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कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी

भक्तिरस – BhaktiRas

महादेव मंदिर, तांबडी सुरला (गोवा)

Mahadev Temple, Tambdi Surla (Goa)

दक्षिण गोवा, गोवा भगवान शिव (महादेव) निःशुल्क प्रवेश

महादेव मंदिर, तांबडी सुरला गोवा के सबसे पुराने बचे हुए मंदिरों में गिना जाने वाला भगवान शिव का मंदिर है। यह पश्चिमी घाट की तलहटी में, भगवान महावीर अभयारण्य और मोल्लेम राष्ट्रीय उद्यान के उत्तर-पूर्वी भाग में, घने जंगल के बीच एक खुली जगह पर स्थित है। कदंब शैली में बेसाल्ट पत्थर से बना यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है और आज भी यहाँ पूजा होती है।

इतिहास

यह मंदिर गोवा के कदंब शासकों के काल से जोड़ा जाता है और प्रायः 12वीं शताब्दी का माना जाता है, जबकि कुछ स्रोत इसे 13वीं शताब्दी का बताते हैं। गोवा के अधिकांश प्राचीन मंदिर आक्रमणों और पुर्तगाली काल में नष्ट हो गए, पर तांबडी सुरला का मंदिर अपने दूर-दराज़ वन स्थान के कारण सुरक्षित रहा माना जाता है। इसलिए इसे गोवा में बेसाल्ट में बचे कदंब स्थापत्य का एकमात्र उदाहरण कहा जाता है।

मंदिर का स्थापत्य

मंदिर का बेसाल्ट पत्थर दक्कन के पठार से लाया गया माना जाता है। छोटा किंतु सुघड़ यह मंदिर पड़ोसी कर्नाटक के ऐहोल के मंदिरों की याद दिलाता है। गर्भगृह में शिवलिंग है और स्तंभों वाले मंडप के बीच नंदी विराजमान हैं, जिनका सिर खंडित है। स्तंभों पर बारीक नक्काशी देखने योग्य है।

रागाडो नदी और महाशिवरात्रि

मंदिर के पास रागाडो नदी बहती है, जहाँ तक पत्थर की सीढ़ियाँ जाती हैं और भक्त स्नान करते हैं। महाशिवरात्रि पर आसपास के गाँवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ एकत्र होते हैं – यही मंदिर का प्रमुख उत्सव है।

यात्रा सुझाव

मंदिर पणजी से लगभग 65 किमी दूर, अनमोड घाट के निकट है, जो गोवा को कर्नाटक से जोड़ता है। रास्ता जंगल से होकर जाता है, इसलिए दिन में जाना और पानी साथ रखना उचित है। इसी यात्रा में भगवान महावीर अभयारण्य और दूधसागर जलप्रपात भी देखे जा सकते हैं।

दर्शन का समय

  • दर्शन: दिन में, लगभग सूर्योदय से सूर्यास्त तक

मंदिर वन क्षेत्र में है, इसलिए दिन के उजाले में ही जाना उचित है।

मुख्य आकर्षण

  • कदंब शैली का बेसाल्ट मंदिर – गर्भगृह, अंतराल और स्तंभों वाला मंडप।
  • मंडप के बीच विराजमान नंदी (खंडित सिर वाला)।
  • पास बहती रागाडो नदी और पत्थर की सीढ़ियाँ।
  • भगवान महावीर अभयारण्य और मोल्लेम राष्ट्रीय उद्यान।
  • दूधसागर जलप्रपात (मोल्लेम क्षेत्र)।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: पणजी से लगभग 65 किमी; मोल्लेम होकर ग्रामीण सड़कों से। सार्वजनिक परिवहन कम है, टैक्सी या निजी वाहन बेहतर।
  • रेल मार्ग: मडगाँव या कुळे (कोलेम) स्टेशन से सड़क द्वारा।
  • हवाई मार्ग: गोवा (डाबोलिम) हवाई अड्डा, फिर सड़क मार्ग।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तांबडी सुरला का महादेव मंदिर कितना पुराना है?
यह मंदिर कदंब काल का माना जाता है और प्रायः 12वीं शताब्दी का बताया जाता है; कुछ स्रोत इसे 13वीं शताब्दी का मानते हैं।
यह मंदिर किस पत्थर से बना है?
मंदिर बेसाल्ट पत्थर से बना है, जिसे दक्कन के पठार से लाया गया माना जाता है। इसे गोवा में बेसाल्ट में बचे कदंब स्थापत्य का एकमात्र उदाहरण कहा जाता है।
यह मंदिर पुर्तगाली काल में कैसे बचा रहा?
मंदिर पश्चिमी घाट की तलहटी में घने जंगल के बीच एक दूर-दराज़ स्थान पर है। माना जाता है कि इसी कारण यह आक्रमणों और पुर्तगाली काल के मंदिर विध्वंस से सुरक्षित रहा।
क्या मंदिर में आज भी पूजा होती है?
हाँ, यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक होने के साथ-साथ जीवित पूजा स्थल भी है। महाशिवरात्रि पर आसपास के गाँवों से बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।
पणजी से तांबडी सुरला कैसे पहुँचें?
तांबडी सुरला पणजी से लगभग 65 किमी दूर है। मोल्लेम की ओर जाकर ग्रामीण सड़कों से मंदिर पहुँचा जाता है; टैक्सी या निजी वाहन सबसे सुविधाजनक है।

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