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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

सर्वशैल (गोदावरी तट) शक्तिपीठ, राजमुंदरी

Sarvashaila (Godavari Tir) Shaktipeeth, Rajahmundry

Rajahmundry, आंध्र प्रदेश माँ राकिणी (विश्वेश्वरी); भैरव – वत्सनाभ निःशुल्क प्रवेश

सर्वशैल शक्तिपीठ, जिसे गोदावरी तट शक्तिपीठ भी कहा जाता है, आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी (राजमहेंद्रवरम) नगर में गोदावरी नदी के किनारे स्थित माना जाता है। इसे 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता के अनुसार यहाँ सती का गाल गिरा था। यहाँ की शक्ति राकिणी हैं, जिन्हें विश्वेश्वरी भी कहा जाता है, और भैरव वत्सनाभ हैं। कुछ ग्रंथों में भैरव का नाम दंडपाणि भी मिलता है।

कोटिलिंगेश्वर मंदिर और कोटि तीर्थ

यह शक्तिपीठ गोदावरी तट के प्राचीन कोटिलिंगेश्वर शिव मंदिर के पास माना जाता है, और देवी विश्वेश्वरी की पूजा इसी परिसर से जुड़ी है। गोदावरी के इस भाग को परंपरा में कोटि तीर्थ कहा गया है। एक स्थानीय कथा के अनुसार महर्षि गौतम के श्राप से मुक्ति पाने के लिए इंद्र ने यहाँ शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर के पास का कोटिलिंगाला घाट गोदावरी स्नान के प्रमुख घाटों में से एक है।

गोदावरी और राजमुंदरी

राजमुंदरी को आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है। दक्षिण की गंगा कही जाने वाली गोदावरी यहाँ बहुत चौड़ी होकर बहती है। हर बारह वर्ष पर लगने वाले गोदावरी पुष्करम के समय लाखों श्रद्धालु यहाँ के घाटों पर स्नान करते हैं, और कई यात्री इसी अवसर पर शक्तिपीठ के दर्शन भी करते हैं।

स्थान को लेकर मत

अधिकतर स्रोत इस पीठ को राजमुंदरी के कोटिलिंगेश्वर क्षेत्र में मानते हैं। गोदावरी तट पर ही कोनसीमा क्षेत्र का कोटिपल्ली भी एक प्राचीन तीर्थ है, जहाँ शिव सोमेश्वर और देवी राजराजेश्वरी रूप में पूजे जाते हैं – “कोटि तीर्थ” नाम के कारण कुछ लोग इसे भी इस पीठ से जोड़ते हैं, पर इसका स्पष्ट आधार नहीं मिलता। कुछ सूचियाँ इस पीठ को केवल “गोदावरी तट” कहती हैं।

प्रमुख उत्सव

  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि में देवी विश्वेश्वरी की विशेष पूजा।
  • महाशिवरात्रि और कार्तिक मास में कोटिलिंगेश्वर के दर्शन और गोदावरी स्नान।
  • गोदावरी पुष्करम – हर बारह वर्ष पर लगने वाला महास्नान पर्व।

यात्रा सुझाव

मंदिर शहर के भीतर है, इसलिए राजमुंदरी या गोदावरी रेलवे स्टेशन से ऑटो द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए अच्छा है। पुष्करम और बड़े पर्वों पर भीड़ बहुत होती है, इसलिए सुबह जल्दी दर्शन करना बेहतर रहता है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से शाम लगभग 7:30 बजे तक

दोपहर में कुछ समय के लिए पट बंद हो सकते हैं; पर्वों पर समय बदल सकता है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ विश्वेश्वरी (राकिणी) – शक्तिपीठ के रूप में पूजित देवी।
  • कोटिलिंगेश्वर मंदिर – गोदावरी तट का प्राचीन शिव मंदिर।
  • कोटिलिंगाला घाट – गोदावरी स्नान का प्रमुख घाट।
  • पुष्कर घाट और गोदावरी पर बने लंबे पुल।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: राजमुंदरी रेलवे स्टेशन (लगभग 6 किमी) और गोदावरी रेलवे स्टेशन (लगभग 2 किमी)।
  • सड़क मार्ग: राजमुंदरी बस स्टैंड से लगभग 5 किमी; ऑटो और टैक्सी आसानी से मिलते हैं।
  • हवाई मार्ग: राजमुंदरी हवाई अड्डा (मधुरपुडी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सर्वशैल शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
मान्यता के अनुसार गोदावरी तट के इस पीठ पर सती का गाल (गंड) गिरा था। कई सूचियों में इसे बायाँ गाल बताया गया है।
सर्वशैल शक्तिपीठ की शक्ति और भैरव कौन हैं?
यहाँ की शक्ति राकिणी हैं, जिन्हें विश्वेश्वरी (विश्वेशी) भी कहा जाता है। भैरव वत्सनाभ हैं; कुछ ग्रंथों में भैरव का नाम दंडपाणि मिलता है।
सर्वशैल शक्तिपीठ कहाँ है?
यह पीठ आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में गोदावरी नदी के तट पर, प्राचीन कोटिलिंगेश्वर शिव मंदिर के पास माना जाता है। इस क्षेत्र को कोटि तीर्थ भी कहा जाता है।
क्या कोटिपल्ली भी इस शक्तिपीठ से जुड़ा है?
कोटिपल्ली गोदावरी तट का एक अलग प्रसिद्ध तीर्थ है, जहाँ शिव सोमेश्वर और देवी राजराजेश्वरी रूप में पूजे जाते हैं। अधिकतर स्रोत सर्वशैल शक्तिपीठ को राजमुंदरी के कोटिलिंगेश्वर क्षेत्र में ही मानते हैं।
सर्वशैल शक्तिपीठ जाने का अच्छा समय कब है?
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है। नवरात्रि, महाशिवरात्रि और हर बारह वर्ष पर लगने वाले गोदावरी पुष्करम के समय यहाँ विशेष भीड़ होती है।

सर्वशैल (गोदावरी तट) शक्तिपीठ, राजमुंदरी इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

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