श्री त्रिकोटेश्वर स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले में नरसरावपेट के पास कोटप्पकोंडा पहाड़ी पर स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। “त्रिकोटेश्वर” का अर्थ है तीन शिखरों के स्वामी – पहाड़ी के तीन शिखर ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र शिखर कहे जाते हैं। यहाँ शिव दक्षिणामूर्ति – ज्ञान देने वाले गुरु – के रूप में पूजे जाते हैं, और भक्त उन्हें प्रेम से “कोटय्या” कहते हैं।
स्थल पुराण और गोल्लभामा
स्थल कथा इस क्षेत्र को दक्ष यज्ञ के बाद शिव के दक्षिणामूर्ति रूप से जोड़ती है। माना जाता है कि भगवान का मूल स्थान रुद्र शिखर था, जहाँ आज पात (पुराने) कोटय्या का मंदिर है। लोक कथा के अनुसार ग्वालिन भक्त आनंदवल्ली, जिसे गोल्लभामा कहते हैं, रोज़ भगवान की सेवा करती थी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उसके साथ चलने का वचन दिया, बशर्ते वह पीछे मुड़कर न देखे। ब्रह्मा शिखर पर पहुँचकर उसने पीछे देख लिया, और भगवान वहीं एक गुफा में लिंग रूप में स्थित हो गए। यही आज का मुख्य मंदिर है।
तीन शिखर
- ब्रह्मा शिखर – सबसे ऊँचा, त्रिकोटेश्वर स्वामी का मुख्य मंदिर।
- रुद्र शिखर – पात कोटय्या मंदिर, भगवान का मूल स्थान।
- विष्णु शिखर – पापनाशेश्वर मंदिर और पापनाश तीर्थ।
इतिहास
12वीं शताब्दी के शिलालेखों से पता चलता है कि यह मंदिर उस समय भी प्रसिद्ध था। बाद के काल में विजयनगर के शासकों के समय यहाँ मंडप और अन्य निर्माण जोड़े गए। भक्त परंपरागत रूप से लंबी सीढ़ियाँ चढ़कर ब्रह्मा शिखर तक पहुँचते हैं, और अब घाट रोड भी है।
महाशिवरात्रि और प्रभा उत्सव
कोटप्पकोंडा की महाशिवरात्रि जातरा आंध्र प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में गिनी जाती है। इस अवसर पर आसपास के गाँव 100 फुट से भी ऊँची प्रकाशित प्रभाएँ बनाते हैं, जिन्हें बैलगाड़ियों पर सजाकर मंदिर तक लाया जाता है। लाखों भक्त रात भर जागरण करके भगवान के दर्शन करते हैं। कोटप्पकोंडा नरसरावपेट से लगभग 13 किमी दूर है।
दर्शन का समय
- दर्शन: लगभग सुबह 6:00 से रात 8:00 बजे तक (महाशिवरात्रि पर पूरी रात)
मुख्य आकर्षण
- त्रिकोटेश्वर स्वामी – ब्रह्मा शिखर पर मुख्य मंदिर।
- पात कोटय्या मंदिर – रुद्र शिखर पर।
- पापनाशेश्वर मंदिर और पापनाश तीर्थ – विष्णु शिखर पर।
- महाशिवरात्रि प्रभा उत्सव – 100 फुट से ऊँची प्रकाशित प्रभाएँ।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: नरसरावपेट से लगभग 13 किमी, गुंटूर से लगभग 60 किमी।
- रेल मार्ग: नरसरावपेट रेलवे स्टेशन।
- हवाई मार्ग: विजयवाड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, गन्नवरम।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
त्रिकोटेश्वर नाम का क्या अर्थ है?
यहाँ शिव किस रूप में पूजे जाते हैं?
गोल्लभामा की कथा क्या है?
कोटप्पकोंडा की महाशिवरात्रि क्यों प्रसिद्ध है?
नरसरावपेट से कोटप्पकोंडा कितनी दूर है?
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