उच्चैठ भगवती मंदिर बिहार के मधुबनी ज़िले के बेनीपट्टी प्रखंड में उच्चैठ गाँव में स्थित माँ दुर्गा का प्राचीन मंदिर है। भारत की ओर इसे मिथिला शक्तिपीठ का सबसे प्रमुख दावेदार माना जाता है, जिसे 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता के अनुसार मिथिला पीठ में सती का बायाँ कंधा गिरा था। यहाँ की शक्ति उमा (महादेवी) और भैरव महोदर हैं। हालाँकि इस पीठ का सटीक स्थान विवादित है।
छिन्नमस्तिका रूप में देवी
गर्भगृह में सिंह पर विराजमान देवी की काले पत्थर की चतुर्भुज प्रतिमा है, जिसमें सिर दिखाई नहीं देता – केवल कंधे तक का भाग दिखता है। इसी कारण स्थानीय लोग देवी को छिन्नमस्तिका दुर्गा भी कहते हैं, और पौराणिक कथाओं में उन्हें वनदुर्गा (बनदेवी) कहा गया है। यह स्थान तंत्र साधना के लिए भी जाना जाता है।
कालिदास की कथा
उच्चैठ की सबसे प्रसिद्ध लोककथा महाकवि कालिदास से जुड़ी है। कहा जाता है कि वे पास के एक गुरुकुल में रहते थे और मंदिर व गुरुकुल के बीच थुम्हनी नदी बहती थी। बाढ़ के दिनों में साथियों के कहने पर वे नदी पार कर मंदिर में दीप जलाने आए और अज्ञानवश देवी के मुख पर कालिख लगाने लगे। देवी ने उनका हाथ रोककर वर माँगने को कहा; कालिदास ने विद्या माँगी और मान्यता है कि उसी रात से वे महान कवि बन गए। पास का कालिदास डीह इसी परंपरा से जोड़ा जाता है।
स्थान को लेकर मत
मिथिला शक्तिपीठ के स्थान पर कई मत हैं। कुछ परंपराएँ इसे नेपाल के जनकपुर क्षेत्र में मानती हैं, जो प्राचीन मिथिला की राजधानी थी। बिहार में सहरसा ज़िले के महिषी गाँव का उग्रतारा स्थान और बेगूसराय का जयमंगला गढ़ भी इस पीठ से जोड़े जाते हैं। कई स्रोत उच्चैठ की वनदुर्गा, जयमंगला और उग्रतारा – तीनों को मिथिला के शक्ति स्थलों के रूप में साथ गिनते हैं।
प्रमुख उत्सव और संस्कार
- दुर्गा पूजा और नवरात्रि में भारी भीड़ और विशेष पूजा।
- मुंडन, उपनयन और विवाह जैसे संस्कार भी यहाँ कराए जाते हैं।
- मिथिला की परंपरा के अनुसार मन्नत पूरी होने पर बलि प्रदान की प्रथा भी रही है।
यात्रा सुझाव
मंदिर बेनीपट्टी से लगभग 4 किमी दूर है; मधुबनी या दरभंगा में ठहरकर एक दिन में दर्शन किए जा सकते हैं। मानसून में मिथिला की नदियों में बाढ़ आती है, इसलिए अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए बेहतर है। जनकपुर (नेपाल) जाने वाले यात्री इसे अपनी मिथिला यात्रा में जोड़ सकते हैं।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 5:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक
गाँव का मंदिर होने के कारण समय स्थानीय रूप से बदल सकता है; नवरात्रि में देर रात तक दर्शन होते हैं।
मुख्य आकर्षण
- उच्चैठ भगवती – सिंह पर विराजमान काले पत्थर की चतुर्भुज प्रतिमा, जिसका सिर नहीं दिखता।
- थुम्हनी नदी – मंदिर के पास बहने वाली नदी, कालिदास की कथा से जुड़ी।
- कालिदास डीह – पास का स्थान, जिसे कालिदास से जोड़ा जाता है।
- मिथिला की मधुबनी चित्रकला का क्षेत्र।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: बेनीपट्टी से लगभग 4 किमी; मधुबनी और दरभंगा से बस या टैक्सी द्वारा बेनीपट्टी होकर।
- रेल मार्ग: मधुबनी या दरभंगा रेलवे स्टेशन; वहाँ से सड़क मार्ग।
- हवाई मार्ग: दरभंगा हवाई अड्डा (सबसे निकट); पटना हवाई अड्डा भी विकल्प।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मिथिला शक्तिपीठ में सती का कौन सा अंग गिरा था?
मिथिला शक्तिपीठ असल में कहाँ है?
उच्चैठ भगवती को छिन्नमस्तिका क्यों कहते हैं?
उच्चैठ भगवती और कालिदास की क्या कथा है?
उच्चैठ भगवती मंदिर कैसे पहुँचें?
मिथिला शक्तिपीठ (उच्चैठ भगवती), मधुबनी इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
Gaya, बिहार मंगला गौरी मंदिर, गया माँ मंगला गौरी (सती / गौरी)
-
Vijayawada, आंध्र प्रदेश श्री योगानंद लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर, वेदाद्रि भगवान श्री योगानंद लक्ष्मी नरसिंह स्वामी (पंच नरसिंह)
-
जयपुर, राजस्थान
मंदिर श्री बृज निधि जी
श्री कृष्ण एवं राधा
-
जयपुर, राजस्थान
झारखण्ड महादेव मंदिर
शिव
-
जयपुर, राजस्थान
श्री गोविंद देव जी मंदिर
श्री राधा कृष्णा
-
नाथद्वारा, राजस्थान
श्री नाथजी मंदिर
कृष्ण