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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

योगमाया मंदिर, महरौली (दिल्ली)

Yogmaya Temple, Mehrauli (Delhi)

दक्षिण दिल्ली, दिल्ली माँ योगमाया (श्रीकृष्ण की बहन, विंध्यवासिनी स्वरूप) निःशुल्क प्रवेश

योगमाया मंदिर (जोगमाया मंदिर) दक्षिण दिल्ली के महरौली गाँव में, कुतुब परिसर के पास स्थित माँ योगमाया का मंदिर है। यह कुतुब परिसर के लौह स्तंभ से लगभग 260 गज दूर, तोमर राजाओं के बनवाए लालकोट की दीवारों के भीतर है। स्थानीय पुजारी इसे सल्तनत काल से पहले के उन मंदिरों में गिनते हैं जिनमें आज भी पूजा होती है। यह मंदिर दिल्ली के प्रसिद्ध सर्वधर्म उत्सव फूलवालों की सैर का भी केंद्र है।

माँ योगमाया की कथा

योगमाया भगवान विष्णु की माया शक्ति हैं। भागवत कथा के अनुसार श्रीकृष्ण के जन्म की रात वे यशोदा की पुत्री बनकर प्रकट हुईं; वसुदेव ने कृष्ण को गोकुल पहुँचाकर इसी कन्या को कारागार में रखा। कंस ने जब उसे मारना चाहा तो वह आकाश में उड़कर देवी रूप में प्रकट हुई और कंस के वध की भविष्यवाणी की। इसीलिए योगमाया को श्रीकृष्ण की बहन माना जाता है और उन्हें विंध्यवासिनी से भी जोड़ा जाता है।

मंदिर का इतिहास

स्थानीय परंपरा के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने यह मंदिर बनवाया – यह मान्यता है, ऐतिहासिक प्रमाण नहीं। 12वीं सदी के जैन ग्रंथों में महरौली को योगिनीपुर कहा गया है, जिसे इसी मंदिर से जोड़ा जाता है। स्थानीय पुजारियों के अनुसार सल्तनत काल में यह मंदिर टूटा और बाद में हेमू (सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य) ने इसका पुनर्निर्माण कराया। वर्तमान भवन 1827 में मुगल बादशाह अकबर द्वितीय के समय लाला सेठमल ने बनवाया; स्थानीय लोगों ने भी समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार किया।

मंदिर और विग्रह

मंदिर सादा है – एक प्रवेश कक्ष और लगभग 17 फुट वर्गाकार गर्भगृह, जिसकी सपाट छत पर छोटा शिखर है। गर्भगृह में संगमरमर के कुंड में माँ का काले पत्थर का विग्रह विराजमान है, जिसके ऊपर फूलों और कपड़े के दो पंखे टंगे हैं। यहाँ की परंपरा अलग है: पूजा में घंटी नहीं बजाई जाती, और शराब व माँस का भोग वर्जित है। लगभग 200 स्थानीय परिवार पीढ़ियों से स्वेच्छा से मंदिर की सेवा करते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • नवरात्रि: चैत्र और शारदीय नवरात्रि में भक्तों की भारी भीड़।
  • फूलवालों की सैर: अक्टूबर-नवंबर में तीन दिन का उत्सव, जिसमें योगमाया मंदिर और ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह दोनों पर फूलों का पंखा चढ़ाया जाता है। कथा है कि अकबर द्वितीय की बेगम ने पुत्र की सकुशल वापसी के लिए यह मन्नत माँगी थी।

आसपास के दर्शन

मंदिर के पास अनंगताल बावली है, जो राजा अनंगपाल तोमर के नाम पर है। कुतुब मीनार, लौह स्तंभ और महरौली पुरातत्व उद्यान पैदल दूरी पर हैं, और छतरपुर मंदिर भी कुछ किलोमीटर दूर है।

दर्शन का समय

  • दर्शन: प्रतिदिन सुबह से रात तक (सटीक समय स्थानीय रूप से पता करें)

नवरात्रि और फूलवालों की सैर के दिनों में बहुत भीड़ रहती है।

मुख्य आकर्षण

  • माँ योगमाया – संगमरमर के कुंड में काले पत्थर का विग्रह।
  • फूलों के पंखे – विग्रह के ऊपर टंगे पंखे।
  • पूजा में घंटी नहीं बजाई जाती, शराब और माँस वर्जित।
  • अनंगताल बावली – मंदिर के पास।
  • कुतुब मीनार और लौह स्तंभ – पास ही।

कैसे पहुँचें

  • मेट्रो: कुतुब मीनार (येलो लाइन) – लगभग 2 किमी।
  • सड़क मार्ग: महरौली गाँव, कुतुब परिसर के पीछे; ऑटो और कैब उपलब्ध।
  • रेल मार्ग: हज़रत निज़ामुद्दीन और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन।
  • हवाई मार्ग: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

योगमाया कौन हैं?
योगमाया भगवान विष्णु की माया शक्ति हैं, जो श्रीकृष्ण के जन्म के समय यशोदा की पुत्री बनकर प्रकट हुईं। इसलिए उन्हें श्रीकृष्ण की बहन माना जाता है। उन्हें विंध्यवासिनी से भी जोड़ा जाता है।
योगमाया मंदिर कहाँ स्थित है?
यह दक्षिण दिल्ली के महरौली गाँव में, कुतुब परिसर के लौह स्तंभ से लगभग 260 गज दूर, तोमर राजाओं के लालकोट की दीवारों के भीतर स्थित है।
योगमाया मंदिर कितना पुराना है?
स्थानीय मान्यता के अनुसार पांडवों ने महाभारत युद्ध के बाद यह मंदिर बनवाया। 12वीं सदी के जैन ग्रंथों में महरौली को योगिनीपुर कहा गया है। वर्तमान भवन 1827 में मुगल बादशाह अकबर द्वितीय के समय लाला सेठमल ने बनवाया।
फूलवालों की सैर का योगमाया मंदिर से क्या संबंध है?
फूलवालों की सैर अक्टूबर-नवंबर में होने वाला सर्वधर्म उत्सव है, जिसमें योगमाया मंदिर और ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह दोनों पर फूलों का पंखा चढ़ाया जाता है। यह परंपरा अकबर द्वितीय के समय शुरू हुई मानी जाती है।
योगमाया मंदिर में पूजा की क्या विशेष परंपरा है?
यहाँ पूजा के समय घंटी नहीं बजाई जाती और शराब व माँस का भोग नहीं लगता। लगभग 200 स्थानीय परिवार पीढ़ियों से स्वेच्छा से मंदिर की देखभाल और पूजा करते हैं।

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