मार्गशीर्ष मास, जिसे बोलचाल में अगहन का महीना भी कहते हैं, हिंदू पंचांग का नौवाँ महीना है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है – “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्”, यानी सभी महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ। इसी कारण यह महीना भगवान कृष्ण और विष्णु की भक्ति के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसी महीने में गीता जयंती, विवाह पंचमी, काल भैरव जयंती और दत्तात्रेय जयंती जैसे बड़े पर्व आते हैं। इस लेख में जानिए मार्गशीर्ष मास 2026 कब से कब तक है, इसका महत्व, पूरे महीने के व्रत-त्योहार, क्या करें, क्या न करें और खरमास से जुड़ी ज़रूरी बातें।
मार्गशीर्ष मास 2026 कब से कब तक है?
उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास कार्तिक पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होकर मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर पूरा होता है। साल 2026 में:
- मार्गशीर्ष मास शुरू: बुधवार, 25 नवंबर 2026 (कृष्ण प्रतिपदा)
- मार्गशीर्ष अमावस्या: मंगलवार, 8 दिसंबर 2026
- मार्गशीर्ष पूर्णिमा और मास समाप्त: बुधवार, 23 दिसंबर 2026
- पौष मास शुरू: गुरुवार, 24 दिसंबर 2026
गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में प्रचलित अमांत पंचांग में महीना अमावस्या के बाद शुरू होता है, इसलिए वहाँ मार्गशीर्ष 9 दिसंबर 2026 से गिना जाता है। व्रत-त्योहारों की तिथियाँ दोनों पंचांगों में एक ही रहती हैं, केवल महीने का नाम बदलता है।
मार्गशीर्ष नाम कैसे पड़ा?
हिंदू महीनों के नाम उस नक्षत्र पर रखे गए हैं, जिसमें उस महीने की पूर्णिमा का चंद्रमा होता है। इस महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा मृगशिरा नक्षत्र में रहता है, इसलिए इसे “मार्गशीर्ष” कहा गया। “अगहन” शब्द “अग्रहायण” से बना है, जिसका अर्थ है वर्ष का पहला या अग्रणी महीना – प्राचीन काल में कुछ परंपराओं में साल की शुरुआत इसी महीने से मानी जाती थी।
मार्गशीर्ष मास का महत्व
- श्रीकृष्ण का प्रिय महीना: गीता के दसवें अध्याय में भगवान ने अपनी विभूतियाँ बताते हुए इस महीने को अपना स्वरूप कहा है।
- गीता का प्राकट्य: इसी महीने की शुक्ल एकादशी को कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश दिया गया था।
- पवित्र स्नान: मान्यता है कि इस महीने यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से विशेष पुण्य मिलता है।
- मौसम और साधना: हल्की ठंड वाला यह समय जप, ध्यान और पाठ के लिए सबसे अनुकूल माना गया है।
मार्गशीर्ष से जुड़ी पौराणिक परंपराएँ
श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध में वर्णन है कि हेमंत ऋतु के पहले महीने, यानी मार्गशीर्ष में, ब्रज की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए पूरे महीने कात्यायनी देवी का व्रत किया था। वे रोज़ भोर में यमुना में स्नान करतीं, रेत से देवी की प्रतिमा बनाकर पूजा करतीं और केवल हविष्य (सात्विक) भोजन लेती थीं। इसी कथा के कारण अविवाहित कन्याएँ आज भी इस महीने अच्छे वर की कामना से व्रत रखती हैं।
दक्षिण भारत में यह महीना “मार्गली” कहलाता है। तमिलनाडु में इस पूरे महीने भोर में घरों के आगे सुंदर कोलम (रंगोली) बनाए जाते हैं और मंदिरों में संत आंडाल द्वारा रचित तिरुप्पावै के पद गाए जाते हैं। आंध्र और कर्नाटक में भी इस महीने सुबह-सुबह भजन और नगर संकीर्तन की परंपरा है। उत्तर से दक्षिण तक, पूरा देश इस महीने को भक्ति के उत्सव की तरह मनाता है।
मार्गशीर्ष मास 2026 के व्रत और त्योहार
नीचे इस महीने के मुख्य व्रत-त्योहार दिए गए हैं (तिथियाँ पंचांग गणना के अनुसार):
| तारीख | व्रत / त्योहार |
|---|---|
| 27 नवंबर (शुक्रवार) | संकष्टी चतुर्थी |
| 1 दिसंबर (मंगलवार) | काल भैरव जयंती (कालाष्टमी) |
| 4 दिसंबर (शुक्रवार) | उत्पन्ना एकादशी |
| 6 दिसंबर (रविवार) | प्रदोष व्रत |
| 7 दिसंबर (सोमवार) | मासिक शिवरात्रि |
| 8 दिसंबर (मंगलवार) | मार्गशीर्ष अमावस्या |
| 13 दिसंबर (रविवार) | विनायक चतुर्थी |
| 14 दिसंबर (सोमवार) | विवाह पंचमी |
| 15 दिसंबर (मंगलवार) | चंपा षष्ठी |
| 16 दिसंबर (बुधवार) | धनु संक्रांति – खरमास शुरू |
| 20 दिसंबर (रविवार) | गीता जयंती, मोक्षदा एकादशी |
| 21 दिसंबर (सोमवार) | सोम प्रदोष व्रत |
| 23 दिसंबर (बुधवार) | मार्गशीर्ष पूर्णिमा, दत्तात्रेय जयंती, अन्नपूर्णा जयंती |
पूरे महीने की सूची हर दिन के पंचांग के साथ मार्गशीर्ष माह के व्रत-त्योहार पेज पर देखें।
मार्गशीर्ष मास में क्या करें
