नित्यकल्याण पेरुमाल मंदिर चेन्नई से मामल्लपुरम जाने वाली ईस्ट कोस्ट रोड पर बसे गाँव तिरुविडन्दै में स्थित है। यहाँ भगवान विष्णु आदि वराह रूप में भूदेवी को गोद में लिए विराजते हैं, और देवी कोमलवल्ली थायार के रूप में पूजी जाती हैं। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है, जिसकी स्तुति तिरुमंगै आलवार ने की है। विवाह में देरी हो तो लोग विशेष रूप से यहाँ प्रार्थना करने आते हैं।
स्थल पुराण – प्रतिदिन विवाह करने वाले भगवान
कथा के अनुसार वराह अवतार में हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी (भूदेवी) का उद्धार करने के बाद भगवान ने इसी स्थान पर भूदेवी को अपनी गोद में बिठाया। कालव ऋषि चाहते थे कि भगवान उनकी 360 कन्याओं से विवाह करें। तब लक्ष्मी ने 360 रूप धारण किए और भगवान ने वर्ष भर प्रतिदिन एक कन्या से विवाह किया – इसीलिए वे नित्यकल्याण (नित्य विवाह करने वाले) पेरुमाल कहलाए। मान्यता है कि पहले विवाह में आए रंगनाथ भी यहीं बस गए; मंदिर में रंगनाथ और रंगनायकी का अलग सन्निधि है।
मंदिर और इतिहास
मंदिर की मूल संरचना पल्लव काल (लगभग 7वीं शताब्दी) की मानी जाती है, जब मामल्लपुरम और तिरुविडन्दै पल्लव साम्राज्य के बंदरगाह थे। मंदिर में राष्ट्रकूट राजा कृष्ण तृतीय के समय का दीपदान का शिलालेख है और चोल राजाओं – राजाधिराज और कुलोत्तुंग प्रथम – के दान के शिलालेख भी मिलते हैं। शिलालेखों के कारण यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का संरक्षित स्मारक भी है, फिर भी यहाँ नियमित पूजा होती है। गर्भगृह तक सोलह स्तंभों वाले नक्काशीदार मंडप से पहुँचा जाता है; वराह प्रतिमा लगभग सात फुट ऊँची है। पूजा तेन्कलै परंपरा में होती है।
विवाह की मनोकामना
चूँकि भगवान यहाँ नित्य विवाह करते हैं, इसलिए यह मंदिर विवाह-बाधा दूर करने के लिए प्रसिद्ध है। प्रचलित परंपरा है कि भक्त भगवान को माला चढ़ाते हैं, वही माला पहनकर मंदिर की नौ परिक्रमा करते हैं। शिलालेखों में भगवान को वराह देव, वर स्वामी और वराह नायनार जैसे नामों से भी संबोधित किया गया है।
प्रमुख उत्सव
- चित्तिरै ब्रह्मोत्सवम (अप्रैल-मई): उत्सव मूर्तियों की नगर परिक्रमा।
- वैकुंठ एकादशी (दिसंबर-जनवरी)।
- पंगुनि उत्तिरम और कार्तिकै मास में तिरुमंगै आलवार उत्सव।
आसपास के दर्शन
मंदिर के सामने का कल्याण तीर्थम सरोवर ईस्ट कोस्ट रोड से ही दिखाई देता है। यहाँ से आगे मामल्लपुरम का स्थलशयन पेरुमाल दिव्य देशम है – कथा के अनुसार दोनों मंदिर एक ही भक्त राजा की कथा से जुड़े हैं – इसलिए दोनों के दर्शन एक ही दिन में किए जा सकते हैं।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 6:30 से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: लगभग 3:00 से रात 8:30 बजे तक
उत्सव के दिनों और सप्ताहांत पर भीड़ अधिक रहती है।
मुख्य आकर्षण
- आदि वराह – भूदेवी को गोद में लिए भगवान की दुर्लभ ग्रेनाइट प्रतिमा।
- कोमलवल्ली थायार का सन्निधि।
- कल्याण तीर्थम – मंदिर के सामने का बड़ा सरोवर, ईस्ट कोस्ट रोड से दिखाई देता है।
- स्तंभों पर वराह और नृसिंह की नक्काशी।
- पल्लव, राष्ट्रकूट और चोल काल के शिलालेख।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: चेन्नई से ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर लगभग 38-40 किमी; मामल्लपुरम जाने वाली बसें यहाँ रुकती हैं।
- रेल मार्ग: चेन्नई के रेलवे स्टेशन; वहाँ से सड़क द्वारा।
- हवाई मार्ग: चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भगवान को नित्यकल्याण पेरुमाल क्यों कहते हैं?
क्या यह मंदिर विवाह की मनोकामना के लिए प्रसिद्ध है?
यहाँ भगवान किस रूप में हैं?
किस आलवार ने तिरुविडन्दै की स्तुति की?
तिरुविडन्दै चेन्नई से कितनी दूर है?
नित्यकल्याण पेरुमाल मंदिर, तिरुविडन्दै इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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कांचीपुरम, तमिलनाडु श्री आदि वराह पेरुमाळ सन्निधि (तिरुक्कळ्वनूर), कांचीपुरम भगवान श्री आदि वराह पेरुमाळ, देवी अंजिलैवल्ली नाच्चियार
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तंजावुर, तमिलनाडु गजेन्द्र वरद पेरुमाल मंदिर, कपिस्थलम (तिरुक्कवित्तलम) भगवान गजेन्द्र वरद पेरुमाल, देवी रमामणिवल्ली थायार
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तूतुकुड़ी, तमिलनाडु श्री मायक्कूत्तर (श्रीनिवास) पेरुमाळ मंदिर, तिरुक्कुळन्दै (पेरुंगुलम) भगवान श्रीनिवास (मायक्कूत्तर); देवी अलर्मेलमंगै, कुळन्दैवल्ली
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कुंभकोणम, तमिलनाडु श्री सारनाथन पेरुमाल मंदिर, तिरुच्चेरै भगवान श्री सारनाथ पेरुमाल, देवी सारनायकी थायार
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कांचीपुरम, तमिलनाडु श्री वैकुण्ठ पेरुमाळ मंदिर (तिरु परमेश्वर विण्णगरम), कांचीपुरम भगवान श्री वैकुण्ठनाथ (परमपदनाथ), देवी वैकुण्ठवल्ली थायार
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मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री अमृतघटेश्वरर-अभिरामी मंदिर, तिरुक्कडैयूर भगवान शिव (अमृतघटेश्वरर, कालसंहारमूर्ति), देवी अभिरामी