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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री नाण्मदिय पेरुमाल मंदिर, तलैच्चंगाडु (तिरुतलैच्चंग नाण्मदियम)

Sri Nanmadiya Perumal Temple, Thalaichangadu (Thiruthalaichanga Nanmadiyam)

मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु भगवान श्री नाण्मदिय पेरुमाल (चन्द्रशापहर पेरुमाल), देवी तलैच्चंग नाच्चियार निःशुल्क प्रवेश

श्री नाण्मदिय पेरुमाल मंदिर, जिसे दिव्य देशम सूची में तिरुतलैच्चंग नाण्मदियम कहा जाता है, मयिलाडुतुरै ज़िले में आक्कूर के पास गाँव तलैच्चंगाडु में स्थित है। यहाँ भगवान विष्णु नाण्मदिय पेरुमाल (चन्द्रशापहर पेरुमाल) और देवी लक्ष्मी तलैच्चंग नाच्चियार के रूप में पूजे जाते हैं। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है, जिसकी स्तुति तिरुमंगै आऴ्वार ने की है।

स्थल पुराण: चन्द्र की शाप-मुक्ति

कथा के अनुसार चन्द्र देव, जो क्षीरसागर मंथन से प्रकट होने के कारण देवी लक्ष्मी के भाई माने जाते हैं, एक बार देवगुरु बृहस्पति की पत्नी तारा को ले गए। क्रोधित बृहस्पति ने चन्द्र को रोगग्रस्त होने का शाप दिया। शाप से मुक्ति के लिए चन्द्र ने इस स्थान पर भगवान विष्णु की उपासना की और भगवान ने प्रकट होकर उन्हें मुक्त किया। इसीलिए भगवान चन्द्रशापहर और ‘नाण्मदियम’ (उज्ज्वल चन्द्र से जुड़े) कहलाते हैं। भगवान के हाथ के प्रसिद्ध शंख के कारण स्थान का नाम तलैच्चंगम पड़ा।

मंदिर और विग्रह

यह एक छोटा मंदिर है जिसमें एक-स्तरीय गोपुरम, एक प्राकार और दो सन्निधि हैं। नाण्मदिय पेरुमाल पूर्वमुखी हैं और उनकी अनोखी विशेषता यह है कि वे शिव की तरह सिर पर अर्धचन्द्र धारण करते हैं। मंदिर के सामने चन्द्र पुष्करिणी है। जीर्ण अवस्था में पहुँचे मंदिर का बाद में जीर्णोद्धार किया गया।

इतिहास और साहित्य

यह स्थान कावेरी के दक्षिणी तट के पास है और चोलों के प्राचीन बंदरगाह नगर पूम्पुहार के निकट होने के कारण चोल काल में शंखों के लिए प्रसिद्ध था। संगम साहित्य के महाकाव्य शिलप्पदिकारम में भी इस स्थान का उल्लेख माना जाता है। तिरुमंगै आऴ्वार ने नालायिर दिव्य प्रबंधम में इसकी स्तुति की है, और बाद में दिव्य कवि पिळ्ळै पेरुमाळ अय्यंगार ने भी 108 तिरुप्पति अन्दादि में इसका उल्लेख किया।

यात्रा सुझाव

  • छोटा ग्रामीण मंदिर होने के कारण दोपहर में द्वार बंद रहते हैं; सुबह या शाम जाएँ।
  • पूम्पुहार, सीरकाऴि और मयिलाडुतुरै के अन्य दिव्य देशम एक साथ देखे जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 8:00 से दोपहर 11:30 बजे तक
  • शाम: लगभग 5:00 से रात 7:30 बजे तक
  • नोट: समय उत्सवों के दिनों में बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • नाण्मदिय पेरुमाल – पूर्वमुखी सन्निधि; शिव की तरह सिर पर अर्धचन्द्र।
  • विशेष शंख – भगवान के हाथ का शंख, जिससे स्थान का नाम जुड़ा है।
  • चन्द्र पुष्करिणी – मंदिर के सामने का सरोवर।
  • शांत ग्रामीण परिवेश – कावेरी के दक्षिणी तट के पास छोटा मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: आक्कूर के पास, मयिलाडुतुरै–पूम्पुहार क्षेत्र में; मयिलाडुतुरै और सीरकाऴि से सड़क मार्ग।
  • रेल मार्ग: निकटतम बड़े स्टेशन मयिलाडुतुरै जंक्शन और सीरकाऴि।
  • हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 150 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तलैच्चंगाडु मंदिर कहाँ है?
यह मंदिर तमिलनाडु के मयिलाडुतुरै ज़िले में आक्कूर के पास तलैच्चंगाडु गाँव में, पूम्पुहार क्षेत्र के निकट है।
नाण्मदिय पेरुमाल की कथा क्या है?
मान्यता है कि बृहस्पति के शाप से पीड़ित चन्द्र देव ने यहाँ भगवान विष्णु की उपासना की और शाप से मुक्ति पाई। इसलिए भगवान चन्द्रशापहर पेरुमाल कहलाते हैं।
यहाँ के भगवान की क्या विशेषता है?
यहाँ भगवान विष्णु शिव की तरह सिर पर अर्धचन्द्र धारण करते हैं, और उनके हाथ का शंख विशेष माना जाता है।
तलैच्चंगम नाम क्यों पड़ा?
भगवान के हाथ के प्रसिद्ध शंख (चंगम) के कारण इस स्थान का नाम तलैच्चंगम पड़ा।
इस दिव्य देशम की स्तुति किसने की?
तिरुमंगै आऴ्वार ने नालायिर दिव्य प्रबंधम में इस मंदिर की स्तुति की है।

श्री नाण्मदिय पेरुमाल मंदिर, तलैच्चंगाडु (तिरुतलैच्चंग नाण्मदियम) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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