श्री अर्धगिरि वीरांजनेय स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के तवनमपल्ले मंडल में अरगोंडा गाँव के पास एक पहाड़ी पर स्थित हनुमान जी का मंदिर है। इस पहाड़ी को अर्धगिरि – “आधा पर्वत” – कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि यह संजीवनी पर्वत का वह भाग है जो हनुमान जी के हाथ से यहाँ गिर गया था। काणिपाकम के विनायक दर्शन के साथ बहुत से भक्त अर्धगिरि भी आते हैं।
संजीवनी पर्वत की कथा
रामायण के अनुसार युद्ध में लक्ष्मण जी के मूर्च्छित होने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी के लिए द्रोणगिरि पर्वत ही उठा लाए थे। स्थानीय कथा कहती है कि रात में आकाश मार्ग से जाते समय पर्वत का आधा भाग इस स्थान पर गिर पड़ा – इसी से पहाड़ी का नाम अर्धगिरि पड़ा। एक अन्य मान्यता है कि हनुमान जी ने पर्वत लेकर जाते हुए इस पहाड़ी पर विश्राम किया था। इसके बाद से यहाँ हनुमान जी की वीरांजनेय रूप में पूजा होने लगी।
संजीवराय पुष्करिणी
मंदिर के पास संजीवराय पुष्करिणी नाम का जलाशय है। भक्तों की मान्यता है कि इसके जल में संजीवनी पर्वत की औषधियों का प्रभाव है और यह कभी नहीं सूखता। लोग दूर-दूर से यह जल ले जाने आते हैं। पहाड़ी की मिट्टी को भी लोक मान्यता में त्वचा रोगों में लाभकारी माना जाता है। ये आस्था से जुड़ी बातें हैं, चिकित्सा का विकल्प नहीं।
पूर्णिमा दर्शन
अर्धगिरि में हर पूर्णिमा पर भारी भीड़ होती है और मंदिर रात देर तक खुला रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कभी हर पूर्णिमा पर 25,000 से 30,000 तक भक्त आते थे। हाल में मुख्यमंत्री द्वारा मंदिर के रामायण संबंध का उल्लेख किए जाने के बाद यहाँ भक्तों की संख्या फिर बढ़ी है।
यात्रा
अर्धगिरि काणिपाकम से लगभग 15 किमी और चित्तूर से लगभग 25 किमी दूर है। यहाँ सुविधाएँ सीमित हैं, इसलिए आवास और भोजन के लिए चित्तूर या काणिपाकम बेहतर हैं। तिरुपति से आने वाले यात्री काणिपाकम और अर्धगिरि को एक ही दिन में जोड़ सकते हैं।
दर्शन का समय
- सामान्य दिन: लगभग सुबह 5:00–6:00 से रात 8:00–9:00 बजे तक (दोपहर में अल्प विराम संभव)
- पूर्णिमा: रात देर तक दर्शन।
मुख्य आकर्षण
- वीरांजनेय स्वामी – अर्धगिरि पहाड़ी पर हनुमान जी।
- संजीवराय पुष्करिणी – जिसका जल औषधीय माना जाता है।
- पूर्णिमा दर्शन – हर पूर्णिमा पर हज़ारों भक्त।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: काणिपाकम से लगभग 15 किमी, चित्तूर से लगभग 25 किमी; चित्तूर–अरगोंडा मार्ग से।
- रेल मार्ग: चित्तूर रेलवे स्टेशन, फिर सड़क से।
- हवाई मार्ग: तिरुपति हवाई अड्डा (रेणिगुंटा)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अर्धगिरि नाम का क्या अर्थ है?
अर्धगिरि की पुष्करिणी का क्या महत्व है?
अर्धगिरि में पूर्णिमा का क्या महत्व है?
काणिपाकम से अर्धगिरि कितनी दूर है?
अर्धगिरि मंदिर किसने बनवाया?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, नारायणवनम भगवान श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी, देवी पद्मावती
-
तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री सिद्धेश्वर स्वामी मंदिर, तलकोना भगवान शिव (श्री सिद्धेश्वर स्वामी)
-
श्रीकालहस्ती, आंध्र प्रदेश श्रीकालहस्तीश्वर मंदिर, श्रीकालहस्ती भगवान शिव (श्रीकालहस्तीश्वर) – वायु लिंगम; देवी ज्ञानप्रसूनाम्बा
-
तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, श्रीनिवासमंगापुरम भगवान श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी (चतुर्भुज, पूर्वमुखी)
-
Kakinada, आंध्र प्रदेश श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी मंदिर, तोलि तिरुपति (चदलाड) श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी (भगवान वेंकटेश्वर का स्वरूप), श्रीदेवी और भूदेवी सहित
-
तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी), तिरुमला भगवान श्री वेंकटेश्वर (बालाजी / श्रीनिवास)