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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्रीकालहस्तीश्वर मंदिर, श्रीकालहस्ती

Srikalahasteeswara Temple, Srikalahasti

श्रीकालहस्ती, आंध्र प्रदेश भगवान शिव (श्रीकालहस्तीश्वर) – वायु लिंगम; देवी ज्ञानप्रसूनाम्बा निःशुल्क प्रवेश

श्रीकालहस्तीश्वर मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुपति ज़िले में स्वर्णमुखी नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। यह पंचभूत स्थलों में वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और यहाँ का शिवलिंग वायु लिंगम कहलाता है। गर्भगृह में हवा का कोई रास्ता न होने पर भी शिवलिंग के पास रखे दीपक की लौ लगातार हिलती रहती है – इसे वायु रूप में शिव की उपस्थिति का प्रमाण माना जाता है। यह मंदिर राहु-केतु दोष निवारण पूजा के लिए भी देशभर में प्रसिद्ध है।

श्री-काल-हस्ती: नाम की कथा

मंदिर का नाम तीन भक्त जीवों से बना है – श्री (मकड़ी), काल (सर्प) और हस्ती (हाथी)। कथा के अनुसार ये तीनों अपने-अपने ढंग से शिवलिंग की पूजा करते थे – मकड़ी जाला बुनकर लिंगम को धूप से बचाती, सर्प मणि चढ़ाता और हाथी सूँड में पानी भरकर अभिषेक करता। एक-दूसरे की पूजा को अपवित्र समझकर तीनों में संघर्ष हुआ और तीनों ने प्राण त्याग दिए। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने तीनों को मोक्ष दिया और यह स्थान उनके नाम से श्रीकालहस्ती कहलाया। शिवलिंग पर आज भी मकड़ी, सर्प के फन और हाथी दाँत जैसे चिह्न दिखाए जाते हैं।

भक्त कन्नप्पा

श्रीकालहस्ती 63 नयनार संतों में से एक कन्नप्पा नयनार की भक्ति-भूमि है। कन्नप्पा एक शिकारी थे, जो शास्त्रीय विधि नहीं जानते थे पर पूरे मन से शिव की पूजा करते थे। एक दिन शिवलिंग की एक आँख से रक्त बहता देख उन्होंने अपनी आँख निकालकर लगा दी। जब दूसरी आँख से भी रक्त बहने लगा, तो पहचान के लिए अपना पैर लिंगम पर रखकर दूसरी आँख निकालने लगे – तभी शिव ने प्रकट होकर उन्हें रोका और उन्हें अपना परम भक्त घोषित किया। मंदिर के पास पहाड़ी पर कन्नप्पा का मंदिर है।

राहु-केतु पूजा और ग्रहण के समय खुला मंदिर

मान्यता है कि यहाँ के शिवलिंग पर नवग्रहों की शक्ति निहित है और राहु-केतु स्वयं यहाँ पूजा करते हैं। इसलिए कालसर्प दोष और राहु-केतु दोष की शांति के लिए राहु-केतु सर्प दोष निवारण पूजा मंदिर परिसर में रोज़ कई बैचों में कराई जाती है। एक और अनोखी बात यह है कि जहाँ सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय देश के लगभग सभी मंदिर बंद रहते हैं, श्रीकालहस्ती मंदिर ग्रहण के समय भी खुला रहता है और विशेष पूजा होती है।

इतिहास और वास्तुकला

मंदिर का उल्लेख तेवारम के नयनार संतों के भजनों में मिलता है और इसके कई हिस्से चोल काल में बने। बाद में विजयनगर सम्राट कृष्णदेव राय ने 16वीं शताब्दी की शुरुआत में बड़े मंडप और गोपुरम बनवाए। मंदिर पहाड़ी के तल को काटकर बना है और इसकी दक्षिण भारतीय शैली की नक्काशी दर्शनीय है। देवी पार्वती यहाँ ज्ञानप्रसूनाम्बा (ज्ञान देने वाली माँ) के रूप में पूजी जाती हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से रात 9:00 बजे तक (दोपहर में बंद नहीं होता)
  • राहु-केतु पूजा: सुबह से शाम तक कई बैचों में (टिकट मंदिर काउंटर या ऑनलाइन)
  • ग्रहण काल: सूर्य व चंद्र ग्रहण के समय भी मंदिर खुला रहता है

महाशिवरात्रि ब्रह्मोत्सवम के समय दर्शन व्यवस्था बदलती है।

मुख्य आकर्षण

  • वायु लिंगम और उसके पास लगातार हिलती दीप-लौ।
  • राहु-केतु सर्प दोष निवारण पूजा।
  • कन्नप्पा मंदिर – पास की पहाड़ी पर।
  • स्वर्णमुखी नदी का घाट।
  • तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर (लगभग 36 किमी तिरुपति) – अधिकांश यात्री दोनों के दर्शन साथ करते हैं।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: तिरुपति से लगभग 36 किमी – APSRTC बसें हर कुछ मिनट में; चेन्नई से लगभग 115 किमी।
  • रेल मार्ग: श्रीकालहस्ती रेलवे स्टेशन (लगभग 3 किमी); बड़ा जंक्शन रेणिगुंटा।
  • हवाई मार्ग: तिरुपति हवाई अड्डा, रेणिगुंटा (लगभग 25 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्रीकालहस्ती मंदिर किस तत्व का प्रतीक है?
श्रीकालहस्ती मंदिर पंचभूत स्थलों में वायु तत्व का प्रतीक है। गर्भगृह में हवा न होने पर भी शिवलिंग के पास दीपक की लौ हिलती रहती है।
श्रीकालहस्ती में राहु-केतु पूजा क्यों होती है?
मान्यता है कि यहाँ के शिवलिंग में नवग्रहों की शक्ति है और राहु-केतु ने स्वयं यहाँ शिव की पूजा की थी। इसलिए कालसर्प और राहु-केतु दोष की शांति के लिए यहाँ विशेष पूजा कराई जाती है।
क्या श्रीकालहस्ती मंदिर ग्रहण के समय खुला रहता है?
हाँ, यह उन गिने-चुने मंदिरों में से है जो सूर्य और चंद्र ग्रहण के समय भी खुले रहते हैं और ग्रहण काल में विशेष पूजा होती है।
श्रीकालहस्ती नाम कैसे पड़ा?
यह नाम तीन भक्त जीवों से बना है – श्री (मकड़ी), काल (सर्प) और हस्ती (हाथी), जिन्होंने यहाँ शिवलिंग की पूजा करके मोक्ष पाया।
तिरुपति से श्रीकालहस्ती कितनी दूर है?
तिरुपति से श्रीकालहस्ती लगभग 36 किमी है। बस या टैक्सी से लगभग 1 घंटा लगता है।

श्रीकालहस्तीश्वर मंदिर, श्रीकालहस्ती इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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