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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री योगानंद लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर, वेदाद्रि

Sri Yogananda Lakshmi Narasimha Swamy Temple, Vedadri

Vijayawada, आंध्र प्रदेश भगवान श्री योगानंद लक्ष्मी नरसिंह स्वामी (पंच नरसिंह) निःशुल्क प्रवेश

श्री योगानंद लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के एनटीआर जिले में जग्गय्यपेट के पास वेदाद्रि गाँव में, कृष्णा नदी के तट पर स्थित है। यहाँ भगवान नरसिंह पाँच रूपों में पूजे जाते हैं, इसलिए इसे पंच नरसिंह क्षेत्र कहा जाता है। मुख्य विग्रह में भगवान योगानंद नरसिंह के रूप में विराजते हैं और देवी लक्ष्मी उनकी बाईं गोद में बैठी हैं।

वेदों का पर्वत – स्थल पुराण

स्थल पुराण के अनुसार राक्षस सोमकासुर ने ब्रह्मा से वेद चुराकर समुद्र में छिपा दिए। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु वेदों को वापस लाए और उन्हें कृष्णा नदी के तट पर एक पहाड़ी के रूप में स्थापित किया – इसी से इसका नाम वेदाद्रि (वेदों का पर्वत) पड़ा। मान्यता है कि वेदों की प्रार्थना पर भगवान यहाँ नरसिंह रूप में निवास करने लगे।

पाँच नरसिंह रूप

  • ज्वाला नरसिंह – पहाड़ी पर स्वयंभू रूप।
  • सालग्राम नरसिंह – कृष्णा नदी से जुड़ा रूप।
  • योगानंद नरसिंह और लक्ष्मी नरसिंह – मंदिर परिसर में।
  • वीर नरसिंह – पास की गरुड़ाचल पहाड़ी पर।

इतिहास और मंदिर

कहा जाता है कि काकतीय काल में इस मंदिर को विशेष प्रसिद्धि मिली। तेलुगु वैष्णव संत और संगीतकार नारायण तीर्थ यहाँ नियमित रूप से आते थे। 19वीं शताब्दी में मुक्त्याला के जमींदार परिवार के पूर्वज राजा वासिरेड्डी मुक्तेश्वर प्रसाद नायुडु ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, ध्वजस्तंभ स्थापित किया और पहाड़ी से नदी तक 108 सीढ़ियाँ बनवाईं। परिसर में 12 आलवार संतों और वैखानस आगम के प्रवर्तक कश्यप और अत्रि ऋषियों के मंदिर तथा एक गोशाला भी है।

उत्सव और यात्रा

वैशाख शुक्ल पक्ष में नरसिंह जयंती यहाँ का प्रमुख वार्षिक उत्सव है। भक्त कृष्णा नदी में स्नान करके सीढ़ियाँ चढ़ते हुए दर्शन करते हैं। वेदाद्रि जग्गय्यपेट से लगभग 18 किमी दूर है और विजयवाड़ा से सड़क मार्ग से पहुँचा जाता है।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:30 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक

मुख्य आकर्षण

  • योगानंद लक्ष्मी नरसिंह – बाईं गोद में देवी लक्ष्मी।
  • पाँच नरसिंह रूप – ज्वाला, सालग्राम, योगानंद, लक्ष्मी और वीर नरसिंह।
  • 108 सीढ़ियाँ – पहाड़ी से कृष्णा नदी तक।
  • आलवारों और वैखानस आचार्यों के मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: जग्गय्यपेट से लगभग 18 किमी, चिल्लकल्लु से लगभग 10 किमी; विजयवाड़ा–हैदराबाद राजमार्ग से जुड़ा।
  • रेल मार्ग: बड़ा जंक्शन विजयवाड़ा।
  • हवाई मार्ग: विजयवाड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, गन्नवरम।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वेदाद्रि नाम का क्या अर्थ है?
वेदाद्रि का अर्थ है 'वेदों का पर्वत'। स्थल पुराण के अनुसार भगवान ने सोमकासुर से वेदों को वापस लाकर उन्हें कृष्णा नदी के तट पर पहाड़ी के रूप में स्थापित किया।
वेदाद्रि को पंच नरसिंह क्षेत्र क्यों कहते हैं?
यहाँ भगवान नरसिंह पाँच रूपों में पूजे जाते हैं – ज्वाला नरसिंह, सालग्राम नरसिंह, योगानंद नरसिंह, लक्ष्मी नरसिंह और वीर नरसिंह। इसी कारण इसे पंच नरसिंह क्षेत्र कहा जाता है।
वेदाद्रि मंदिर का जीर्णोद्धार किसने कराया?
19वीं शताब्दी में मुक्त्याला के जमींदार परिवार के पूर्वज राजा वासिरेड्डी मुक्तेश्वर प्रसाद नायुडु ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, ध्वजस्तंभ स्थापित किया और पहाड़ी से कृष्णा नदी तक 108 सीढ़ियाँ बनवाईं।
वेदाद्रि का मुख्य उत्सव कौन सा है?
वैशाख शुक्ल पक्ष में नरसिंह जयंती का वार्षिक उत्सव यहाँ का प्रमुख पर्व है। ब्रह्मोत्सव पर भी बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।
वेदाद्रि कैसे पहुँचें?
वेदाद्रि एनटीआर जिले के जग्गय्यपेट मंडल में है। जग्गय्यपेट से यह लगभग 18 किमी और चिल्लकल्लु से लगभग 10 किमी दूर है; विजयवाड़ा से सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है।

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