महामाया मंदिर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मुख्यालय अंबिकापुर में नगर की पूर्वी पहाड़ी पर स्थित माँ महामाया का प्रसिद्ध मंदिर है। माँ महामाया को यहाँ अंबिका देवी भी कहा जाता है और माना जाता है कि उन्हीं के नाम पर इस नगर का नाम अंबिकापुर पड़ा। माँ महामाया सरगुजा अंचल की आराध्य देवी हैं।
इतिहास और सरगुजा राजपरिवार
अंबिकापुर लंबे समय तक सरगुजा रियासत की राजधानी रहा। सरगुजा जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार वर्तमान मंदिर का निर्माण सरगुजा के महाराजा बहादुर रघुनाथ शरण सिंह देव ने करवाया था। कुछ स्थानीय परंपराएँ देवी की उपासना को इससे बहुत पुराना, कलचुरी काल तक का मानती हैं, पर इसकी निश्चित तिथि उपलब्ध नहीं है।
रतनपुर से जुड़ी मान्यता
एक प्रचलित मान्यता के अनुसार अंबिका देवी का धड़ अंबिकापुर के महामाया मंदिर में और सिर बिलासपुर जिले के रतनपुर के महामाया मंदिर में है। इसी कारण छत्तीसगढ़ के अनेक श्रद्धालु दोनों महामाया मंदिरों के दर्शन को एक-दूसरे का पूरक मानते हैं। ध्यान रहे कि ये दो अलग-अलग मंदिर हैं, जो एक-दूसरे से काफी दूर हैं।
प्रमुख उत्सव
- चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि: सरगुजा और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
यात्रा सुझाव
अंबिकापुर उत्तरी छत्तीसगढ़ का प्रमुख नगर है और रेल, सड़क तथा हवाई मार्ग से जुड़ा है। नवरात्रि में भीड़ अधिक रहती है, इसलिए सुबह जल्दी दर्शन करना सुविधाजनक रहता है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सुबह लगभग 6:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में दर्शन का समय बढ़ जाता है और भारी भीड़ रहती है।
मुख्य आकर्षण
- माँ महामाया – सरगुजा अंचल की आराध्य देवी।
- पूर्वी पहाड़ी – नगर के पूर्व में ऊँचाई पर स्थित मंदिर।
- नवरात्रि – चैत्र और शारदीय नवरात्रि में विशेष पूजा।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: अंबिकापुर रेलवे स्टेशन।
- सड़क मार्ग: रायपुर, बिलासपुर और कोरबा से बस व टैक्सी; शहर में ऑटो।
- हवाई मार्ग: माँ महामाया हवाई अड्डा (दरिमा), अंबिकापुर; बड़ा हवाई अड्डा रायपुर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अंबिकापुर का नाम किस देवी के नाम पर है?
अंबिकापुर का महामाया मंदिर किसने बनवाया?
अंबिकापुर और रतनपुर के महामाया मंदिर में क्या संबंध है?
महामाया मंदिर अंबिकापुर में कहाँ है?
महामाया मंदिर अंबिकापुर में सबसे अधिक भीड़ कब होती है?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
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