श्री परिमळ रंगनाथ पेरुमाल मंदिर तमिलनाडु के मयिलाडुतुरै नगर के तिरुइन्दलूर (इन्दलूर) क्षेत्र में कावेरी तट पर स्थित है। यहाँ भगवान विष्णु परिमळ रंगनाथ के रूप में शयन मुद्रा में हैं, और देवी लक्ष्मी परिमळ रंगनायकी (पुण्डरीकवल्ली) के रूप में पूजी जाती हैं। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है, जिसकी स्तुति तिरुमंगै आऴ्वार ने की है, और कावेरी तट के पाँच पंचरंग क्षेत्रों में भी गिना जाता है।
स्थल पुराण
मान्यता है कि यहीं चन्द्र देव को अपने शाप से मुक्ति मिली। संस्कृत में ‘इन्दु’ का अर्थ चन्द्रमा है, और इसी से स्थान का नाम तिरुइन्दलूर पड़ा; थायार को ‘चन्द्रशाप विमोचनवल्ली’ भी कहते हैं। एक और परंपरा के अनुसार असुरों ने ब्रह्मा से वेद चुरा लिए थे। भगवान ने उन्हें वापस लाकर ब्रह्मा को लौटाया और असुरों के संपर्क से अशुद्ध हुए वेदों को अपनी कृपा से सुगंध (परिमळ) प्रदान की – इसी से भगवान परिमळ रंगनाथ कहलाए।
गंगा, कावेरी और तुला स्नान
स्थल पुराण कहता है कि कावेरी ने गंगा से कम सम्मान मिलने का दुःख भगवान के सामने रखा, और गंगा भक्तों के पापों के बोझ से दबी थी। भगवान ने गंगा को ऐप्पसि (तुला) मास में इन्दलूर आकर कावेरी में मिलने को कहा, जिससे दोनों की पवित्रता बढ़ी। इसी कथा के अनुसार गर्भगृह में गंगा भगवान के चरणों के पास और कावेरी सिर के पास दिखाई देती हैं। भक्त ऐप्पसि मास में यहाँ कावेरी में तुला स्नान को अत्यंत पुण्यदायी मानते हैं।
मंदिर और आलवार कथा
मंदिर तीन प्राकारों वाला है और इसका पाँच-स्तरीय पूर्वमुखी राजगोपुरम है। गर्भगृह में हरे पत्थर से बनी परिमळ रंगनाथ की विशाल शयन मूर्ति है, साथ में संतानगोपालकृष्ण की मूर्ति भी है। गरुड़ मंडप के स्तंभों पर दशावतार उकेरे गए हैं। कथा है कि तिरुमंगै आऴ्वार यहाँ पहुँचे तो मंदिर के द्वार बंद थे; वे लगातार स्तुति गाते रहे, और अंत में खीझकर भगवान से कहा कि अपना मंदिर अपने पास ही रखें – तभी द्वार खुल गए।
प्रमुख उत्सव
- चित्रै उत्सव: मंदिर का मुख्य उत्सव।
- ऐप्पसि तुला महोत्सव: 10 दिन का उत्सव और तुला स्नान।
- वैकुंठ एकादशी, आडि मास का आण्डाल उत्सव, पुरट्टासि में थायार नवरात्रि और पंगुनि ब्रह्मोत्सव।
पंचरंग क्षेत्र
कावेरी तट के पाँच रंगनाथ मंदिर – श्रीरंगपट्टण, श्रीरंगम, कोविलडि (तिरुप्पेर नगर), तिरुइन्दलूर और वटरंगम (सीरकाऴि) – पंचरंग क्षेत्र कहलाते हैं। मयिलाडुतुरै में शिव का प्रसिद्ध मायूरनाथर मंदिर भी है, और तेरऴुन्दूर का आमरुवियप्पन मंदिर पास ही है।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:30 बजे तक
- शाम: लगभग 4:30 से रात 9:00 बजे तक
- नोट: समय उत्सवों के दिनों में बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- परिमळ रंगनाथ – हरे पत्थर की विशाल, पूर्वमुखी शयन मूर्ति।
- गंगा और कावेरी – गर्भगृह में भगवान के चरणों के पास गंगा और सिर के पास कावेरी।
- गरुड़ मंडप – दशावतार की नक्काशी वाले स्तंभ।
- राजगोपुरम – पाँच-स्तरीय पूर्वमुखी गोपुरम।
- तुला स्नान – ऐप्पसि (तुला) मास में कावेरी स्नान की परंपरा।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: मयिलाडुतुरै जंक्शन – चेन्नई, त्रिची, तंजावुर और कुंभकोणम से ट्रेनें।
- सड़क मार्ग: मयिलाडुतुरै शहर के भीतर; कुंभकोणम से लगभग 40 किमी।
- हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 130 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
परिमळ रंगनाथ मंदिर कहाँ है?
भगवान को परिमळ रंगनाथ क्यों कहते हैं?
पंचरंग क्षेत्र कौन से हैं?
मयिलाडुतुरै में तुला स्नान क्या है?
इस मंदिर से जुड़ी तिरुमंगै आऴ्वार की कथा क्या है?
श्री परिमळ रंगनाथ पेरुमाल मंदिर, तिरुइन्दलूर (मयिलाडुतुरै) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
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