मंगलगिरि आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में विजयवाड़ा और गुंटूर के बीच स्थित भगवान नरसिंह का प्रसिद्ध क्षेत्र है। यहाँ एक ही पहाड़ी पर और उसके नीचे तीन नरसिंह मंदिर हैं – तलहटी में श्री लक्ष्मी नरसिंह स्वामी, पहाड़ी के बीच पानकाल नरसिंह स्वामी और चोटी पर गंडाल नरसिंह स्वामी। मंगलगिरि को भगवान विष्णु के आठ पवित्र स्थलों और नरसिंह के आठ महाक्षेत्रों में गिना जाता है।
पानकाल नरसिंह और पानक का भोग
पहाड़ी पर विराजमान पानकाल नरसिंह स्वामी स्वयंभू माने जाते हैं। यहाँ अलग से पूरी प्रतिमा नहीं, बल्कि भगवान का खुला मुख है, जिस पर धातु का मुखौटा चढ़ा रहता है। भक्त भगवान को पानक – गुड़ और पानी का शरबत – चढ़ाते हैं, जो सीधे उस मुख में डाला जाता है। मान्यता है कि भगवान लगभग आधा पानक स्वीकार करते हैं और शेष प्रसाद के रूप में लौटा देते हैं। इसी से उनका नाम “पानकाल” स्वामी पड़ा। स्थल कथाओं में इस क्षेत्र को राक्षस नमुचि के वध से भी जोड़ा जाता है।
तलहटी का मंदिर और गोपुरम
पहाड़ी के नीचे स्थित लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर द्रविड़ शैली में है। इसका राजगोपुरम लगभग 153 फुट ऊँचा, 49 फुट चौड़ा और 11 मंज़िला है, जिसे दक्षिण भारत के ऊँचे गोपुरमों में गिना जाता है। इसे अमरावती के राजा वासिरेड्डी वेंकटाद्रि नायुडु ने 1807–1809 ई. में बनवाया। मंदिर के शिलालेख तेलुगु और संस्कृत में हैं।
इतिहास
लोक मान्यता है कि इस मंदिर की खोज युधिष्ठिर ने की थी, और ब्रह्मवैवर्त पुराण में इसका वर्णन बताया जाता है। विजयनगर के शासकों ने मंदिर को संरक्षण दिया। सम्राट कृष्णदेवराय ने यहाँ दर्शन किए थे और उनके समय का एक शिलालेख आज भी मंदिर में है।
दर्शन और यात्रा
पहाड़ी का पानकाल नरसिंह मंदिर केवल दिन में खुलता है; मान्यता है कि रात में देवता स्वयं भगवान की पूजा करने आते हैं। पहाड़ी पर सीढ़ियों और घाट रोड दोनों से पहुँचा जा सकता है। नरसिंह जयंती और वार्षिक ब्रह्मोत्सव पर यहाँ बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। मंगलगिरि विजयवाड़ा से लगभग 15 किमी दूर है, इसलिए कनक दुर्गा मंदिर के साथ इसके दर्शन एक ही दिन में किए जा सकते हैं।
दर्शन का समय
- तलहटी का लक्ष्मी नरसिंह मंदिर: लगभग सुबह 5:30 से दोपहर 12:30 और शाम 4:00 से रात 8:30 बजे तक
- पहाड़ी का पानकाल नरसिंह मंदिर: केवल दिन में, लगभग सुबह 7:00 से दोपहर 3:00 बजे तक
मुख्य आकर्षण
- पानकाल नरसिंह स्वामी – खुले मुख वाले स्वयंभू विग्रह को पानक का भोग।
- लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर – पहाड़ी की तलहटी में।
- राजगोपुरम – लगभग 153 फुट ऊँचा, 11 मंज़िला।
- गंडाल नरसिंह – पहाड़ी की चोटी पर।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: विजयवाड़ा से लगभग 15 किमी, गुंटूर से लगभग 22 किमी।
- रेल मार्ग: मंगलगिरि रेलवे स्टेशन; बड़ा जंक्शन विजयवाड़ा।
- हवाई मार्ग: विजयवाड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, गन्नवरम।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पानकाल नरसिंह स्वामी को क्या भोग लगता है?
मंगलगिरि में नरसिंह के कितने मंदिर हैं?
मंगलगिरि का गोपुरम किसने बनवाया?
पहाड़ी का मंदिर शाम को बंद क्यों रहता है?
विजयवाड़ा से मंगलगिरि कितनी दूर है?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, नारायणवनम भगवान श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी, देवी पद्मावती
-
Kakinada, आंध्र प्रदेश श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी मंदिर, तोलि तिरुपति (चदलाड) श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी (भगवान वेंकटेश्वर का स्वरूप), श्रीदेवी और भूदेवी सहित
-
श्रीकालहस्ती, आंध्र प्रदेश श्रीकालहस्तीश्वर मंदिर, श्रीकालहस्ती भगवान शिव (श्रीकालहस्तीश्वर) – वायु लिंगम; देवी ज्ञानप्रसूनाम्बा
-
तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, श्रीनिवासमंगापुरम भगवान श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी (चतुर्भुज, पूर्वमुखी)
-
Kakinada, आंध्र प्रदेश श्री सूर्यनारायण स्वामी मंदिर, गोल्लल मामिडाडा भगवान श्री सूर्यनारायण स्वामी
-
तिरुपति, आंध्र प्रदेश श्री वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी), तिरुमला भगवान श्री वेंकटेश्वर (बालाजी / श्रीनिवास)