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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री देवादिराज पेरुमाल (आमरुवियप्पन) मंदिर, तेरऴुन्दूर

Sri Devadiraja Perumal (Amaruviappan) Temple, Therazhundur

मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु भगवान श्री देवादिराज पेरुमाल (उत्सव मूर्ति आमरुवियप्पन), देवी सेंकमलवल्ली थायार निःशुल्क प्रवेश

श्री देवादिराज पेरुमाल मंदिर, जिसे आमरुवियप्पन मंदिर भी कहा जाता है, मयिलाडुतुरै से लगभग 10 किमी दूर गाँव तेरऴुन्दूर (तिरुवऴुन्दूर) में स्थित है। यहाँ भगवान विष्णु देवादिराज पेरुमाल और उत्सव मूर्ति आमरुवियप्पन के रूप में, तथा देवी लक्ष्मी सेंकमलवल्ली थायार के रूप में पूजी जाती हैं। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है, जिसकी स्तुति तिरुमंगै आऴ्वार ने की है। यह गाँव तमिल रामायण के रचयिता महाकवि कम्बर का जन्मस्थान भी माना जाता है।

स्थल पुराण: धँसा हुआ रथ

स्थल पुराण के अनुसार राजा उपरिचर वसु को ब्रह्मा से आकाश में रथ उड़ाने का वरदान मिला था। एक दिन इस स्थान के ऊपर से गुज़रते समय उनका रथ नीचे गिरकर धरती में धँस गया, जहाँ अगस्त्य ऋषि तपस्या कर रहे थे। ‘तेर’ (रथ) के ‘अऴुन्द’ (धँसने) से ही इस स्थान का नाम तेरऴुन्दूर पड़ा। इस कथा के कुछ अन्य रूप भी स्थानीय परंपरा में प्रचलित हैं।

आमरुवियप्पन: गायों के रक्षक

एक कथा के अनुसार ब्रह्मा ने कृष्ण की गायों को छिपा लिया, तो कृष्ण ने नया गोवंश रच दिया। अपनी भूल समझकर ब्रह्मा ने क्षमा माँगी और कृष्ण से यहाँ निवास करने की प्रार्थना की। गायों के साथ प्रकट होने के कारण भगवान आमरुवियप्पन कहलाए, और गर्भगृह में आज भी उनके चारों ओर गायों की मूर्तियाँ हैं। मान्यता है कि प्रह्लाद और कावेरी देवी को भी यहाँ भगवान के दर्शन हुए।

मंदिर और कम्बर

मंदिर का पाँच-स्तरीय राजगोपुरम ग्रेनाइट की दीवारों से घिरा है। गर्भगृह में देवादिराज खड़ी मुद्रा में गरुड़ विमान के नीचे विराजते हैं। परिसर में अगस्त्य, नरसिंह, राम, हनुमान और आऴ्वारों के सन्निधि हैं। सामने दर्श पुष्करिणी और उत्तर में गजेन्द्र पुष्करिणी है। मंदिर में एक छोटा सन्निधि है जिसमें कवि कम्बर और उनकी पत्नी भगवान की प्रार्थना करते दिखते हैं; पास ही ‘कम्बर मेडु’ नाम का स्थल उनके निवास से जोड़ा जाता है। मंदिर में वडकलै परंपरा से पूजा होती है।

प्रमुख उत्सव

  • वैकासि ब्रह्मोत्सव (मई-जून): मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव, देवताओं की शोभायात्रा।
  • वैकुंठ एकादशी (मार्गऴि): विशेष दर्शन।
  • पंगुनि उत्तिरम: थायार का तिरुकल्याणम।

आसपास के दर्शन

तेरऴुन्दूर में शिव का वेदपुरीश्वरर मंदिर भी है। मयिलाडुतुरै का परिमळ रंगनाथ मंदिर (तिरुइन्दलूर) और कुंभकोणम के दिव्य देशम पास ही हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:30 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 3:00 / 4:00 से रात 9:00 बजे तक
  • नोट: समय उत्सवों के दिनों में बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • देवादिराज पेरुमाल – खड़ी मुद्रा में मूलवर, गर्भगृह में गायों और ऋषियों की मूर्तियाँ।
  • आमरुवियप्पन – गायों के साथ विराजने वाले उत्सव देवता।
  • सेंकमलवल्ली थायार – दूसरे प्राकार में अलग सन्निधि।
  • कम्बर सन्निधि – कम्ब रामायण के रचयिता कवि कम्बर और उनकी पत्नी की छोटी मूर्ति।
  • दर्श पुष्करिणी – मंदिर के सामने का सरोवर।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: मयिलाडुतुरै से लगभग 10 किमी; कुंभकोणम से भी सड़क मार्ग।
  • रेल मार्ग: मयिलाडुतुरै जंक्शन (लगभग 10 किमी)।
  • हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 130 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तेरऴुन्दूर मंदिर कहाँ है?
यह मंदिर तमिलनाडु के मयिलाडुतुरै ज़िले में, मयिलाडुतुरै से लगभग 10 किमी दूर तेरऴुन्दूर गाँव में है।
आमरुवियप्पन नाम का क्या अर्थ है?
कथा के अनुसार भगवान कृष्ण यहाँ गायों के साथ प्रकट हुए, इसलिए उन्हें आमरुवियप्पन – गायों के साथ विराजने वाले – कहा जाता है।
तेरऴुन्दूर का कवि कम्बर से क्या संबंध है?
तेरऴुन्दूर को तमिल रामायण (कम्ब रामायण) के रचयिता कवि कम्बर का जन्मस्थान माना जाता है। मंदिर में कम्बर और उनकी पत्नी की मूर्ति वाला छोटा सन्निधि है।
इस दिव्य देशम की स्तुति किस आऴ्वार ने की?
तिरुमंगै आऴ्वार ने इस मंदिर और सेंकमलवल्ली थायार की स्तुति अपने पाशुरमों में की है।
यहाँ का मुख्य उत्सव कब होता है?
वैकासि मास (मई-जून) का ब्रह्मोत्सव और मार्गऴि मास की वैकुंठ एकादशी यहाँ के प्रमुख उत्सव हैं।

श्री देवादिराज पेरुमाल (आमरुवियप्पन) मंदिर, तेरऴुन्दूर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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