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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

तंजै मामणि कोविल (श्री नीलमेघ पेरुमाल मंदिर), तंजावुर

Thanjai Mamani Koil (Sri Neelamegha Perumal Temple), Thanjavur

तंजावुर, तमिलनाडु भगवान श्री नीलमेघ पेरुमाल, देवी सेंकमलवल्ली थायार; साथ में मणिकुन्ड्र पेरुमाल और वीर नरसिंह पेरुमाल निःशुल्क प्रवेश

तंजै मामणि कोविल तमिलनाडु के ऐतिहासिक नगर तंजावुर में वेण्णारु नदी के तट पर स्थित भगवान विष्णु का दिव्य देशम है। यह 108 दिव्य देशमों में अनोखा है, क्योंकि एक ही दिव्य देशम में तीन निकटवर्ती मंदिर शामिल हैं – नीलमेघ पेरुमाल (मामणि कोविल), मणिकुन्ड्र पेरुमाल और तंजैयाळि नगर के वीर नरसिंह पेरुमाल। आऴ्वारों के पाशुरमों में तीनों का एक साथ ‘तंजै’ नाम से उल्लेख होता है। परंपरा के अनुसार इसकी स्तुति तिरुमंगै आऴ्वार, भूतत्ताऴ्वार और नम्माऴ्वार ने की है।

स्थल पुराण: तंजावुर का नाम

ब्रह्मांड पुराण से जुड़ी कथा के अनुसार त्रेता युग में तंजकन, तण्डकन और गजमुखन नाम के तीन असुर शिव के वरदान से बलवान होकर पराशर ऋषि की तपस्या में बाधा डालने लगे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से तंजकन का वध किया। मरते समय तंजकन ने प्रार्थना की कि यह स्थान उसके नाम से जाना जाए – इसी से नगर का नाम तंजावुर पड़ा। गजमुखन का वध भगवान ने याळि रूप में और तण्डकन का वध वराह रूप में किया, जो भागकर श्रीमुष्णम तक गया था।

तीन मंदिर

  • नीलमेघ पेरुमाल (मामणि कोविल): तीन-स्तरीय राजगोपुरम, बैठी मुद्रा में मूलवर और सेंकमलवल्ली थायार का अलग सन्निधि; अमृत तीर्थ इसका सरोवर है।
  • मणिकुन्ड्र पेरुमाल: ऊँचे चबूतरे पर छोटा पूर्वमुखी मंदिर, अम्बुजवल्ली थायार का सन्निधि; राम तीर्थ से जुड़ा।
  • तंजैयाळि नगर (वीर नरसिंह): मार्कंडेय ऋषि को दर्शन देते बैठे नरसिंह; वेदसुन्दर विमान और सूर्य पुष्करिणी।

मंदिर का प्रबंधन

ये मंदिर चोल, विजयनगर और नायक काल से जुड़े माने जाते हैं। आज इनका प्रबंधन तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग और तंजावुर पैलेस देवस्थानम मिलकर करते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • गरुड़ सेवै (वैकासि मास): तंजावुर के 18 विष्णु मंदिरों के उत्सव मूर्तियाँ गरुड़ वाहन पर एक साथ दर्शन देती हैं।
  • वैकुंठ एकादशी पर विशेष पूजा।

आसपास के दर्शन

तंजावुर में यूनेस्को विश्व धरोहर बृहदीश्वर मंदिर, तंजावुर महल और सरस्वती महल पुस्तकालय देखे जा सकते हैं। कुंभकोणम के दिव्य देशम लगभग 40 किमी दूर हैं।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 7:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 5:00 से रात 8:30 बजे तक
  • नोट: समय उत्सवों के दिनों में बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • नीलमेघ पेरुमाल मंदिर (मामणि कोविल) – बैठी (वीट्रिरुन्द) मुद्रा में मूलवर, सेंकमलवल्ली थायार का अलग सन्निधि।
  • मणिकुन्ड्रम – ऊँचे चबूतरे पर बना छोटा पूर्वमुखी मंदिर।
  • तंजैयाळि नगर – वीर नरसिंह पेरुमाल, मार्कंडेय ऋषि को दर्शन देते हुए।
  • गरुड़ सेवै – वैकासि मास में 18 मंदिरों के गरुड़ वाहनों का एक साथ दर्शन।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: तंजावुर शहर के उत्तरी भाग में, वेण्णारु नदी के तट पर; शहर के बस स्टैंड से ऑटो या टैक्सी।
  • रेल मार्ग: तंजावुर जंक्शन – चेन्नई, त्रिची और कुंभकोणम से ट्रेनें।
  • हवाई मार्ग: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 60 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तंजै मामणि कोविल में कितने मंदिर हैं?
इस एक दिव्य देशम में तीन निकटवर्ती मंदिर हैं – नीलमेघ पेरुमाल (मामणि कोविल), मणिकुन्ड्र पेरुमाल और तंजैयाळि नगर के वीर नरसिंह पेरुमाल।
तंजावुर का नाम कैसे पड़ा?
स्थल पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने यहाँ तंजकन असुर का वध किया, और उसकी अंतिम प्रार्थना पर यह स्थान उसके नाम से तंजावुर कहलाया।
इस दिव्य देशम की स्तुति किन आऴ्वारों ने की?
परंपरा के अनुसार तिरुमंगै आऴ्वार, भूतत्ताऴ्वार और नम्माऴ्वार ने तंजै की स्तुति की है।
तंजावुर की गरुड़ सेवै क्या है?
वैकासि मास में तंजावुर के 18 विष्णु मंदिरों की उत्सव मूर्तियाँ गरुड़ वाहनों पर एक साथ भक्तों को दर्शन देती हैं।
तंजै मामणि कोविल कैसे पहुँचें?
यह तंजावुर शहर में वेण्णारु नदी के तट पर है। तंजावुर जंक्शन रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से ऑटो या टैक्सी से पहुँचा जा सकता है।

तंजै मामणि कोविल (श्री नीलमेघ पेरुमाल मंदिर), तंजावुर इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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