दूधाधारी मठ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पुराने मोहल्ले मठपारा में स्थित एक प्राचीन वैष्णव मठ और मंदिर परिसर है। यहाँ हनुमान जी मठ के अधिष्ठाता देवता हैं, और परिसर में राम-जानकी तथा श्री बालाजी के मंदिर भी हैं। यह रायपुर के सबसे पुराने धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।
संत बलभद्रदास और नाम की कथा
मठ की स्थापना स्वामी बलभद्रदास जी महाराज से जुड़ी है, जो तालाब के किनारे पेड़ों के बीच एक कुटिया में रहते थे। कहा जाता है कि वे हनुमान जी का गाय के दूध से अभिषेक करते और स्वयं केवल दूध ही ग्रहण करते थे। इसलिए लोग उन्हें “दूध आहारी”, फिर “दूधाधारी” कहने लगे और मठ का नाम भी यही पड़ गया। प्रवेश द्वार पर सफ़ेद संगमरमर के लेख में स्थापना संवत 1610 (लगभग 1554 ई.) अंकित है, हालाँकि कुछ स्रोत वर्तमान मंदिर भवनों को बाद के काल का मानते हैं।
राजेश्री महंत परंपरा
नागपुर के मराठा शासक महाराजा रघुजी भोंसले ने मठ को संरक्षण दिया और राजपत्र जारी कर मठ प्रमुख के लिए “राजेश्री” उपाधि स्थापित की। तब से मठ के महंत इसी उपाधि से जाने जाते हैं। ऊँची दीवारों से घिरा यह परिसर किसी छोटे किले जैसा दिखता है, और भीतर का पुराना कुआँ आज भी उपयोग में है।
प्रमुख उत्सव
- रामनवमी: राम-जानकी मंदिर में विशेष पूजा और उत्सव।
- हनुमान जयंती: मठ के अधिष्ठाता हनुमान जी का विशेष श्रृंगार।
- जन्माष्टमी: धूमधाम से मनाई जाती है।
यात्रा क्रम
मठ रायपुर शहर के भीतर बूढ़ातालाब क्षेत्र के पास है, इसलिए रायपुर जंक्शन या हवाई अड्डे से ऑटो-टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। शहर के अन्य पुराने मंदिरों के साथ इसे आधे दिन की यात्रा में शामिल किया जा सकता है।
दर्शन का समय
- दर्शन: प्रतिदिन लगभग सुबह 7:00 से संध्या 7:00 बजे तक
- आरती: सुबह और संध्या
रामनवमी और हनुमान जयंती पर समय व भीड़ बदल सकती है।
मुख्य आकर्षण
- हनुमान मंदिर – मठ के अधिष्ठाता देवता।
- राम-जानकी मंदिर – मठ का प्रमुख मंदिर।
- श्री बालाजी मंदिर – परिसर में स्थित।
- स्थापना लेख – प्रवेश द्वार पर सफ़ेद संगमरमर पर संवत 1610 का उल्लेख।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: रायपुर जंक्शन; वहाँ से ऑटो या टैक्सी से मठपारा।
- सड़क मार्ग: रायपुर शहर के पुराने हिस्से मठपारा में, बूढ़ातालाब क्षेत्र के पास।
- हवाई मार्ग: स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दूधाधारी मठ का नाम कैसे पड़ा?
दूधाधारी मठ कितना पुराना है?
दूधाधारी मठ में कौन-कौन से मंदिर हैं?
दूधाधारी मठ के महंत को 'राजेश्री' क्यों कहते हैं?
दूधाधारी मठ में कौन से उत्सव मनाए जाते हैं?
अन्य प्रसिद्ध मंदिर
-
सूरजपुर, छत्तीसगढ़ माँ बागेश्वरी देवी मंदिर, कुदरगढ़ (सूरजपुर) माँ बागेश्वरी देवी (कुदरगढ़ी देवी)
-
Dongragarh, छत्तीसगढ़ माँ बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़ माँ बम्लेश्वरी (माँ दुर्गा का स्वरूप)
-
Raj Nandgaon, छत्तीसगढ़ बर्फानी धाम (पाताल भैरवी मंदिर), राजनांदगांव माँ पाताल भैरवी, नवदुर्गा / त्रिपुर सुंदरी और भगवान शिव
-
Kawardha, छत्तीसगढ़ भोरमदेव मंदिर, कवर्धा भगवान शिव (शिवलिंग रूप में)
-
दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ माँ दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा माँ दंतेश्वरी (शक्ति स्वरूपा, बस्तर की कुलदेवी)
-
बालोद, छत्तीसगढ़ गंगा मैया मंदिर, झलमला (बालोद) गंगा मैया (देवी स्वरूप)