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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

सुगंधा शक्तिपीठ, शिकारपुर बरिशाल (बांग्लादेश)

Sugandha Shaktipeeth, Shikarpur Barishal (Bangladesh)

बरिशाल, बांग्लादेश माँ सुनंदा (सुगंधा देवी); भैरव – त्र्यंबक निःशुल्क प्रवेश

सुगंधा शक्तिपीठ बांग्लादेश के बरिशाल ज़िले में उजिरपुर उपज़िले के शिकारपुर गाँव में स्थित माना जाता है, जो बरिशाल शहर के उत्तर में है। इसे 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहाँ सती की नासिका गिरी थी। यहाँ की शक्ति सुनंदा और भैरव त्र्यंबक हैं। स्थानीय रूप से देवी को सुगंधा देवी भी कहा जाता है।

नाम और कथा

दक्ष यज्ञ में सती के देह-त्याग के बाद शोकाकुल शिव उनका शरीर लेकर भ्रमण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उस शरीर के खंड किए, और जहाँ-जहाँ अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। “सुगंधा” का अर्थ है सुंदर गंध वाली – नासिका गंध का अंग है, इसलिए परंपरा इस नाम को यहाँ गिरी नासिका से जोड़ती है। पीठ निर्णय तंत्र में इस पीठ का उल्लेख सुगंधा नाम से मिलता है।

देवी सुनंदा और भैरव त्र्यंबक

यहाँ देवी की आराधना सुनंदा रूप में होती है, और उनके साथ भैरव त्र्यंबक – अर्थात् तीन नेत्रों वाले शिव – की पूजा होती है। बरिशाल नदियों और नहरों से घिरा क्षेत्र है, और कई स्रोत इस पीठ को सुनंदा (या सुगंधा) नाम की नदी के तट से जोड़ते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • शिव चतुर्दशी – यहाँ का प्रमुख उत्सव माना जाता है।
  • नवरात्रि और दुर्गा पूजा के समय शक्तिपीठ के दर्शन।

स्थान को लेकर मत

सुगंधा पीठ के रूप में शिकारपुर का नाम सामान्यतः स्वीकार किया जाता है, पर विवरणों में अंतर है। कुछ स्रोत शिकारपुर के उग्रतारा मंदिर को ही सुगंधा पीठ मानते हैं, और पास की नदी का नाम भी अलग-अलग स्रोतों में सुनंदा या सुगंधा बताया गया है। श्रद्धालु इन्हें एक ही पवित्र क्षेत्र का भाग मानकर दर्शन करते हैं।

यात्रा सुझाव

भारत से जाने के लिए पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा आवश्यक है; नियम बदलते रहते हैं, इसलिए यात्रा से पहले वर्तमान आधिकारिक नियम जाँच लें। ठहरने के लिए बरिशाल शहर सबसे सुविधाजनक है। मानसून में इस क्षेत्र में पानी भर जाता है, इसलिए अक्टूबर से मार्च के बीच यात्रा बेहतर रहती है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे और शाम लगभग 4:00 से 8:00 बजे तक

गाँव का मंदिर होने के कारण समय स्थानीय रूप से बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ सुनंदा (सुगंधा देवी) का मंदिर।
  • त्र्यंबक भैरव का स्थान।
  • शिकारपुर का उग्रतारा मंदिर, जिसे कई स्रोत इसी पीठ से जोड़ते हैं।
  • शिव चतुर्दशी पर होने वाला उत्सव।
  • नदियों से घिरा बरिशाल क्षेत्र।

कैसे पहुँचें

  • भारत से: भारतीय नागरिकों को वैध पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा की आवश्यकता होती है। वीज़ा और सीमा-पार के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक स्रोतों से वर्तमान नियम अवश्य जाँच लें।
  • सीमा / हवाई मार्ग: कोलकाता से पेट्रापोल–बेनापोल सीमा होकर या कोलकाता से ढाका की उड़ान लेकर बांग्लादेश पहुँचा जा सकता है।
  • ढाका से: सड़क मार्ग या नदी-मार्ग (लॉन्च) से बरिशाल; बरिशाल में घरेलू हवाई अड्डा भी है।
  • स्थानीय: शिकारपुर गाँव बरिशाल शहर के उत्तर में उजिरपुर उपज़िले में है; बरिशाल से बस, ऑटो या टैक्सी द्वारा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सुगंधा शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
मान्यता है कि सुगंधा शक्तिपीठ में सती की नासिका (नाक) गिरी थी। यहाँ की शक्ति सुनंदा और भैरव त्र्यंबक हैं।
सुगंधा शक्तिपीठ कहाँ है?
यह शक्तिपीठ बांग्लादेश के बरिशाल ज़िले के उजिरपुर उपज़िले में शिकारपुर गाँव में स्थित माना जाता है, जो बरिशाल शहर के उत्तर में है।
सुगंधा नाम का क्या अर्थ है?
सुगंधा का अर्थ है सुंदर गंध वाली। नासिका गंध का अंग है, इसलिए परंपरा इस नाम को यहाँ गिरी नासिका से जोड़ती है। स्थानीय रूप से देवी को सुगंधा देवी भी कहते हैं।
भारत से सुगंधा शक्तिपीठ कैसे पहुँचें?
पासपोर्ट और बांग्लादेश वीज़ा लेकर कोलकाता से पेट्रापोल–बेनापोल सीमा या ढाका की उड़ान से बांग्लादेश पहुँचें, फिर ढाका से सड़क या लॉन्च द्वारा बरिशाल और वहाँ से शिकारपुर जाएँ। यात्रा से पहले वर्तमान नियम जाँच लें।
सुगंधा शक्तिपीठ का मुख्य उत्सव कौन सा है?
यहाँ शिव चतुर्दशी का उत्सव प्रमुख माना जाता है। शक्तिपीठ होने के कारण नवरात्रि और दुर्गा पूजा के समय भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

सुगंधा शक्तिपीठ, शिकारपुर बरिशाल (बांग्लादेश) इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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