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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

हनुमान टोक, गंगटोक (सिक्किम)

Hanuman Tok, Gangtok

गंगटोक, सिक्किम श्री हनुमान निःशुल्क प्रवेश

हनुमान टोक सिक्किम की राजधानी गंगटोक के ऊपरी भाग में, लगभग 7,200 फीट की ऊँचाई पर स्थित भगवान हनुमान का मंदिर परिसर है। यह मंदिर इसलिए भी विशेष है कि इसकी देखरेख भारतीय सेना करती है। साफ़ मौसम में यहाँ से कंचनजंगा की बर्फीली चोटियों और नीचे फैले गंगटोक शहर का सुंदर दृश्य दिखता है।

संजीवनी की कथा

रामायण के अनुसार युद्ध में लक्ष्मण के मूर्छित होने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने हिमालय की ओर गए थे। स्थानीय मान्यता है कि द्रोणगिरि पर्वत की ओर उड़ते हुए हनुमान जी ने इसी पहाड़ी पर कुछ क्षण विश्राम किया था। इसी स्मृति में यहाँ उनका मंदिर बना और श्रद्धालु इसे मनोकामना पूरी करने वाला स्थान मानते हैं।

मंदिर का इतिहास

उपलब्ध जानकारी के अनुसार 1950 में अप्पाजी पंत नाम के एक प्रशासनिक अधिकारी ने यहाँ एक शिला पर मंदिर बनवाया, जो 1952 तक पूरा हुआ। बाद में भारतीय सेना ने हनुमान टोक के आसपास की भूमि ली और मंदिर की जिम्मेदारी भी सँभाली। सेना की देखरेख के कारण परिसर अनुशासित और साफ़-सुथरा रहता है; सीढ़ियों के रास्ते पर घंटियाँ और फूलों की क्यारियाँ लगी हैं।

यात्रा क्रम और आसपास के दर्शन

हनुमान टोक गंगटोक से नाथुला की ओर जाने वाले मार्ग पर लगभग 11 किमी दूर है। श्रद्धालु प्रायः एक ही यात्रा में गणेश टोक और ताशी व्यू पॉइंट भी देख लेते हैं। शहर के बीच स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर गंगटोक का पुराना हिंदू मंदिर है।

यात्रा सुझाव

सुबह जल्दी जाने पर बादल कम होते हैं और पर्वतों का दृश्य साफ़ मिलता है। ऊँचाई के कारण ठंड रहती है, इसलिए गर्म कपड़े साथ रखें।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 7:00 से शाम 5:00 बजे तक
  • आरती: प्रातः और संध्या

सुबह के समय आसमान साफ़ होने पर कंचनजंगा का दृश्य अच्छा दिखता है।

मुख्य आकर्षण

  • श्री हनुमान का मंदिर।
  • साफ़ मौसम में कंचनजंगा और गंगटोक शहर का दृश्य।
  • सेना द्वारा रखा गया साफ़-सुथरा परिसर।
  • पास में गणेश टोक और ताशी व्यू पॉइंट।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: गंगटोक से नाथुला मार्ग पर लगभग 11 किमी; टैक्सी से जाना सुविधाजनक है।
  • हवाई मार्ग: पाक्योंग हवाई अड्डा (सिक्किम) या बागडोगरा (पश्चिम बंगाल)।
  • रेल मार्ग: न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) रेलवे स्टेशन, वहाँ से सड़क द्वारा गंगटोक।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हनुमान टोक की क्या मान्यता है?
मान्यता है कि लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लेकर जाते समय हनुमान जी ने इसी स्थान पर विश्राम किया था। इसी कारण यहाँ उनका मंदिर बना।
हनुमान टोक मंदिर की देखरेख कौन करता है?
हनुमान टोक की देखरेख भारतीय सेना करती है। सेना ने आसपास की भूमि लेने के बाद मंदिर की जिम्मेदारी भी सँभाली, इसलिए परिसर बहुत साफ़-सुथरा रहता है।
हनुमान टोक कितनी ऊँचाई पर है?
हनुमान टोक लगभग 2,194 मीटर (लगभग 7,200 फीट) की ऊँचाई पर है। साफ़ मौसम में यहाँ से कंचनजंगा पर्वत श्रृंखला दिखाई देती है।
गंगटोक से हनुमान टोक कितनी दूर है?
हनुमान टोक गंगटोक से नाथुला की ओर जाने वाले मार्ग पर लगभग 11 किमी दूर है। टैक्सी से लगभग 30–40 मिनट लगते हैं।
हनुमान टोक मंदिर कब बना?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 1950 में अप्पाजी पंत नाम के एक अधिकारी ने यहाँ एक शिला पर मंदिर बनवाया, जो 1952 तक पूरा हुआ। बाद में भारतीय सेना ने इसकी देखरेख सँभाली।

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