- श्रीकृष्ण की पूजा: रोज़ सुबह भगवान कृष्ण को तुलसी दल, माखन-मिश्री का भोग लगाएँ और श्री कृष्ण आरती करें।
- गीता पाठ: पूरे महीने रोज़ गीता का एक अध्याय या कम से कम कुछ श्लोक पढ़ें।
- शंख पूजा: इस महीने शंख की पूजा और शंख से भगवान का अभिषेक करना शुभ माना जाता है।
- विष्णु सहस्रनाम: गुरुवार और एकादशी को विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु के 108 नाम का पाठ करें।
- तुलसी पूजा: शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाएँ।
- दान: ठंड का मौसम होने से कंबल, गर्म कपड़े और अन्न का दान विशेष पुण्य देता है।
मार्गशीर्ष में स्नान, दान और पाठ
पुराणों में मार्गशीर्ष के स्नान को कार्तिक स्नान जितना ही पुण्यदायी बताया गया है। जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल और तुलसी दल डालकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें। ठंड बढ़ने के कारण इस महीने गर्म कपड़े, कंबल, गुड़, तिल और अन्न का दान सबसे उपयोगी और पुण्यदायी माना गया है। पाठ के लिए पूरे महीने रोज़ गीता का एक अध्याय, गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम और एकादशी को श्री कृष्ण चालीसा पढ़ना बहुत शुभ है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा और दत्तात्रेय जयंती
महीने का अंत मार्गशीर्ष पूर्णिमा (23 दिसंबर 2026) से होता है, जो अपने आप में एक बड़ा पर्व है। इस दिन भगवान दत्तात्रेय की जयंती मनाई जाती है, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश – तीनों का संयुक्त अवतार माना जाता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में दत्त मंदिरों में इस दिन विशेष उत्सव होता है। इसी दिन माँ अन्नपूर्णा की जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए घर की रसोई साफ़ करके अन्नपूर्णा पूजा और अन्न दान की परंपरा है। पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा, पवित्र स्नान और चंद्र अर्घ्य करें। अधिक जानकारी के लिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा पेज देखें।
मार्गशीर्ष मास में क्या न करें
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें।
- लोक-मान्यता के अनुसार इस महीने जीरे का सेवन कम करने की परंपरा है।
- किसी का अपमान, झूठ और विवाद से बचें – यह साधना का महीना है।
- 16 दिसंबर से खरमास लगने के बाद विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक काम न करें।
खरमास 2026 – 16 दिसंबर से
जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, तब से मकर संक्रांति तक के समय को खरमास या धनुर्मास कहते हैं। 2026 में धनु संक्रांति 16 दिसंबर को है, इसलिए मार्गशीर्ष के आख़िरी हफ़्ते से खरमास शुरू हो जाएगा और जनवरी 2027 में मकर संक्रांति पर समाप्त होगा। इस दौरान विवाह और दूसरे मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते, लेकिन पूजा-पाठ, दान और तीर्थ यात्रा के लिए यह समय बहुत शुभ है। जिन्हें इस साल शादी करनी है, उन्हें 16 दिसंबर से पहले का मुहूर्त देखना चाहिए।
मार्गशीर्ष गुरुवार व्रत
महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों में मार्गशीर्ष महीने के हर गुरुवार को माँ महालक्ष्मी का व्रत रखा जाता है, जिसे “मार्गशीर्ष गुरुवार व्रत” कहते हैं। इस दिन महिलाएँ कलश में माँ लक्ष्मी की स्थापना करती हैं, व्रत कथा पढ़ती हैं और आख़िरी गुरुवार को उद्यापन करके सुहागिनों को हल्दी-कुमकुम देती हैं। मान्यता है कि इससे घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
निष्कर्ष
मार्गशीर्ष मास भक्ति, ज्ञान और दान का महीना है। 25 नवंबर से 23 दिसंबर 2026 तक रोज़ थोड़ा समय श्रीकृष्ण की पूजा और गीता पाठ के लिए निकालें, महीने के बड़े पर्वों पर व्रत रखें और ज़रूरतमंदों की मदद करें। अगर पूरे महीने नियम निभाना कठिन लगे, तो कम से कम हर गुरुवार और दोनों एकादशियों पर श्रीकृष्ण की पूजा और गीता पाठ ज़रूर करें – यही इस पवित्र महीने का सार है। भगवान कृष्ण की सभी आरती, चालीसा और मंत्र एक जगह भगवान कृष्ण के पेज पर देखें, और रोज़ का शुभ समय जानने के लिए आज का पंचांग देखते रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मार्गशीर्ष मास 2026 कब से कब तक है?
मार्गशीर्ष मास को अगहन क्यों कहते हैं?
मार्गशीर्ष मास में किस भगवान की पूजा करें?
खरमास 2026 कब से शुरू है?
मार्गशीर्ष मास के मुख्य त्योहार कौन से हैं?
लेखक
भक्तिरस टीम
भक्तिरस टीम – व्रत, त्योहार, पूजा विधि और धार्मिक कथाओं की प्रामाणिक जानकारी, शास्त्रों और पंचांग के आधार पर।