मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

माँ दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा

Maa Danteshwari Temple, Dantewada

दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ माँ दंतेश्वरी (शक्ति स्वरूपा, बस्तर की कुलदेवी) निःशुल्क प्रवेश

माँ दंतेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर स्थित दंतेवाड़ा नगर में शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर बना शक्ति का प्राचीन मंदिर है। माँ दंतेश्वरी बस्तर के राजपरिवार और पूरे बस्तर अंचल की कुलदेवी मानी जाती हैं, और दंतेवाड़ा नगर का नाम भी देवी के नाम पर ही पड़ा है। बस्तर की आदिवासी और लोक परंपराओं में इस मंदिर का स्थान सबसे ऊँचा है।

कथा और इतिहास

प्रचलित मान्यता के अनुसार दक्ष यज्ञ के बाद जब भगवान शिव सती की देह लेकर घूम रहे थे, तब यहाँ सती का दाँत गिरा था – इसी से देवी “दंतेश्वरी” कहलाईं। देवी को बस्तर के काकतीय शासकों की आराध्य माना जाता है, जिनका संबंध वारंगल के काकतीयों से जोड़ा जाता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण सामान्यतः 14वीं शताब्दी का माना जाता है।

शक्तिपीठ को लेकर मत

स्थानीय परंपरा, राज्य पर्यटन और कई स्रोत दंतेश्वरी मंदिर को शक्तिपीठों में गिनते हैं। दूसरी ओर, तंत्र चूड़ामणि जैसी शास्त्रीय शक्तिपीठ सूचियों में इसका नाम समान रूप से नहीं मिलता, इसलिए कुछ विद्वान इसे परंपरागत रूप से मान्य शक्तिपीठ कहते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह हर हाल में बस्तर का सबसे पवित्र देवी स्थान है।

मंदिर और विग्रह

गर्भगृह में माँ दंतेश्वरी की काले पत्थर से बनी प्रतिमा विराजती है। मंदिर के चार भाग हैं – गर्भगृह, महामंडप, मुख्य मंडप और सभा मंडप; गर्भगृह और महामंडप पत्थर से बने हैं। प्रवेश द्वार के सामने गरुड़ स्तंभ है और पूरा मंदिर ऊँचे परकोटे से घिरे प्रांगण में स्थित है। श्रद्धालु दर्शन से पहले संगम में स्नान करते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • बस्तर दशहरा: बस्तर के इस प्रसिद्ध पर्व के केंद्र में माँ दंतेश्वरी हैं; देवी की डोली/छत्र जगदलपुर ले जाया जाता है और हज़ारों आदिवासी श्रद्धालु शामिल होते हैं।
  • फागुन मड़ई: फाल्गुन शुक्ल षष्ठी से पूर्णिमा तक लगभग दस दिन का पारंपरिक मेला।
  • नवरात्रि: चैत्र और शारदीय नवरात्रि में ज्योति कलश जलाए जाते हैं।

आसपास के दर्शन

दंतेवाड़ा जगदलपुर से लगभग 80 किमी दूर है। जगदलपुर में भी माँ दंतेश्वरी का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो बस्तर दशहरे का मुख्य केंद्र है – वहाँ की प्रतिमा श्वेत है, जबकि दंतेवाड़ा की प्रतिमा काली। बस्तर यात्रा में दोनों मंदिरों के दर्शन साथ किए जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सामान्यतः सुबह लगभग 6:00 से रात लगभग 9:00 बजे तक
  • आरती: सुबह और संध्या

नवरात्रि, बस्तर दशहरा और फागुन मड़ई के समय भीड़ बहुत अधिक रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ दंतेश्वरी – गर्भगृह में काले पत्थर की प्रतिमा।
  • शंखिनी-डंकिनी संगम – दो अलग रंगों वाली नदियों का मिलन।
  • गरुड़ स्तंभ – मंदिर के प्रवेश द्वार पर।
  • नवरात्रि ज्योति कलश – मनोकामना के दीप।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: जगदलपुर से लगभग 80 किमी; बस और टैक्सी उपलब्ध।
  • रेल मार्ग: दंतेवाड़ा स्टेशन (किरंदुल–विशाखापत्तनम रेल लाइन)।
  • हवाई मार्ग: जगदलपुर हवाई अड्डा; बड़ा हवाई अड्डा रायपुर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या दंतेश्वरी मंदिर शक्तिपीठ है?
स्थानीय परंपरा और कई स्रोत इसे शक्तिपीठ मानते हैं; मान्यता है कि यहाँ सती का दाँत गिरा था, इसी से देवी का नाम दंतेश्वरी पड़ा। हालाँकि विभिन्न शास्त्रीय शक्तिपीठ सूचियों में इसका नाम समान रूप से नहीं मिलता।
माँ दंतेश्वरी किसकी कुलदेवी हैं?
माँ दंतेश्वरी बस्तर के काकतीय राजवंश और बस्तर क्षेत्र की कुलदेवी मानी जाती हैं। दंतेवाड़ा नगर का नाम भी देवी के नाम पर ही पड़ा है।
बस्तर दशहरा से दंतेश्वरी मंदिर का क्या संबंध है?
बस्तर दशहरा में माँ दंतेश्वरी की आराधना केंद्र में होती है। परंपरा के अनुसार देवी की डोली/छत्र जगदलपुर ले जाया जाता है और आसपास के गाँवों से हज़ारों आदिवासी श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं।
फागुन मड़ई क्या है?
फागुन मड़ई दंतेवाड़ा में फाल्गुन मास में होने वाला लगभग दस दिन का पारंपरिक मेला है, जो फाल्गुन शुक्ल षष्ठी से पूर्णिमा तक चलता है। इसमें आसपास के गाँवों के देवी-देवता माँ दंतेश्वरी के दरबार में आते हैं।
दंतेश्वरी मंदिर कहाँ स्थित है?
मंदिर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा नगर में शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर है, जो जगदलपुर से लगभग 80 किमी दूर है।

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook