहर की चढ़ाई से बचना चाहिए और पानी साथ रखना चाहिए।
पुष्कर के अन्य तीर्थ
पुष्कर में जगतपिता ब्रह्मा मंदिर सबसे प्रसिद्ध है – पूरे भारत में ब्रह्मा जी के गिने-चुने मंदिरों में यह प्रमुख है। पुष्कर सरोवर के 52 घाटों पर स्नान और संध्या आरती होती है। सावित्री माता मंदिर तक अब रोपवे भी चलता है। वराह मंदिर और रंगजी मंदिर भी दर्शनीय हैं।
प्रमुख उत्सव
- कार्तिक पूर्णिमा – पुष्कर मेला: सरोवर में पवित्र स्नान और विश्वप्रसिद्ध पशु मेला।
- चैत्र और शारदीय नवरात्रि: गायत्री मंदिर में विशेष पूजा और हवन।
- गायत्री जयंती पर देवी की विशेष आराधना।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से दोपहर 12:00 बजे और शाम 4:00 से रात 9:00 बजे तक
- आरती: सुबह और संध्या
पहाड़ी पर चढ़ाई होने के कारण सुबह या शाम का समय सबसे अच्छा रहता है।
मुख्य आकर्षण
- माँ गायत्री की प्रतिमा – पहाड़ी पर।
- पुष्कर सरोवर और उसके 52 घाट।
- जगतपिता ब्रह्मा मंदिर – भारत के गिने-चुने ब्रह्मा मंदिरों में से एक।
- सावित्री माता मंदिर – रत्नागिरि पहाड़ी पर, रोपवे उपलब्ध।
- पहाड़ी से पुष्कर नगर और सूर्यास्त का दृश्य।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: अजमेर जंक्शन (लगभग 15 किमी) – देश के कई शहरों से ट्रेनें; पुष्कर स्टेशन पर भी कुछ ट्रेनें रुकती हैं।
- सड़क मार्ग: अजमेर से नाग पहाड़ होकर लगभग 15 किमी; जयपुर से लगभग 145 किमी।
- हवाई मार्ग: किशनगढ़ हवाई अड्डा (लगभग 45 किमी) या जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 150 किमी)।