गंगा मैया मंदिर छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में बालोद नगर से लगभग 4 किमी पूर्व, झलमला ग्राम पंचायत में दुर्ग–बालोद मुख्य मार्ग पर स्थित देवी का प्रसिद्ध लोक मंदिर है। जल से प्राप्त प्रतिमा की कथा के कारण यहाँ देवी को गंगा मैया कहा जाता है। आसपास के जिलों के लोगों के लिए यह बड़ी आस्था का केंद्र है।
प्रतिमा प्राप्ति की कथा
लोककथा के अनुसार गाँव के पास एक तालाब में मछली पकड़ते समय एक मछुआरे के जाल में मछली के साथ देवी की प्रतिमा आ गई। उसी रात एक गोंड ग्रामीण को स्वप्न में देवी ने संकेत दिया कि उन्हें जल से निकालकर स्थापित किया जाए। अगली सुबह प्रतिमा निकालकर गाँव के पास एक साधारण कुटिया में स्थापित की गई। जल से प्राप्त होने के कारण देवी गंगा मैया कहलाईं। कथा के विवरण अलग-अलग स्रोतों में थोड़े भिन्न मिलते हैं।
कुटिया से मंदिर तक
बाद में श्री भीकमचंद तावरी ने इसका पहला जीर्णोद्धार कर इसे मंदिर का रूप दिया, और आगे चलकर पूरा मंदिर नए सिरे से बनाया गया। आज मंदिर का संचालन एक ट्रस्ट करता है, जो समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर जैसे सेवा कार्य भी आयोजित करता है।
नवरात्रि का मेला
चैत्र और क्वार नवरात्रि में यहाँ सबसे अधिक भीड़ होती है। अनेक भक्त नौ दिन उपवास रखते हैं और दूर-दूर से नंगे पाँव पैदल चलकर माँ के दर्शन करने आते हैं।
आसपास के दर्शन
मंदिर से लगभग 5 किमी दूर तांदुला जलाशय और लगभग 16 किमी दूर सियादेवी जलप्रपात है। दुर्ग से यहाँ की दूरी लगभग 56–58 किमी है।
दर्शन का समय
- दर्शन: सामान्यतः सुबह से रात तक (लगभग 6:00 से 21:00)
- आरती: सुबह और संध्या
चैत्र और क्वार नवरात्रि में भीड़ बहुत अधिक रहती है।
मुख्य आकर्षण
- गंगा मैया की प्रतिमा – गाँव के तालाब से प्राप्त मानी जाने वाली प्रतिमा।
- नवरात्रि मेला – दूर-दूर से नंगे पाँव पैदल आने वाले श्रद्धालु।
- तांदुला जलाशय – मंदिर से लगभग 5 किमी।
कैसे पहुँचें
- सड़क मार्ग: बालोद से लगभग 4 किमी पूर्व, दुर्ग–बालोद मुख्य मार्ग पर; दुर्ग से लगभग 56–58 किमी।
- रेल मार्ग: बालोद रेलवे स्टेशन; बड़ा स्टेशन दुर्ग।
- हवाई मार्ग: स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गंगा मैया मंदिर कहाँ है?
देवी का नाम गंगा मैया क्यों पड़ा?
गंगा मैया की प्रतिमा कैसे मिली?
गंगा मैया मंदिर में सबसे अधिक भीड़ कब होती है?
गंगा मैया मंदिर के पास और क्या देखें?
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