मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री यागंटी उमा महेश्वर मंदिर, यागंटी

Sri Yaganti Uma Maheswara Temple, Yaganti

नंद्याल, आंध्र प्रदेश भगवान शिव और माता पार्वती (उमा महेश्वर, एक ही शिला में) निःशुल्क प्रवेश

श्री यागंटी उमा महेश्वर मंदिर आंध्र प्रदेश के नंद्याल ज़िले (पहले कर्नूल ज़िला) में बनगानपल्ले से लगभग 14 किमी दूर पहाड़ियों के बीच स्थित भगवान शिव और माता पार्वती का मंदिर है। यहाँ शिव-पार्वती एक ही शिला में उमा महेश्वर रूप में विराजते हैं – जबकि अधिकांश शिव मंदिरों में शिवलिंग की पूजा होती है। मंदिर अपने बढ़ते नंदी, नंदी-मुख से बहते पुष्करिणी जल और ऋषि अगस्त्य से जुड़ी गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है।

स्थल पुराण

मान्यता है कि ऋषि अगस्त्य यहाँ भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर बनाना चाहते थे, पर मूर्ति खंडित हो जाने के कारण उसकी स्थापना नहीं हो सकी। तब अगस्त्य ने शिव की तपस्या की, और शिव ने इस स्थान को कैलास के समान मानकर उमा महेश्वर रूप में यहाँ वास स्वीकार किया। एक अन्य कथा भक्त चिट्टेप्पा की है, जिन्हें शिव ने व्याघ्र रूप में दर्शन दिए; पास की एक गुफा उन्हीं के नाम से जानी जाती है।

मंदिर, नंदी और पुष्करिणी

वर्तमान मंदिर को 15वीं शताब्दी में विजयनगर के संगम वंश के काल का माना जाता है, और इसकी बनावट में वैष्णव परंपरा के तत्व दिखते हैं। मंदिर के सामने के नंदी के बारे में स्थानीय विश्वास है कि वह धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है, और कहा जाता है कि इसी कारण वहाँ का एक स्तंभ हटाया गया। परिसर की पुष्करिणी में पहाड़ियों का जल एक नंदी के मुख से गिरता है; भक्त शिव दर्शन से पहले इसमें स्नान करते हैं। गर्भगृह के उत्तर में छोटी अगस्त्य पुष्करिणी भी है।

गुफाएँ और कौओं की कथा

  • अगस्त्य गुफा: लगभग 120 सीढ़ियाँ चढ़कर, जहाँ ऋषि ने तप किया।
  • वेंकटेश्वर गुफा: जिसमें खंडित वेंकटेश्वर विग्रह है।
  • वीरब्रह्मम गुफा: जहाँ संत पोतुलूरी वीरब्रह्मेंद्र स्वामी ने अपना भविष्यवाणी ग्रंथ कालज्ञानम लिखा माना जाता है।

कथा है कि अगस्त्य ने कौओं को यहाँ न आने का शाप दिया था। कौआ शनि का वाहन है, इसलिए मान्यता है कि शनि भी इस क्षेत्र में प्रवेश नहीं करते।

उत्सव और आसपास

महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे बड़ा पर्व है, जब भारी भीड़ उमड़ती है। यागंटी कर्नूल से लगभग 100 किमी दूर है, और लगभग 45 किमी पर प्रसिद्ध बेलम गुफाएँ हैं। नंद्याल क्षेत्र के अहोबिलम और महानंदी जैसे तीर्थों के साथ इसकी यात्रा की जा सकती है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 1:00 बजे तक और दोपहर लगभग 3:00 से रात 8:00 बजे तक

स्रोतों में समय कुछ अलग मिलता है; महाशिवरात्रि पर समय बढ़ाया जाता है। यात्रा से पहले पुष्टि कर लें।

मुख्य आकर्षण

  • उमा महेश्वर – एक ही शिला में शिव और पार्वती के विग्रह।
  • यागंटी नंदी – मंदिर के सामने का नंदी, जिसके धीरे-धीरे बढ़ने की लोक-मान्यता है।
  • पुष्करिणी – जिसमें नंदी के मुख से पहाड़ियों का जल गिरता है; भक्त दर्शन से पहले यहाँ स्नान करते हैं।
  • अगस्त्य गुफा – लगभग 120 सीढ़ियाँ चढ़कर, जहाँ अगस्त्य ने तप किया।
  • वेंकटेश्वर गुफा और वीरब्रह्मम गुफा।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: बनगानपल्ले से लगभग 14 किमी (बनगानपल्ले–पेपुल्ली सड़क पर); कर्नूल से लगभग 100 किमी। बेलम गुफाएँ लगभग 45 किमी।
  • रेल मार्ग: निकटतम बड़े स्टेशन नंद्याल और कर्नूल हैं।
  • हवाई मार्ग: कर्नूल (ओर्वकल) हवाई अड्डा; बड़े हवाई अड्डे हैदराबाद और बेंगलुरु।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या यागंटी का नंदी सचमुच बढ़ रहा है?
स्थानीय मान्यता है कि मंदिर के सामने का नंदी धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है, और कहा जाता है कि इसी कारण आसपास का एक स्तंभ हटाना पड़ा। कुछ स्रोत इसका कारण शिला की प्रकृति बताते हैं; यह मुख्य रूप से लोक-आस्था का विषय है।
यागंटी मंदिर की कथा क्या है?
मान्यता है कि ऋषि अगस्त्य यहाँ भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर बनाना चाहते थे, पर मूर्ति खंडित हो गई। तब उन्होंने शिव की तपस्या की, और शिव ने इस स्थान को कैलास के समान मानकर उमा महेश्वर रूप में यहाँ वास स्वीकार किया।
यागंटी में कौए क्यों नहीं दिखते?
कथा के अनुसार अगस्त्य की तपस्या में कौओं ने विघ्न डाला तो ऋषि ने उन्हें यहाँ न आने का शाप दिया। कौआ शनि का वाहन है, इसलिए मान्यता है कि शनि भी इस क्षेत्र में प्रवेश नहीं करते।
यागंटी में कौन सी गुफाएँ हैं?
यहाँ अगस्त्य गुफा (जहाँ ऋषि ने तप किया), वेंकटेश्वर गुफा (जिसमें खंडित वेंकटेश्वर विग्रह है) और वीरब्रह्मम गुफा (जहाँ संत पोतुलूरी वीरब्रह्मेंद्र स्वामी ने कालज्ञानम लिखा माना जाता है) हैं।
यागंटी कैसे पहुँचें?
यागंटी नंद्याल ज़िले में बनगानपल्ले से लगभग 14 किमी और कर्नूल से लगभग 100 किमी दूर है। बनगानपल्ले से बस या टैक्सी से पहुँचा जा सकता है; बेलम गुफाएँ भी लगभग 45 किमी दूर हैं।

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook