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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

नीर्वण्ण पेरुमाल मंदिर, तिरुनीर्मलै (चेन्नई)

Neervanna Perumal Temple, Thiruneermalai

चेंगलपट्टु, तमिलनाडु भगवान नीर्वण्ण पेरुमाल और रंगनाथ (विष्णु), देवी अणिमामलर मंगै थायार और रंगनायकी थायार निःशुल्क प्रवेश

नीर्वण्ण पेरुमाल मंदिर चेन्नई के दक्षिणी उपनगर तिरुनीर्मलै में एक छोटी पहाड़ी और उसकी तलहटी पर बना भगवान विष्णु का प्राचीन मंदिर-समूह है। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है, जिसकी स्तुति तिरुमंगै आलवार और भूतत्ताऴ्वार ने की है। इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भगवान चार मुद्राओं में दर्शन देते हैं – खड़े, लेटे, बैठे और चलते हुए।

स्थल पुराण – तोयाद्रि और वाल्मीकि

स्थल पुराण में इस स्थान को तोयाद्रि कहा गया है – जल से घिरा पर्वत; तमिल नाम तिरुनीर्मलै का अर्थ भी यही है। कथा के अनुसार रामायण की रचना के बाद महर्षि वाल्मीकि ने पहाड़ी पर रंगनाथ की पूजा की और नीचे आकर श्रीराम के दर्शन की कामना की। तब लक्ष्मी सीता के रूप में, आदिशेष लक्ष्मण, शंख भरत, सुदर्शन चक्र शत्रुघ्न और गरुड़ हनुमान के रूप में प्रकट हुए। यह स्थान आठ स्वयं-व्यक्त क्षेत्रों में भी गिना जाता है।

मंदिर और विग्रह

तलहटी के मंदिर में मूल देवता नीर्वण्ण पेरुमाल खड़ी मुद्रा में हैं, साथ में देवी अणिमामलर मंगै थायार, कल्याण राम और आंडाल के सन्निधि हैं। पहाड़ी के ऊपर वाले मंदिर में रंगनाथ लेटी मुद्रा में, त्रिविक्रम चलती मुद्रा में और नृसिंह बैठी मुद्रा में विराजते हैं; यहाँ रंगनायकी थायार का अलग सन्निधि है और गर्भगृह के ऊपर का विमान रंग विमान कहलाता है। मंदिर में चोल और बाद के पांड्य काल के अनेक शिलालेख हैं। पूजा वैखानस आगम के अनुसार होती है।

आलवार और दिव्य प्रबंधम

परंपरा के अनुसार तिरुमंगै आलवार जब यहाँ आए तो पहाड़ी चारों ओर पानी से घिरी थी, और उन्हें कई महीने प्रतीक्षा करनी पड़ी। उन्होंने अपने पाशुरमों में भगवान की चारों मुद्राओं का गुणगान किया है। भूतत्ताऴ्वार ने भी इस धाम की स्तुति की है।

प्रमुख उत्सव

  • पंगुनि ब्रह्मोत्सवम (मार्च-अप्रैल): नीर्वण्ण पेरुमाल का वार्षिक उत्सव।
  • चित्तिरै ब्रह्मोत्सवम (अप्रैल-मई): पहाड़ी के रंगनाथ का उत्सव।
  • पंगुनि उत्तिरम (रंगनायकी थायार) और मासि उत्तिरम (अणिमामलर मंगै थायार)।

यात्रा सुझाव

मंदिर पल्लावरम और ताम्बरम के पास है, इसलिए चेन्नई हवाई अड्डे से भी आसानी से पहुँचा जा सकता है। पहाड़ी वाले मंदिर तक सीढ़ियों से चढ़ना होता है, इसलिए सुबह जल्दी जाना अच्छा रहता है। चेन्नई के अन्य दिव्य देशम – तिरुवल्लिक्केणि का पार्थसारथी मंदिर और तिरुविडन्दै – भी एक ही यात्रा में देखे जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 7:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक

पहाड़ी वाले रंगनाथ मंदिर और नीचे वाले मंदिर का समय अलग हो सकता है; उत्सव के दिनों में समय बदलता है।

मुख्य आकर्षण

  • नीर्वण्ण पेरुमाल – तलहटी के मंदिर में खड़ी मुद्रा में भगवान।
  • रंगनाथ (लेटी मुद्रा), नृसिंह (बैठी मुद्रा) और त्रिविक्रम (चलती मुद्रा) – पहाड़ी के मंदिर में।
  • कल्याण राम और आंडाल के सन्निधि।
  • क्षीर पुष्करिणी सहित मंदिर के पवित्र सरोवर।
  • पहाड़ी की चढ़ाई और ऊपर से आसपास का दृश्य।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: पल्लावरम उपनगरीय स्टेशन सबसे पास है; चेन्नई सेंट्रल और एग्मोर से लोकल ट्रेनें।
  • सड़क मार्ग: पल्लावरम और ताम्बरम से बस व ऑटो आसानी से मिलते हैं।
  • हवाई मार्ग: चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कुछ ही किलोमीटर दूर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तिरुनीर्मलै का नाम कैसे पड़ा?
तिरुनीर्मलै का अर्थ है जल से घिरा पवित्र पर्वत। स्थल पुराण में इसे तोयाद्रि कहा गया है, जिसका अर्थ भी यही है। मान्यता है कि तिरुमंगै आलवार को यहाँ पानी घटने तक कई महीने रुकना पड़ा था।
तिरुनीर्मलै में भगवान के कितने रूप हैं?
यहाँ भगवान विष्णु चार मुद्राओं में दर्शन देते हैं – नीचे नीर्वण्ण पेरुमाल खड़ी मुद्रा में, और पहाड़ी पर रंगनाथ लेटी, नृसिंह बैठी तथा त्रिविक्रम चलती मुद्रा में।
किन आलवारों ने तिरुनीर्मलै की स्तुति की?
तिरुमंगै आलवार और भूतत्ताऴ्वार ने अपने पाशुरमों में इस दिव्य देशम की स्तुति की है।
वाल्मीकि की इस मंदिर से क्या कथा जुड़ी है?
स्थानीय कथा के अनुसार रामायण की रचना के बाद महर्षि वाल्मीकि ने यहाँ पहाड़ी पर रंगनाथ की पूजा की। नीचे आकर उन्होंने राम के दर्शन की इच्छा की, तब भगवान राम सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान सहित प्रकट हुए।
तिरुनीर्मलै के प्रमुख उत्सव कौन से हैं?
नीर्वण्ण पेरुमाल का ब्रह्मोत्सवम पंगुनि (मार्च-अप्रैल) में और रंगनाथ का ब्रह्मोत्सवम चित्तिरै (अप्रैल-मई) में होता है। पंगुनि उत्तिरम और मासि उत्तिरम भी मनाए जाते हैं।

नीर्वण्ण पेरुमाल मंदिर, तिरुनीर्मलै (चेन्नई) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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