आदि जगन्नाथ पेरुमाल मंदिर तमिलनाडु के रामनाथपुरम ज़िले में तिरुप्पुल्लाणि गाँव में स्थित है, जो रामनाथपुरम से लगभग 10 किमी और रामेश्वरम से लगभग 64 किमी दूर है। यह भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशमों में से एक है। यहाँ भगवान आदि जगन्नाथ श्रीदेवी और भूदेवी के साथ बैठी मुद्रा में विराजते हैं, देवी लक्ष्मी पद्मासनी तायार की अलग सन्निधि है, और भगवान राम दर्भशयन राम के रूप में कुश घास पर लेटे हुए पूजे जाते हैं।
स्थल पुराण – दर्भशयनम
रामायण के अनुसार लंका जाने से पहले भगवान राम ने समुद्र देव से मार्ग माँगने के लिए समुद्र तट पर दर्भ (कुश) घास बिछाकर तपस्या की थी। इस प्रसंग को दर्भशयनम कहा जाता है, और मान्यता है कि यह तपस्या इसी स्थान पर हुई। गाँव का नाम भी “पुल्” (घास) से जुड़ा माना जाता है, जिसे राम ने तकिए की तरह उपयोग किया था। मंदिर में पट्टाभि राम की सन्निधि भी है। एक अन्य कथा राजा दशरथ के पुत्रकामेष्टि यज्ञ के पायसम को इस मंदिर से जोड़ती है, जिससे उनके चार पुत्रों का जन्म हुआ।
मंदिर और संतान-प्राप्ति की मान्यता
मंदिर द्रविड़ शैली में बना है, जिसका पाँच तलों वाला राजगोपुरम पूर्व की ओर है। मंदिर का सरोवर चक्र तीर्थ कहलाता है। मान्यता है कि मंदिर का आरंभ मध्यकालीन चोल काल में हुआ, और बाद में पांड्य, विजयनगर, मदुरै नायक और रामनाड के सेतुपति शासकों ने इसमें योगदान दिया। दशरथ की कथा के कारण संतान की कामना करने वाले दंपति यहाँ नाग प्रतिष्ठा करते हैं और उन्हें पायसम का प्रसाद दिया जाता है।
आलवार और दिव्य प्रबंधम
नालायिर दिव्य प्रबंधम में तिरुमंगै आऴ्वार ने अपनी पेरिय तिरुमोऴि में इस दिव्य देशम की स्तुति की है।
प्रमुख उत्सव
- पंगुनि ब्रह्मोत्सवम (मार्च-अप्रैल): आदि जगन्नाथ का मुख्य उत्सव।
- राम नवमी उत्सवम (चित्तिरै): भगवान राम का उत्सव।
- वैकुंठ एकादशी और कृष्ण जयंती
आसपास के दर्शन
तिरुप्पुल्लाणि के पास ही समुद्र तट पर सेतु करै है – मान्यता है कि यहीं से राम सेतु का आरंभ हुआ था। रामेश्वरम के रामनाथस्वामी मंदिर की यात्रा के साथ तिरुप्पुल्लाणि के दर्शन आसानी से किए जा सकते हैं।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 7:00 से दोपहर 12:30 बजे तक
- शाम: लगभग 3:30 से रात 8:30 बजे तक
त्योहारों पर समय बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- आदि जगन्नाथ सन्निधि – बैठी मुद्रा में भगवान विष्णु।
- दर्भशयन राम – कुश घास पर लेटे भगवान राम।
- पद्मासनी तायार सन्निधि।
- चक्र तीर्थ – मंदिर सरोवर।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: रामनाथपुरम से लगभग 10 किमी; रामेश्वरम से लगभग 64 किमी।
- रेल मार्ग: रामनाथपुरम रेलवे स्टेशन।
- हवाई मार्ग: मदुरै हवाई अड्डा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तिरुप्पुल्लाणि मंदिर कहाँ है?
दर्भशयनम क्या है?
संतान-प्राप्ति के लिए यहाँ क्या किया जाता है?
किस आलवार ने तिरुप्पुल्लाणि की स्तुति की है?
यहाँ के प्रमुख उत्सव कौन से हैं?
आदि जगन्नाथ पेरुमाल मंदिर, तिरुप्पुल्लाणि इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
कन्याकुमारी, तमिलनाडु आदिकेशव पेरुमाळ मंदिर, तिरुवट्टार भगवान आदिकेशव पेरुमाळ (शयन मुद्रा), देवी मरगतवल्ली थायार
-
मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री गोपालकृष्ण पेरुमाल मंदिर, तिरुक्कावळम्पाडि (तिरुनांगूर) भगवान गोपालकृष्ण (रुक्मिणी और सत्यभामा सहित), देवी सेंकमल नाच्चियार
-
मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री नाण्मदिय पेरुमाल मंदिर, तलैच्चंगाडु (तिरुतलैच्चंग नाण्मदियम) भगवान श्री नाण्मदिय पेरुमाल (चन्द्रशापहर पेरुमाल), देवी तलैच्चंग नाच्चियार
-
कुंभकोणम, तमिलनाडु श्री सारनाथन पेरुमाल मंदिर, तिरुच्चेरै भगवान श्री सारनाथ पेरुमाल, देवी सारनायकी थायार
-
कांचीपुरम, तमिलनाडु श्री वैकुण्ठ पेरुमाळ मंदिर (तिरु परमेश्वर विण्णगरम), कांचीपुरम भगवान श्री वैकुण्ठनाथ (परमपदनाथ), देवी वैकुण्ठवल्ली थायार
-
मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री अमृतघटेश्वरर-अभिरामी मंदिर, तिरुक्कडैयूर भगवान शिव (अमृतघटेश्वरर, कालसंहारमूर्ति), देवी अभिरामी