श्री सौरिराज पेरुमाल मंदिर, जिसे नीलमेघ पेरुमाल मंदिर भी कहते हैं, तमिलनाडु के नागपट्टिनम ज़िले के गाँव तिरुकण्णपुरम में स्थित है। मूलवर नीलमेघ पेरुमाल और उत्सव मूर्ति सौरिराज पेरुमाल हैं, तथा देवी लक्ष्मी कण्णपुर नायकी के रूप में पूजी जाती हैं। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है, जिसकी स्तुति पेरियाऴ्वार, आण्डाल, कुलशेखर आऴ्वार, नम्माऴ्वार और तिरुमंगै आऴ्वार – पाँच आऴ्वारों ने की है। पाशुरमों की संख्या में यह श्रीरंगम के बाद आता है और इसे ‘भूलोक वैकुंठम’ भी कहा जाता है।
सौरि की कथा
मंदिर के पुजारी रंगभट्टर प्रतिदिन भगवान को एक माला चढ़ाते थे। एक दिन राजा को उस माला में एक बाल मिला। पुजारी ने घबराकर कहा कि यह स्वयं भगवान का केश है। राजा ने परीक्षा लेनी चाही, तो भगवान स्वयं केशों (स्थानीय भाषा में ‘सौरि’) के साथ प्रकट हुए और भक्त की लाज रखी। तभी से उत्सव मूर्ति सौरिराज पेरुमाल कहलाती है। पद्म पुराण से जुड़ी कथा में राजा उपरिचर वसु की पुत्री पद्मिनी से भगवान के विवाह का वर्णन है, जिसका अभिनय उत्सवों में किया जाता है।
मंदिर और विग्रह
मंदिर चोलों द्वारा निर्मित माना जाता है और बाद में तंजावुर नायकों ने इसमें योगदान दिया। सात-स्तरीय राजगोपुरम के सामने विशाल नित्य पुष्करिणी है। गर्भगृह में नीलमेघ पेरुमाल श्रीदेवी-भूदेवी, दण्डक महर्षि और गरुड़ के साथ विराजते हैं। एक लोककथा के अनुसार किसी भक्त के फेंके चक्र का निशान आज भी मूर्ति पर दिखता है। परिसर में बारह आऴ्वारों, राम, नर्तन कृष्ण और सेनै मुदलियार के सन्निधि हैं।
मुनियोदरन पोंगल
यहाँ हर रात अंतिम पूजा में मुनियोदरन पोंगल – चावल, दाल और घी से बना प्रसाद – चढ़ाया जाता है। परंपरा के अनुसार मुनियोदरन नाम के भक्त ने बाढ़ के समय वसूला गया कर लोगों की सहायता में लगा दिया; राजा ने उन्हें बंदी बनाया तो भगवान ने स्वप्न में राजा को उन्हें छोड़ने का आदेश दिया। इसी भक्त के नाम से यह प्रसाद जाना जाता है।
प्रमुख उत्सव
- वैकासि ब्रह्मोत्सव (मई-जून): 12 दिन का मुख्य उत्सव और रथ यात्रा।
- मासि महोत्सव (फरवरी-मार्च): 10 दिन का उत्सव, पद्मिनी विवाह का अभिनय।
- कृष्ण जन्माष्टमी, मार्गऴि उत्सव, पंगुनि उत्तिरम आदि।
पंच कृष्णारण्य और अष्ट क्षेत्र
तिरुकण्णपुरम पंच कृष्णारण्य क्षेत्रों में प्रमुख माना जाता है। इसे वैष्णव परंपरा के उन आठ मोक्ष क्षेत्रों में भी गिना जाता है जो अष्टाक्षर मंत्र ‘ॐ नमो नारायणाय’ के अक्षरों का प्रतिनिधित्व करते हैं – जैसे श्रीरंगम, तिरुपति, श्रीमुष्णम और नांगुनेरी। पास ही तिरुकण्णंगुडि और नागपट्टिनम के दिव्य देशम भी हैं।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 7:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: लगभग 5:00 से रात 9:00 बजे तक
- नोट: समय उत्सवों के दिनों में बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- नीलमेघ पेरुमाल – गर्भगृह में श्रीदेवी-भूदेवी के साथ; मुद्रा चक्र छोड़ते हुए मानी जाती है।
- सौरिराज उत्सव मूर्ति – श्रीदेवी, भूदेवी, पद्मिनी और आण्डाल के साथ।
- नित्य पुष्करिणी – मंदिर के सामने का विशाल सरोवर।
- मुनियोदरन पोंगल – हर रात अंतिम पूजा में चढ़ाया जाने वाला पारंपरिक प्रसाद।
- राजगोपुरम – सात-स्तरीय प्रवेश गोपुरम।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: नन्नीलम और तिरुवारूर से सड़क मार्ग; नागपट्टिनम ज़िले में, तिरुवारूर–नागपट्टिनम क्षेत्र के बीच।
- रेल मार्ग: निकटतम बड़े स्टेशन तिरुवारूर जंक्शन और नागपट्टिनम।
- हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 140 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सौरिराज पेरुमाल नाम क्यों पड़ा?
तिरुकण्णपुरम की स्तुति किन आऴ्वारों ने की?
मुनियोदरन पोंगल क्या है?
मंदिर का मुख्य उत्सव कब होता है?
तिरुकण्णपुरम कैसे पहुँचें?
श्री सौरिराज पेरुमाल (नीलमेघ पेरुमाल) मंदिर, तिरुकण्णपुरम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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