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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री महालसा नारायणी मंदिर, म्हार्दोल (गोवा)

Shri Mahalasa Narayani Temple, Mardol (Goa)

Ponda, गोवा देवी महालसा नारायणी (विष्णु का मोहिनी रूप) निःशुल्क प्रवेश

श्री महालसा नारायणी मंदिर गोवा के फोंडा तालुका के म्हार्दोल गाँव में स्थित देवी महालसा का प्रसिद्ध मंदिर है। गौड़ सारस्वत ब्राह्मण और गोवा व दक्षिण कन्नड़ के वैष्णव भक्त देवी महालसा को भगवान विष्णु के मोहिनी रूप में पूजते हैं और उन्हें नारायणी तथा “राहु-मथनी” यानी राहु का वध करने वाली कहते हैं। महाराष्ट्र-कर्नाटक की खंडोबा परंपरा में म्हालसा को पार्वती का रूप और खंडोबा की पत्नी माना जाता है।

वेर्णा से म्हार्दोल तक

देवी का पुराना मंदिर सासष्टी के वेर्णा (जिसे पुराना म्हार्दोल भी कहा जाता है) में था। 1567 में पुर्तगालियों ने यह मंदिर तोड़ दिया, पर भक्तों ने देवी की मूर्ति को बचा लिया और नदी पार कर पुर्तगाली सीमा से बाहर म्हार्दोल ले आए। 17वीं शताब्दी में यहाँ वर्तमान मंदिर बना और मूर्ति की पुनः प्रतिष्ठा हुई। स्थानांतरण के वर्ष को लेकर कुछ स्रोतों में थोड़ा अंतर मिलता है।

मंदिर परिसर

परिसर में शांतादुर्गा (सातेरी) और लक्ष्मीनारायण के मंदिर तथा ग्रामपुरुष, भगवती, दाड, सिंहपुरुष और म्हालपुरुष – इन पाँच गणों के स्थान हैं। प्रांगण में दीपस्तंभ और लगभग 40 फुट ऊँची पीतल की समई है, जो जत्रा के दिनों में दीपों से जगमगा उठती है। देवी का श्रृंगार लक्ष्मी, राम, कृष्ण, विठोबा और वेंकटेश्वर जैसे विविध वैष्णव रूपों में किया जाता है।

सत्य की घंटी

मंदिर अपनी पीतल की बड़ी घंटी के लिए गोवा भर में जाना जाता है, जिसमें लोलक नहीं लगा रहता। मान्यता है कि लोलक केवल तब लगाया जाता था जब किसी को सच की गवाही देनी होती थी – घंटी बजाकर झूठ बोलने वाले पर तीन दिन में मृत्यु आने का विश्वास था।

प्रमुख उत्सव

  • माघ जत्रा: माघ कृष्ण पक्ष में लगभग सात दिन का मुख्य उत्सव; अंतिम दिन रथोत्सव।
  • नवरात्रि: विशेष श्रृंगार और पूजा।
  • रविवार पालकी सेवा: हर रविवार देवी को सजी पालकी में मंदिर की परिक्रमा कराई जाती है।

सुबह और संध्या आरती के बाद भक्तों को प्रसाद भोजन दिया जाता है। पास ही मंगेशी मंदिर और फोंडा क्षेत्र के अन्य प्रसिद्ध मंदिर हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: सुबह से रात तक, लगभग 6:00 से 21:00 बजे (दोपहर में कुछ समय विश्राम)
  • आरती: सुबह और संध्या; आरती के बाद प्रसाद भोजन
  • पालकी: हर रविवार

मुख्य आकर्षण

  • देवी महालसा – विविध वैष्णव रूपों में श्रृंगार।
  • सत्य की घंटी – बिना लोलक की पीतल की बड़ी घंटी।
  • लगभग 40 फुट ऊँची पीतल की समई (दीप स्तंभ)।
  • परिसर में शांतादुर्गा और लक्ष्मीनारायण के मंदिर।
  • पास में मंगेशी मंदिर और फोंडा के अन्य मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: पणजी–फोंडा मार्ग पर, पणजी से लगभग 22 किमी; फोंडा से कुछ ही किमी।
  • रेल मार्ग: करमळी या मडगाँव रेलवे स्टेशन, फिर टैक्सी/बस।
  • हवाई मार्ग: गोवा (डाबोलिम) हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

देवी महालसा कौन हैं?
गौड़ सारस्वत ब्राह्मण और वैष्णव भक्त देवी महालसा को भगवान विष्णु के मोहिनी रूप में पूजते हैं और उन्हें नारायणी तथा राहु का वध करने वाली मानते हैं। खंडोबा परंपरा में म्हालसा को पार्वती का रूप और खंडोबा की पत्नी माना जाता है।
महालसा देवी म्हार्दोल कब और कहाँ से आईं?
देवी का पुराना मंदिर सासष्टी के वेर्णा में था, जिसे 1567 में पुर्तगालियों ने तोड़ दिया। भक्त मूर्ति को बचाकर पुर्तगाली सीमा से बाहर म्हार्दोल ले आए, जहाँ 17वीं शताब्दी में वर्तमान मंदिर बना।
महालसा मंदिर की घंटी क्यों प्रसिद्ध है?
मंदिर में पीतल की एक बड़ी घंटी है जिसमें लोलक नहीं लगा रहता। मान्यता है कि लोलक केवल तब लगाया जाता था जब कोई घंटी बजाकर सच की गवाही देता था, और झूठ बोलने वाले पर विपत्ति आती थी।
महालसा मंदिर का प्रमुख उत्सव कौन सा है?
माघ महीने की जत्रा और नवरात्रि यहाँ के मुख्य उत्सव हैं। जत्रा के दिनों में पीतल की ऊँची समई दीपों से जगमगाती है और अंतिम दिन रथोत्सव होता है।
पणजी से महालसा मंदिर कितनी दूर है?
म्हार्दोल पणजी से लगभग 22 किमी दूर पणजी–फोंडा मार्ग पर है। मंगेशी मंदिर भी पास में ही है, इसलिए दोनों के दर्शन एक साथ किए जा सकते हैं।

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