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कार्तिक कृष्ण अमावस्या

भक्तिरस – BhaktiRas

लक्ष्मण मंदिर, सिरपुर

Lakshmana Temple, Sirpur

Mahasamund, छत्तीसगढ़ भगवान विष्णु (मूल प्रतिमा अब उपलब्ध नहीं)

लक्ष्मण मंदिर छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महानदी के किनारे बसे प्राचीन नगर सिरपुर का सबसे प्रसिद्ध स्मारक है। लगभग 7वीं शताब्दी का यह मंदिर पूरी तरह ईंटों से बना है और भारत के सबसे सुंदर बचे हुए ईंट मंदिरों में गिना जाता है। नाम भले “लक्ष्मण” हो, पर यह मूल रूप से भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर है। आज यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है।

इतिहास: रानी वासटा का मंदिर

सिरपुर, जिसे प्राचीन काल में श्रीपुर कहा जाता था, दक्षिण कोसल के पांडुवंशी राजाओं की राजधानी था। मंदिर स्थल से मिले अभिलेख के आधार पर माना जाता है कि इसे राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता रानी वासटा ने बनवाया था। मंदिर की तिथि को लेकर विद्वानों में थोड़ा मतभेद है – अधिकतर इसे 7वीं शताब्दी का मानते हैं।

स्थापत्य और नक्काशी

मंदिर पत्थर की ऊँची जगती (चबूतरे) पर खड़ा है, जिस पर परिक्रमा की जगह है। पूर्वमुखी गर्भगृह के आगे अंतराल और आयताकार मंडप की रूपरेखा दिखती है – मंडप के स्तंभ अब नहीं बचे, पर उनके आधार दिखाई देते हैं। गर्भगृह और उसका ईंटों का शिखर आज भी काफी सुरक्षित है, जबकि मंदिर का बाकी हिस्सा खंडहर रूप में है।

गर्भगृह का द्वार-चौखट पत्थर का है और यही मंदिर की सबसे बड़ी पहचान है। द्वार के ऊपर शेषशायी विष्णु और भागवत पुराण से कृष्ण लीला का दृश्य है, जबकि चारों ओर की पट्टियों में विष्णु के दस अवतार, दैनिक जीवन के दृश्य और मिथुन आकृतियाँ हैं। गर्भगृह की मूल प्रतिमा अब नहीं है।

आसपास के दर्शन

  • ASI संग्रहालय: मंदिर परिसर में ही, सिरपुर की खुदाई से मिली मूर्तियों के साथ।
  • गंधेश्वर महादेव मंदिर: महानदी तट पर शिव का पूजित मंदिर, जिसकी दीवारों में पुराने अवशेष लगे हैं।
  • बौद्ध विहार और अन्य स्मारक: सिरपुर में हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों परंपराओं के अवशेष मिलते हैं।
  • हर वर्ष यहाँ सिरपुर महोत्सव का आयोजन भी होता है।

यात्रा सुझाव

सिरपुर रायपुर से लगभग 78 किमी दूर है, इसलिए एक दिन की यात्रा में लक्ष्मण मंदिर, संग्रहालय, गंधेश्वर मंदिर और विहार आराम से देखे जा सकते हैं। अक्टूबर से फरवरी का मौसम घूमने के लिए सबसे अच्छा रहता है।

दर्शन का समय

  • खुलने का समय: लगभग सूर्योदय से सूर्यास्त तक (ASI स्मारक)

यह संरक्षित स्मारक है, यहाँ नियमित पूजा नहीं होती। प्रवेश के लिए ASI का टिकट लगता है।

मुख्य आकर्षण

  • ईंटों का मंदिर – गर्भगृह और शिखर आज भी लगभग सुरक्षित।
  • द्वार की नक्काशी – शेषशायी विष्णु, कृष्ण लीला और विष्णु के दस अवतार।
  • ASI संग्रहालय – सिरपुर की खुदाई में मिली मूर्तियाँ।
  • गंधेश्वर महादेव मंदिर – महानदी तट पर।
  • सिरपुर के बौद्ध विहार और अन्य प्राचीन अवशेष।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: रायपुर से लगभग 78 किमी पूर्व; महासमुंद होकर पहुँचा जा सकता है।
  • रेल मार्ग: महासमुंद रेलवे स्टेशन निकटतम, बड़ा स्टेशन रायपुर जंक्शन।
  • हवाई मार्ग: स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर किस देवता का है?
नाम लक्ष्मण मंदिर होने के बावजूद यह मूल रूप से भगवान विष्णु का मंदिर है। द्वार पर शेषशायी विष्णु और विष्णु के दस अवतारों की नक्काशी है। मूल प्रतिमा अब गर्भगृह में नहीं है।
लक्ष्मण मंदिर किसने बनवाया था?
मंदिर स्थल से मिले अभिलेख के आधार पर इसका निर्माण पांडुवंशी राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता रानी वासटा ने करवाया माना जाता है।
लक्ष्मण मंदिर कितना पुराना है?
इसे लगभग 7वीं शताब्दी ई. का माना जाता है। विद्वानों में तिथि को लेकर थोड़ा मतभेद है, पर यह सिरपुर के सबसे पुराने दिनांकित स्मारकों में गिना जाता है।
लक्ष्मण मंदिर की खासियत क्या है?
यह पूरी तरह ईंटों से बना है (केवल गर्भगृह का द्वार-चौखट पत्थर का है) और भारत के सबसे सुंदर बचे हुए ईंट मंदिरों में गिना जाता है। इसका शिखर और द्वार की नक्काशी आज भी काफी सुरक्षित है।
सिरपुर रायपुर से कितनी दूर है?
सिरपुर महानदी के किनारे रायपुर से लगभग 78 किमी पूर्व में, महासमुंद जिले में स्थित है। सड़क मार्ग से लगभग दो घंटे लगते हैं।

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