अप्पक्कुडत्तान पेरुमाल मंदिर तंजावुर ज़िले के गाँव कोविलडि में कावेरी नदी के तट पर स्थित है। दिव्य प्रबंधम में इस स्थान को तिरुप्पेर नगर कहा गया है। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है और कावेरी तट के पाँच रंगनाथ मंदिरों – पंचरंग क्षेत्रों – में भी गिना जाता है, जहाँ भगवान को अप्पाल रंगन कहते हैं। देवी लक्ष्मी यहाँ कमलवल्ली थायार के नाम से पूजी जाती हैं।
अप्पम के घड़े की कथा
स्थल पुराण के अनुसार राजा उपमन्यु दुर्वासा ऋषि के शाप से अपनी शक्ति खो बैठे। उन्हें उपाय बताया गया कि वे रोज़ एक लाख लोगों को भोजन कराएँ। एक दिन भगवान विष्णु एक वृद्ध के रूप में आए, सबका भोजन स्वयं खा गए और फिर राजा से नेय्यप्पम (घी के अप्पम) का एक घड़ा माँगा। राजा ने घड़ा दिया और तब पहचाना कि वृद्ध स्वयं भगवान हैं – और वे शाप से मुक्त हो गए। इसी से भगवान अप्पक्कुडत्तान – “अप्पम के घड़े वाले” – कहलाए। मान्यता है कि ऋषि मार्कण्डेय को भी यहीं यम के भय से मुक्ति मिली थी।
मंदिर और विग्रह
मंदिर एक ऊँचे चबूतरे पर बना है, जहाँ 21 सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचते हैं। पश्चिम की ओर तीन तल का राजगोपुरम है। गर्भगृह में भगवान भुजंग शयन मुद्रा में पश्चिम की ओर मुख किए लेटे हैं और उनके दाहिने हाथ में अप्पम का घड़ा है; पास में उपमन्यु और दुर्वासा के विग्रह भी हैं। यह एकमात्र दिव्य देशम माना जाता है जहाँ हर रात भगवान को नेय्यप्पम का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। मंदिर में चोल काल के शिलालेख मिलते हैं।
आऴ्वार और दिव्य प्रबंधम
इस दिव्य देशम की स्तुति चार आऴ्वारों – पेरियाऴ्वार, तिरुमंगै आऴ्वार, तिरुमऴिसै आऴ्वार और नम्माऴ्वार – ने की है। नम्माऴ्वार ने इसे वेदज्ञ विद्वानों का निवास बताया है। परंपरा के अनुसार इसे मोक्ष स्थल माना जाता है और यह पेरियाऴ्वार से जुड़ा है।
प्रमुख उत्सव
- पंगुनि ब्रह्मोत्सव: 13 दिन का उत्सव, जिसमें रथोत्सव सबसे प्रमुख है।
- कैशिक द्वादशी (कार्तिकै) और मासी मघम पर कावेरी में तीर्थवारी।
- वैकुंठ एकादशी, नम्माऴ्वार मोक्ष, नवरात्रि और उरि अडि (मटकी उत्सव)।
आसपास के दर्शन
नदी के उस पार अन्बिल का सुन्दरराज पेरुमाल मंदिर एक और दिव्य देशम है, और ऐतिहासिक कल्लणै (ग्रैंड एनीकट) भी इसी मार्ग पर है। तिरुचिरापल्ली से एक दिन की यात्रा में अन्बिल और कोविलडि दोनों के दर्शन आराम से हो जाते हैं।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 8:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
- शाम: लगभग 5:00 से रात 8:00 बजे तक
मुख्य आकर्षण
- अप्पक्कुडत्तान पेरुमाल – भुजंग शयन मुद्रा में, पश्चिममुखी, दाहिने हाथ में अप्पम का घड़ा।
- नेय्यप्पम नैवेद्य – हर रात भगवान को घी के अप्पम का भोग।
- पंचरंग क्षेत्र – कावेरी तट के पाँच रंगनाथ मंदिरों में से एक।
- 21 सीढ़ियाँ चढ़कर ऊँचे चबूतरे पर स्थित गर्भगृह।
- कावेरी नदी का किनारा।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: तिरुचिरापल्ली से कल्लणै (ग्रैंड एनीकट) होकर पूर्व की ओर लगभग 25-30 किमी; तंजावुर से भी सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है।
- रेल मार्ग: तिरुचिरापल्ली जंक्शन या तंजावुर जंक्शन।
- हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अप्पक्कुडत्तान नाम का क्या अर्थ है?
पंचरंग क्षेत्र कौन-से हैं?
क्या यहाँ रोज़ अप्पम का भोग लगता है?
किन आऴ्वारों ने कोविलडि की स्तुति की है?
कोविलडि नाम कैसे पड़ा?
अप्पक्कुडत्तान पेरुमाल मंदिर, कोविलडि (तिरुप्पेर नगर) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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