श्री तामरैयाळ केळ्वन पेरुमाळ मंदिर तमिलनाडु के मयिलाडुतुरै ज़िले में, सीरकाऴि से लगभग 8 किमी पूर्व तिरुनांगूर गाँव के पास स्थित है। यह स्थान तिरुप्पार्थनपळ्ळि कहलाता है और 108 दिव्य देशमों में से एक है। यह तिरुनांगूर क्षेत्र के ग्यारह दिव्य देशमों – तिरुनांगूर तिरुपतियों – में गिना जाता है। यहाँ भगवान विष्णु “तामरैयाळ केळ्वन” – कमल पर विराजने वाली लक्ष्मी के स्वामी – के नाम से पूजे जाते हैं, और इन्हें पार्थसारथी भी कहा जाता है।
स्थल पुराण: अर्जुन और अगस्त्य
कथा है कि तीर्थयात्रा के दौरान अर्जुन को तीव्र प्यास लगी। उन्होंने यहाँ तपस्या कर रहे अगस्त्य मुनि से जल माँगा, पर मुनि के कमंडल में जल नहीं था। अगस्त्य ने समझ लिया कि यह भगवान कृष्ण की लीला है और अर्जुन से उन्हीं का स्मरण करने को कहा। कृष्ण ने अर्जुन को एक खड्ग दिया, जिससे धरती खोदते ही जल निकल आया – यही सरोवर खड्ग पुष्करिणी कहलाता है। फिर भगवान ने पार्थसारथी रूप में दर्शन देकर अर्जुन को उपदेश दिया, इसलिए गाँव का नाम “पार्थन पळ्ळि” (अर्जुन की पाठशाला) पड़ा।
मंदिर और विग्रह
द्रविड़ शैली में बने इस मंदिर का मुख्य गर्भगृह पश्चिम की ओर है। थायार तामरै नायकी (जिन्हें सेंगमलवल्ली भी कहा जाता है) की अलग सन्निधि पूर्वाभिमुख है। उत्सव विग्रह के साथ श्रीदेवी, भूदेवी, नीलादेवी और जाम्बवती विराजती हैं। इस क्षेत्र में यह अकेला मंदिर माना जाता है जहाँ राम और कृष्ण के उत्सव विग्रह एक ही सन्निधि में हैं।
आऴ्वार और दिव्य प्रबंधम
इस मंदिर की स्तुति तिरुमंगै आऴ्वार और पोय्गै आऴ्वार ने नालायिर दिव्य प्रबंधम के पाशुरमों में की है। तिरुनांगूर क्षेत्र तिरुमंगै आऴ्वार से विशेष रूप से जुड़ा है, क्योंकि उनका जन्म इसी अंचल में हुआ माना जाता है।
प्रमुख उत्सव
- तिरुनांगूर गरुड़ सेवै (थाई मास, जनवरी-फ़रवरी): तिरुमंगै आऴ्वार मंगलाशासन उत्सव में ग्यारह तिरुनांगूर दिव्य देशमों के उत्सव विग्रह गरुड़ वाहन पर तिरुनांगूर लाए जाते हैं।
- आडि अमावस्या (जुलाई-अगस्त): भगवान को पूम्पुहार के समुद्र तट पर तीर्थवारी (पवित्र स्नान) के लिए ले जाया जाता है।
यात्रा सुझाव
तिरुनांगूर के ग्यारह दिव्य देशम एक-दूसरे के पास हैं, इसलिए सीरकाऴि में ठहरकर एक-दो दिन में इनके दर्शन किए जा सकते हैं। पास ही तिरुवेण्काडु और पूम्पुहार भी देखे जा सकते हैं।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 7:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: लगभग 5:00 से रात 8:00 बजे तक
गाँव का मंदिर होने के कारण समय बदल सकता है; जाने से पहले स्थानीय रूप से पूछ लें।
मुख्य आकर्षण
- तामरैयाळ केळ्वन पेरुमाळ – “कमलवासिनी लक्ष्मी के स्वामी”, पार्थसारथी रूप में।
- खड्ग पुष्करिणी – अर्जुन द्वारा खोदा गया माना जाने वाला मंदिर-सरोवर।
- एक ही सन्निधि में राम और कृष्ण के उत्सव विग्रह।
- तिरुनांगूर गरुड़ सेवै – थाई मास में 11 दिव्य देशमों के पेरुमाळ एक साथ।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: सीरकाऴि से लगभग 8 किमी पूर्व, तिरुवेण्काडु जाने वाले मार्ग पर; तिरुनांगूर गाँव के पास।
- रेल मार्ग: सीरकाऴि रेलवे स्टेशन सबसे निकट है।
- हवाई मार्ग: निकटतम बड़ा हवाई अड्डा तिरुच्चिराप्पल्ली है; चेन्नई से भी सड़क/रेल द्वारा पहुँचा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तिरुप्पार्थनपळ्ळि नाम कैसे पड़ा?
खड्ग पुष्करिणी की क्या कथा है?
किन आऴ्वारों ने इस मंदिर की स्तुति की है?
तिरुनांगूर तिरुपति क्या हैं?
तिरुनांगूर गरुड़ सेवै कब होती है?
श्री तामरैयाळ केळ्वन पेरुमाळ मंदिर, तिरुप्पार्थनपळ्ळि इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
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