सौम्य नारायण पेरुमाल मंदिर तमिलनाडु के शिवगंगा ज़िले में तिरुक्कोष्टियूर गाँव में स्थित है, जो तिरुप्पत्तूर से लगभग 10 किमी दूर है। यह भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशमों में से एक है। गर्भगृह में भगवान उरगमेल्लणैयान शेषशय्या पर शयन मुद्रा में श्रीदेवी-भूदेवी के साथ विराजते हैं, उत्सव मूर्ति सौम्य नारायण की है, और देवी लक्ष्मी तिरुमामगळ के नाम से पूजी जाती हैं। यह मंदिर श्री रामानुजाचार्य के जीवन की एक प्रसिद्ध घटना के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
स्थल पुराण
कथा के अनुसार ब्रह्मा से वरदान पाकर असुरराज हिरण्यकशिपु देवताओं को सताने लगा। देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की, और जब भगवान नरसिंह अवतार लेने वाले थे, तब देवताओं ने उस रूप के दर्शन पहले ही करने की इच्छा जताई। यहाँ भगवान ने देवताओं और ऋषियों को खड़ी, बैठी और शयन – तीन मुद्राओं में दर्शन दिए। मंदिर में नरसिंह की दो आदमक़द मूर्तियाँ हैं – एक में वे हिरण्यकशिपु को पकड़े हुए हैं और दूसरी में उसका वध कर रहे हैं।
रामानुज और अष्टाक्षर मंत्र
रामानुजाचार्य के गुरु तिरुक्कोष्टियूर नम्बि ने उन्हें यहीं अष्टाक्षर मंत्र (“ओम नमो नारायणाय”) का उपदेश दिया और इसे गुप्त रखने को कहा। पर रामानुज ने मंदिर के ऊपर चढ़कर सभी लोगों को यह मंत्र सुना दिया, ताकि सबका कल्याण हो। उनकी करुणा देखकर नम्बि ने उन्हें “एम्पेरुमानार” कहा। मंदिर के अष्टांग मंडप में रामानुज की आदमक़द मूर्ति है।
अष्टांग विमान और आलवार
मंदिर का गर्भगृह शिखर आठ अंगों वाला अष्टांग विमान है, जो लगभग 25 मीटर ऊँचा है और पाँच तलों वाले राजगोपुरम से भी ऊँचा है। ऐसा विमान बहुत कम मंदिरों में है – मदुरै का कूडल अऴगर मंदिर भी इनमें से एक है। मंदिर तेन्कलै परंपरा और वैखानस आगम का पालन करता है। नालायिर दिव्य प्रबंधम में पेरियाऴ्वार, तिरुमऴिसै आऴ्वार, भूतत्ताऴ्वार और पेयाऴ्वार सहित आलवारों ने इस दिव्य देशम की स्तुति की है।
प्रमुख उत्सव
- मासि तेप्पोत्सवम (फ़रवरी-मार्च): मंदिर के सामने के सरोवर में नौका (तेप्पम) उत्सव – यहाँ का सबसे प्रसिद्ध उत्सव।
- नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर)
- वैकुंठ एकादशी (दिसंबर-जनवरी)
यात्रा सुझाव
तिरुक्कोष्टियूर तक तिरुप्पत्तूर या कारैक्कुडि से सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है। इसी क्षेत्र में मदुरै के दिव्य देशम और पुदुक्कोट्टै ज़िले का तिरुमयम सत्यमूर्ति पेरुमाल मंदिर भी हैं, जिन्हें एक यात्रा में जोड़ा जा सकता है।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक
त्योहारों पर समय बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- अष्टांग विमान – राजगोपुरम से भी ऊँचा आठ अंगों वाला शिखर।
- रामानुज की आदमक़द मूर्ति – अष्टांग मंडप में।
- नरसिंह की दो मूर्तियाँ – हिरण्यकशिपु को पकड़े और वध करते हुए।
- मंदिर सरोवर – जहाँ मासि मास में तेप्पोत्सवम होता है।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: तिरुप्पत्तूर (शिवगंगा) से लगभग 10 किमी; कारैक्कुडि से लगभग 25-35 किमी।
- रेल मार्ग: कारैक्कुडि जंक्शन निकटतम बड़ा स्टेशन।
- हवाई मार्ग: मदुरै हवाई अड्डा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तिरुक्कोष्टियूर मंदिर किस लिए प्रसिद्ध है?
रामानुज को 'एम्पेरुमानार' क्यों कहा गया?
अष्टांग विमान क्या है?
किन आलवारों ने इस मंदिर की स्तुति की है?
तिरुक्कोष्टियूर कैसे पहुँचें?
सौम्य नारायण पेरुमाल मंदिर, तिरुक्कोष्टियूर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
कांचीपुरम, तमिलनाडु श्री आदि वराह पेरुमाळ सन्निधि (तिरुक्कळ्वनूर), कांचीपुरम भगवान श्री आदि वराह पेरुमाळ, देवी अंजिलैवल्ली नाच्चियार
-
तंजावुर, तमिलनाडु गजेन्द्र वरद पेरुमाल मंदिर, कपिस्थलम (तिरुक्कवित्तलम) भगवान गजेन्द्र वरद पेरुमाल, देवी रमामणिवल्ली थायार
-
तूतुकुड़ी, तमिलनाडु श्री मायक्कूत्तर (श्रीनिवास) पेरुमाळ मंदिर, तिरुक्कुळन्दै (पेरुंगुलम) भगवान श्रीनिवास (मायक्कूत्तर); देवी अलर्मेलमंगै, कुळन्दैवल्ली
-
मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री पुरुषोत्तम पेरुमाल मंदिर, तिरुवण्पुरुषोत्तमम (तिरुनांगूर) भगवान पुरुषोत्तम पेरुमाल, देवी पुरुषोत्तम नायकी थायार
-
कांचीपुरम, तमिलनाडु श्री वैकुण्ठ पेरुमाळ मंदिर (तिरु परमेश्वर विण्णगरम), कांचीपुरम भगवान श्री वैकुण्ठनाथ (परमपदनाथ), देवी वैकुण्ठवल्ली थायार
-
मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु श्री अमृतघटेश्वरर-अभिरामी मंदिर, तिरुक्कडैयूर भगवान शिव (अमृतघटेश्वरर, कालसंहारमूर्ति), देवी अभिरामी