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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

वीरभद्र स्वामी मंदिर, लेपाक्षी

Veerabhadra Temple, Lepakshi

श्री सत्य साई, आंध्र प्रदेश श्री वीरभद्र स्वामी (भगवान शिव का उग्र रूप) निःशुल्क प्रवेश

वीरभद्र स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई ज़िले (पहले अनंतपुर ज़िला) के लेपाक्षी गाँव में स्थित भगवान शिव के उग्र रूप वीरभद्र का मंदिर है। यह गाँव के दक्षिण में कछुए के आकार की ग्रेनाइट पहाड़ी कूर्म शैल पर बना है। अपने लटकते स्तंभ, विशाल एकाश्म नंदी और छत के भित्तिचित्रों के कारण यह विजयनगर काल के सबसे भव्य मंदिरों में गिना जाता है। स्कंद पुराण में इसे शिव के दिव्य क्षेत्रों में बताया गया है, और यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है।

इतिहास

मंदिर का निर्माण विजयनगर सम्राट अच्युत देवराय के शासनकाल में पेनुकोंडा के अधिकारी दो भाइयों – विरुपण्णा और वीरण्णा – ने लगभग 1530–1540 ई. में करवाया। मंदिर में 21 शिलालेख मिले हैं, जिनमें अधिकांश कन्नड़ और संस्कृत में हैं। छत के कुछ चित्रों में स्वयं इन दाताओं को भी दर्शाया गया है।

जटायु और “ले पक्षी” की कथा

लोक-मान्यता के अनुसार सीता हरण के समय रावण से युद्ध करते हुए घायल जटायु इसी स्थान पर गिरे थे। भगवान राम ने उन्हें देखकर कहा – “ले पक्षी”, अर्थात “उठो, हे पक्षी”। इसी से इस गाँव का नाम लेपाक्षी पड़ा।

मंदिर की विशेषताएँ

  • तीन भाग: मुखमंडप (सभा मंडप), अर्धमंडप (अंतराल) और गर्भगृह, जिनके चारों ओर दो प्राकार हैं।
  • लटकता स्तंभ: मंडप का एक स्तंभ एक ओर से ही ज़मीन छूता है; नीचे से कपड़ा आर-पार निकल जाता है।
  • नागलिंग: मंदिर के पूर्व में एक ग्रेनाइट शिला पर बहुफनी नाग शिवलिंग पर छाया किए हुए उकेरा गया है।
  • भित्तिचित्र: छतों पर रामायण, महाभारत और पुराणों के प्रसंग; अंतराल की छत पर शिव के चौदह रूप और वीरभद्र का विशाल चित्र।
  • विशाल नंदी: मंदिर से लगभग 200 मीटर दूर एक ही शिला से बना, लगभग 20 फुट ऊँचा और 30 फुट लंबा नंदी।

उत्सव और यात्रा

महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे बड़ा पर्व है, जब रात भर पूजा होती है और दूर-दूर से भक्त आते हैं। लेपाक्षी हिंदूपुर से लगभग 14 किमी और बेंगलुरु से लगभग 120–140 किमी दूर है, इसलिए बेंगलुरु से एक दिन की यात्रा में आसानी से दर्शन हो जाते हैं। पूजा में जलने वाले कपूर के धुएँ से भित्तिचित्रों को नुकसान पहुँचा है, इसलिए दर्शन के समय इन नाज़ुक चित्रों को छूने से बचें।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 5:00 – 6:00 से दोपहर लगभग 12:30 बजे तक और शाम लगभग 4:00 से 8:30 बजे तक

स्रोतों में समय अलग-अलग मिलता है और पर्वों पर बदल सकता है; यात्रा से पहले पुष्टि कर लें।

मुख्य आकर्षण

  • श्री वीरभद्र स्वामी – गर्भगृह में शिव का उग्र रूप।
  • लटकता स्तंभ – जो एक ओर से ज़मीन को पूरा नहीं छूता; नीचे से कपड़ा निकाला जा सकता है।
  • विशाल नंदी – मंदिर से लगभग 200 मीटर दूर, एक ही ग्रेनाइट शिला से बना, अपनी तरह के सबसे बड़े नंदियों में गिना जाता है।
  • नागलिंग – शिला पर बना बहुफनी नाग, जो शिवलिंग पर छाया किए है।
  • छत के भित्तिचित्र – रामायण, महाभारत और पुराणों के प्रसंग; वीरभद्र का विशाल चित्र।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: हिंदूपुर रेलवे स्टेशन (लगभग 14 किमी)।
  • सड़क मार्ग: बेंगलुरु से लगभग 120–140 किमी; राष्ट्रीय राजमार्ग 44 से कर्नाटक–आंध्र सीमा के पास से लगभग 12 किमी की शाखा सड़क। पेनुकोंडा से लगभग 35 किमी।
  • हवाई मार्ग: केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बेंगलुरु (लगभग 100 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लेपाक्षी का लटकता स्तंभ क्या है?
मंदिर के मंडप का एक स्तंभ अपनी जगह से थोड़ा खिसका हुआ है और एक ओर से ही ज़मीन को छूता है। इसके नीचे से कपड़ा या कागज़ आर-पार निकाला जा सकता है, इसलिए इसे लटकता स्तंभ कहते हैं।
लेपाक्षी नाम कैसे पड़ा?
प्रचलित कथा के अनुसार सीता हरण के समय रावण से युद्ध में घायल जटायु यहीं गिरे थे। भगवान राम ने उनसे 'ले पक्षी' (उठो, हे पक्षी) कहा, और इसी से स्थान का नाम लेपाक्षी पड़ा। यह लोक-मान्यता है।
लेपाक्षी मंदिर किसने बनवाया?
मंदिर विजयनगर सम्राट अच्युत देवराय के समय पेनुकोंडा के अधिकारी विरुपण्णा और वीरण्णा बंधुओं ने लगभग 1530–1540 ई. में बनवाया। मंदिर में कन्नड़ और संस्कृत के कई शिलालेख हैं।
लेपाक्षी का नंदी कितना बड़ा है?
मंदिर से लगभग 200 मीटर दूर एक ही ग्रेनाइट शिला से बना नंदी लगभग 20 फुट ऊँचा और 30 फुट लंबा है। इसे भारत के सबसे बड़े एकाश्म नंदियों में गिना जाता है।
लेपाक्षी मंदिर किस ज़िले में है?
लेपाक्षी आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई ज़िले (पहले अनंतपुर ज़िला) में, हिंदूपुर से लगभग 14 किमी और बेंगलुरु से लगभग 120–140 किमी दूर है।

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