मुख्य सामग्री पर जाएँ

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

भक्तिरस – BhaktiRas

श्री वरदराज पेरुमल मंदिर, कांचीपुरम

Sri Varadaraja Perumal Temple, Kanchipuram

कांचीपुरम, तमिलनाडु भगवान श्री वरदराज (देवराज पेरुमल), देवी पेरुंदेवी थायार निःशुल्क प्रवेश

श्री वरदराज पेरुमल मंदिर तमिलनाडु के प्राचीन नगर कांचीपुरम के “विष्णु कांची” भाग में स्थित भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है। यहाँ भगवान वरदराज (वर देने वाले राजा) के रूप में हस्तिगिरि नाम की छोटी पहाड़ी के ऊपर बने गर्भगृह में विराजते हैं। यह 108 दिव्य देशमों में से एक है, और श्री वैष्णव परंपरा में श्रीरंगम और तिरुमला के साथ इसे तीन सबसे प्रमुख धामों में गिना जाता है। देवी लक्ष्मी यहाँ पेरुंदेवी थायार के नाम से पूजी जाती हैं।

ब्रह्मा जी का यज्ञ

स्थल पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने कांची में अश्वमेध यज्ञ किया था। यज्ञ की अग्नि से भगवान विष्णु वरदराज रूप में प्रकट हुए और ब्रह्मा जी को वर दिया – इसी से उनका नाम “वरदराज” पड़ा। हस्तिगिरि नाम के पीछे कथा है कि ऐरावत (हाथी) ने पहाड़ी का रूप लेकर भगवान को धारण किया। मंदिर को चोल राजाओं ने 11वीं शताब्दी के आसपास विस्तार दिया, और बाद में विजयनगर साम्राज्य ने भव्य गोपुरम और मंडप जोड़े।

अत्ति वरदर – 40 वर्ष में एक बार

इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा अत्ति वरदर से जुड़ी है। अंजीर (अत्ति) की लकड़ी से बनी भगवान की प्राचीन प्रतिमा मंदिर के अनंत सरस सरोवर के जल के नीचे एक कक्ष में रखी जाती है। हर 40 वर्ष में एक बार प्रतिमा को बाहर निकालकर 48 दिनों तक दर्शन कराए जाते हैं – पहले शयन मुद्रा में, फिर खड़ी मुद्रा में। पिछली बार यह उत्सव 2019 में हुआ था, जब एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

सोने-चाँदी की छिपकली और 100 स्तंभ मंडप

गर्भगृह के पास छत पर उकेरी गई सोने और चाँदी की छिपकलियाँ बहुत प्रसिद्ध हैं। मान्यता है कि इन्हें छूने से जीवन के दोष, विशेषकर छिपकली गिरने के अशुभ प्रभाव, दूर होते हैं। विजयनगर काल का 100 स्तंभ मंडप पत्थर की उत्कृष्ट नक्काशी के लिए जाना जाता है – इसके कोनों पर एक ही पत्थर से तराशी गई पत्थर की ज़ंजीरें लटकी हैं।

प्रमुख उत्सव

  • वैकासि ब्रह्मोत्सवम (मई-जून): सबसे बड़ा उत्सव – गरुड़ सेवा देखने हज़ारों भक्त आते हैं।
  • वैकुंठ एकादशी पर स्वर्ग द्वार दर्शन।
  • अत्ति वरदर उत्सव – हर 40 वर्ष में (अगला लगभग 2059 में)।

दर्शन का समय

  • सुबह: लगभग 6:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम: लगभग 4:00 से रात 8:00 बजे तक

सोने-चाँदी की छिपकली के दर्शन के लिए अलग टिकट होता है।

मुख्य आकर्षण

  • भगवान वरदराज – हस्तिगिरि पहाड़ी के ऊपर गर्भगृह।
  • सोने और चाँदी की छिपकली – छत पर उकेरी गई।
  • 100 स्तंभ मंडप – उत्कृष्ट पत्थर की नक्काशी, पत्थर की ज़ंजीर।
  • अनंत सरस – मंदिर सरोवर, जिसमें अत्ति वरदर रहते हैं।
  • कांची कामाक्षी और एकाम्बरेश्वर मंदिर।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: कांचीपुरम रेलवे स्टेशन (लगभग 4 किमी) – चेन्नई से लोकल ट्रेनें; चेंगलपट्टू जंक्शन लगभग 35 किमी।
  • सड़क मार्ग: चेन्नई से लगभग 75 किमी; बस और टैक्सी आसानी से मिलती हैं।
  • हवाई मार्ग: चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 60 किमी)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अत्ति वरदर कौन हैं?
अत्ति वरदर अंजीर (अत्ति) की लकड़ी से बनी भगवान वरदराज की प्राचीन प्रतिमा है, जो मंदिर के अनंत सरस सरोवर के जल में रखी जाती है। इसे हर 40 वर्ष में एक बार 48 दिनों के लिए बाहर निकालकर दर्शन कराए जाते हैं – पिछली बार 2019 में।
वरदराज मंदिर की छिपकली का क्या महत्व है?
मंदिर की छत पर सोने और चाँदी की दो छिपकलियाँ उकेरी गई हैं। मान्यता है कि इन्हें छूने से छिपकली गिरने के अशुभ दोष दूर होते हैं।
कांचीपुरम में कितने दिव्य देशम हैं?
कांचीपुरम में लगभग 14-15 दिव्य देशम माने जाते हैं, जिनमें वरदराज पेरुमल मंदिर सबसे प्रमुख है। इसलिए कांचीपुरम को दिव्य देशमों की नगरी भी कहा जाता है।
वरदराज मंदिर का रामानुजाचार्य से क्या संबंध है?
रामानुजाचार्य ने कांचीपुरम में शिक्षा पाई और लंबे समय तक भगवान वरदराज की सेवा की। श्री वैष्णव परंपरा में वरदराज मंदिर, श्रीरंगम और तिरुमला को तीन सबसे प्रमुख धाम माना जाता है।
चेन्नई से वरदराज मंदिर कितनी दूर है?
चेन्नई से कांचीपुरम का वरदराज मंदिर लगभग 75 किमी दूर है। सड़क मार्ग से लगभग 2 घंटे लगते हैं।

श्री वरदराज पेरुमल मंदिर, कांचीपुरम इन तीर्थ यात्राओं में शामिल है

दर्शन की जानकारी साझा करें

WhatsApp Facebook