सुगंधा शक्तिपीठ बांग्लादेश के बरिशाल ज़िले में उजिरपुर उपज़िले के शिकारपुर गाँव में स्थित माना जाता है, जो बरिशाल शहर के उत्तर में है। इसे 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहाँ सती की नासिका गिरी थी। यहाँ की शक्ति सुनंदा और भैरव त्र्यंबक हैं। स्थानीय रूप से देवी को सुगंधा देवी भी कहा जाता है।
नाम और कथा
दक्ष यज्ञ में सती के देह-त्याग के बाद शोकाकुल शिव उनका शरीर लेकर भ्रमण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उस शरीर के खंड किए, और जहाँ-जहाँ अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। “सुगंधा” का अर्थ है सुंदर गंध वाली – नासिका गंध का अंग है, इसलिए परंपरा इस नाम को यहाँ गिरी नासिका से जोड़ती है। पीठ निर्णय तंत्र में इस पीठ का उल्लेख सुगंधा नाम से मिलता है।
देवी सुनंदा और भैरव त्र्यंबक
यहाँ देवी की आराधना सुनंदा रूप में होती है, और उनके साथ भैरव त्र्यंबक – अर्थात् तीन नेत्रों वाले शिव – की पूजा होती है। बरिशाल नदियों और नहरों से घिरा क्षेत्र है, और कई स्रोत इस पीठ को सुनंदा (या सुगंधा) नाम की नदी के तट से जोड़ते हैं।
प्रमुख उत्सव
- शिव चतुर्दशी – यहाँ का प्रमुख उत्सव माना जाता है।
- नवरात्रि और दुर्गा पूजा के समय शक्तिपीठ के दर्शन।
स्थान को लेकर मत
सुगंधा पीठ के रूप में शिकारपुर का नाम सामान्यतः स्वीकार किया जाता है, पर विवरणों में अंतर है। कुछ स्रोत शिकारपुर के उग्रतारा मंदिर को ही सुगंधा पीठ मानते हैं, और पास की नदी का नाम भी अलग-अलग स्रोतों में सुनंदा या सुगंधा बताया गया है। श्रद्धालु इन्हें एक ही पवित्र क्षेत्र का भाग मानकर दर्शन करते हैं।
यात्रा सुझाव
भारत से जाने के लिए पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा आवश्यक है; नियम बदलते रहते हैं, इसलिए यात्रा से पहले वर्तमान आधिकारिक नियम जाँच लें। ठहरने के लिए बरिशाल शहर सबसे सुविधाजनक है। मानसून में इस क्षेत्र में पानी भर जाता है, इसलिए अक्टूबर से मार्च के बीच यात्रा बेहतर रहती है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे और शाम लगभग 4:00 से 8:00 बजे तक
गाँव का मंदिर होने के कारण समय स्थानीय रूप से बदल सकता है।
मुख्य आकर्षण
- माँ सुनंदा (सुगंधा देवी) का मंदिर।
- त्र्यंबक भैरव का स्थान।
- शिकारपुर का उग्रतारा मंदिर, जिसे कई स्रोत इसी पीठ से जोड़ते हैं।
- शिव चतुर्दशी पर होने वाला उत्सव।
- नदियों से घिरा बरिशाल क्षेत्र।
कैसे पहुँचें
- भारत से: भारतीय नागरिकों को वैध पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा की आवश्यकता होती है। वीज़ा और सीमा-पार के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक स्रोतों से वर्तमान नियम अवश्य जाँच लें।
- सीमा / हवाई मार्ग: कोलकाता से पेट्रापोल–बेनापोल सीमा होकर या कोलकाता से ढाका की उड़ान लेकर बांग्लादेश पहुँचा जा सकता है।
- ढाका से: सड़क मार्ग या नदी-मार्ग (लॉन्च) से बरिशाल; बरिशाल में घरेलू हवाई अड्डा भी है।
- स्थानीय: शिकारपुर गाँव बरिशाल शहर के उत्तर में उजिरपुर उपज़िले में है; बरिशाल से बस, ऑटो या टैक्सी द्वारा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सुगंधा शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
सुगंधा शक्तिपीठ कहाँ है?
सुगंधा नाम का क्या अर्थ है?
भारत से सुगंधा शक्तिपीठ कैसे पहुँचें?
सुगंधा शक्तिपीठ का मुख्य उत्सव कौन सा है?
सुगंधा शक्तिपीठ, शिकारपुर बरिशाल (बांग्लादेश) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
बोगुड़ा, बांग्लादेश करतोयातट (भवानीपुर) शक्तिपीठ, शेरपुर बोगुड़ा (बांग्लादेश) माँ अपर्णा (माँ भवानी / तारा); भैरव – वामन
-
चट्टोग्राम, बांग्लादेश चट्टल (चंद्रनाथ) शक्तिपीठ, सीताकुंड चट्टोग्राम (बांग्लादेश) माँ भवानी; भैरव – चंद्रशेखर (चंद्रनाथ)
-
सिलहट, बांग्लादेश जयंती शक्तिपीठ, जैंतियापुर सिलहट (बांग्लादेश) माँ जयंती; भैरव – क्रमदीश्वर
-
सातखीरा, बांग्लादेश यशोरेश्वरी काली मंदिर, ईश्वरीपुर सातखीरा बांग्लादेश माँ यशोरेश्वरी (काली)
-
सिलहट, बांग्लादेश श्रीशैल महालक्ष्मी शक्तिपीठ, जोइनपुर सिलहट (बांग्लादेश) माँ महालक्ष्मी; भैरव – शंबरानंद
-
पुणे, महाराष्ट्र विघ्नेश्वर (विघ्नहर) गणपति मंदिर (अष्टविनायक), ओझर श्री विघ्नेश्वर (विघ्नहर) गणपति, ऋद्धि-सिद्धि सहित