श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के ईस्ट फोर्ट क्षेत्र में स्थित भगवान विष्णु का प्राचीन मंदिर है। यहाँ भगवान पद्मनाभ – जिनकी नाभि से कमल निकलता है – अनंत (आदिशेष) पर योगनिद्रा में शयन करते हैं। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है, जिसकी स्तुति आलवार संत नम्माऴ्वार ने की है। “तिरुवनंतपुरम” नाम का अर्थ ही है – “श्री अनंत का नगर”; पूरा शहर इसी मंदिर के नाम पर बसा है।
तीन द्वारों से दर्शन
गर्भगृह में भगवान की लगभग 18 फ़ीट लंबी शयन प्रतिमा है, जिसे एक साथ नहीं देखा जा सकता। इसलिए दर्शन तीन द्वारों से होते हैं – पहले द्वार से भगवान का मुख और उनके दाहिने हाथ के नीचे शिवलिंग, दूसरे से नाभि-कमल पर विराजे ब्रह्मा जी और श्रीदेवी-भूदेवी, और तीसरे से भगवान के चरण। इस प्रकार एक ही गर्भगृह में ब्रह्मा, विष्णु और महेश – तीनों के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि प्रतिमा 12,008 शालिग्राम शिलाओं से बनी है, जिन्हें “कटुशर्करा योगम” नाम के विशेष लेप से जोड़ा गया है।
त्रावणकोर राजपरिवार – पद्मनाभदास
मंदिर का वर्तमान भव्य स्वरूप 18वीं शताब्दी में त्रावणकोर के महाराजा अनिऴम तिरुनाल मार्तंड वर्मा ने बनवाया। 1750 में उन्होंने अपना पूरा राज्य भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया और स्वयं को “पद्मनाभदास” (भगवान का सेवक) घोषित किया – तब से त्रावणकोर के राजा भगवान के प्रतिनिधि के रूप में ही शासन करते रहे। 2011 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर मंदिर के तहखानों (कल्लरा) की सूची बनाई गई, जिनमें सदियों से संचित अपार धन-संपदा मिली, और यह मंदिर विश्व के सबसे धनी मंदिरों में गिना जाने लगा।
दर्शन के नियम
- केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति है।
- पुरुष: धोती (मुंडु), कमीज़ उतारकर। महिलाएँ: साड़ी या पारंपरिक वस्त्र।
- मोबाइल, कैमरा और बैग बाहर जमा करने होते हैं।
प्रमुख उत्सव
- अल्पशी उत्सव (अक्टूबर-नवंबर) और पंगुनी उत्सव (मार्च-अप्रैल): दस-दस दिनों के उत्सव, जिनके अंत में आराट्टु यात्रा शंखुमुखम समुद्र तट तक जाती है।
- लक्षदीपम: हर छह वर्ष में एक बार, जब मंदिर एक लाख दीपों से जगमगाता है।
- नवरात्रि में संगीत समारोह।
दर्शन का समय
- सुबह: लगभग 3:30 से दोपहर 12:00 बजे के बीच कई चरणों में (पूजाओं के बीच दर्शन बंद रहते हैं)
- शाम: लगभग 5:00 से 7:20 बजे के बीच
सटीक समय पूजाओं के अनुसार बदलते रहते हैं, जाने से पहले मंदिर की आधिकारिक जानकारी देख लें। केवल हिंदुओं को प्रवेश। पुरुषों के लिए धोती (मुंडु) और बिना कमीज़; महिलाओं के लिए साड़ी या पारंपरिक वस्त्र अनिवार्य।
मुख्य आकर्षण
- भगवान पद्मनाभ – अनंत (आदिशेष) पर शयन, तीन द्वारों से दर्शन।
- सात मंज़िला पूर्वी गोपुरम।
- शीवेली पुरा – पत्थर के स्तंभों वाला विशाल गलियारा।
- पद्मतीर्थम – मंदिर सरोवर।
- कुतिरमालिका पैलेस संग्रहालय – पास में।
कैसे पहुँचें
- रेल मार्ग: तिरुवनंतपुरम सेंट्रल (लगभग 1 किमी) – देश के बड़े शहरों से ट्रेनें।
- सड़क मार्ग: शहर के बीच ईस्ट फोर्ट क्षेत्र में; ऑटो और बस आसानी से मिलते हैं।
- हवाई मार्ग: तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 6 किमी)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पद्मनाभस्वामी मंदिर का ड्रेस कोड क्या है?
पद्मनाभस्वामी के दर्शन तीन द्वारों से क्यों होते हैं?
पद्मनाभस्वामी की प्रतिमा किससे बनी है?
क्या पद्मनाभस्वामी मंदिर में गैर-हिंदू जा सकते हैं?
तिरुवनंतपुरम नाम का पद्मनाभस्वामी से क्या संबंध है?
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है
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