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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री सूर्यनारायण स्वामी मंदिर, गोल्लल मामिडाडा

Sri Suryanarayana Swamy Temple, Gollala Mamidada

Kakinada, आंध्र प्रदेश भगवान श्री सूर्यनारायण स्वामी निःशुल्क प्रवेश

श्री सूर्यनारायण स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के काकिनाडा जिले के गाँव गोल्लल मामिडाडा (जी. मामिडाडा) में स्थित सूर्यदेव का मंदिर है। यह गाँव तुल्यभागा नदी के तट पर बसा है। श्रीकाकुलम के अरसवल्ली सूर्य मंदिर के बाद इसे आंध्र प्रदेश का दूसरा प्रसिद्ध सूर्य मंदिर कहा जाता है। यहाँ सूर्यदेव सूर्यनारायण – अर्थात विष्णु स्वरूप – में पूजे जाते हैं।

स्थापना

यह मंदिर प्राचीन नहीं, बल्कि 20वीं शताब्दी के आरंभ का है। इसकी स्थापना का श्रेय गाँव के दानदाता कोव्वूरी बसिवि रेड्डी को दिया जाता है। स्थापना वर्ष को लेकर स्रोतों में अंतर है – कुछ में 1902 और कुछ में 1920 बताया गया है।

मंदिर और विग्रह

गर्भगृह में भगवान सूर्यनारायण विराजते हैं। उत्सव के समय जब भगवान रथ पर बाहर आते हैं, तो उनकी मूर्ति शंख और चक्र धारण किए होती है – जो सूर्य और विष्णु की एकता को दर्शाता है। मंदिर का गोपुरम देवताओं, संतों और साधुओं की मूर्तियों से सजा है। स्थानीय मान्यता है कि लगभग मार्च और सितंबर में सूर्य की किरणें सीधे भगवान के चरणों तक पहुँचती हैं।

उत्सव और आसपास के दर्शन

माघ शुक्ल सप्तमी को मनाई जाने वाली रथ सप्तमी यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव है; एकादशी पर भी विशेष अर्चना और अभिषेक होते हैं। इसी गाँव में ऊँचे गोपुरमों वाला कोदंडराम मंदिर भी है, जिसके दर्शन भक्त साथ में करते हैं। गोल्लल मामिडाडा काकिनाडा से लगभग 20 किमी और राजमहेंद्रवरम से लगभग 58 किमी दूर है।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक

मुख्य आकर्षण

  • भगवान सूर्यनारायण – विष्णु रूप में, उत्सव मूर्ति शंख और चक्र धारण किए।
  • सूर्य किरणें – मान्यता है कि वर्ष में दो बार किरणें भगवान के चरणों तक पहुँचती हैं।
  • रथ सप्तमी का उत्सव।
  • गाँव का कोदंडराम मंदिर भी दर्शनीय है।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: काकिनाडा से लगभग 20 किमी, राजमहेंद्रवरम से लगभग 58 किमी।
  • रेल मार्ग: काकिनाडा और सामर्लकोटा रेलवे स्टेशन।
  • हवाई मार्ग: राजमहेंद्रवरम हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गोल्लल मामिडाडा का सूर्य मंदिर किसने बनवाया?
मंदिर की स्थापना का श्रेय स्थानीय दानदाता कोव्वूरी बसिवि रेड्डी को दिया जाता है। स्थापना वर्ष को लेकर स्रोतों में 1902 और 1920 दोनों वर्ष मिलते हैं।
यहाँ सूर्यदेव किस रूप में हैं?
यहाँ सूर्यदेव सूर्यनारायण के रूप में, यानी विष्णु स्वरूप में पूजे जाते हैं। उत्सव के समय रथ पर विराजमान मूर्ति शंख और चक्र धारण करती है।
मंदिर का मुख्य उत्सव कौन सा है?
माघ शुक्ल सप्तमी को मनाई जाने वाली रथ सप्तमी यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव है, जिसे सूर्यदेव का जन्मदिन माना जाता है। एकादशी पर भी विशेष पूजा होती है।
सूर्य की किरणें मूर्ति पर कब पड़ती हैं?
स्थानीय मान्यता के अनुसार लगभग मार्च और सितंबर के महीनों में सूर्य की किरणें भगवान के चरणों तक पहुँचती हैं।
काकिनाडा से गोल्लल मामिडाडा कितनी दूर है?
गोल्लल मामिडाडा काकिनाडा से लगभग 20 किमी दूर है। राजमहेंद्रवरम से यह दूरी लगभग 58 किमी है।

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